|. आय्यमटीयशू ' ज्योतिःशाखम्‌ ४४ परमेश्वरांचास्यक्बषतटी क्यासमलड्क्ृतम्‌ निफ+4 ४474 5%०- क्षत्रियकुमारेण प्लीमदुदयनारायणवर्मणा मागरीभापयाहतुबादितस्‌ त्तद मधघुदापुरस्थ-शास्वप्रछाश-काय्थांलये ( ड० बिह॒द्ूपुर, मुजफ्फरपुर ) नाएन्विस्थाने प्रकाशितस्‌ संत ९९६३ सन्‌ १९०६ >+दाछद इब्झ2++ पा;

हि।॥ 200

' पर 00:5॥885७॥7 00770030)॥000,0800फ

फछ

है! बाप) विधवा शी दी वाया ९ाशालाविक/ हैं 0 क्वावण्नाप्रवत्ञ लागत फियवॉल्त इं्रा० कवएवाप जाते क़रागिनलवें

अतितीपह्यज्ञपक, फ्ोंवापफ्पफ 3[0:3ी3क्प्रक- 5222८: 40 7 आह एकल 9 ॥वोजाद ७5४ 4:555॥.

सदा हम 7चथ तर रे «

2. हर+ 5 य६८० 7८ फट कक हट रच सदा 777 कट? 777 7७ * न्टा रटर कट कटा स्टर न्ट:*

ध्ज्य्ज्ड्ख््क्क्ल्थ्ट

एकिएग खैजाणी घंणरी। माँ घीपरताय एपशाजाजाड गाल

| कि कि] 5 | दर 6

नस लानचहस्पस्ल टला लाल

20068

07000 0000808000000080 000

2४४५

>स््टल:

52776 67/60/0220 206

पट एस्पस्ट स्पा लिए नर नया ४0008

# के

रपट

८4 कर 2८

डे

4 2 किक ॥९० ८०९ 322८ /ज १2 इणड: ४!

(है7060 १0:८२ / 7 7रलटक्‍7 24०4० ७६३:

मम्य ३) झस्यरशइमायत्तो रत म्‌

4 ३०5

! जोश्म ॥.

गम

समपणम्‌

(2643-32 अ्रीयुत मान्यवर क्षत्रियवंशावतंस परमोदार सनातन आय्यंधम्मंरक्षक श्रीमहाराजाघिराज सर नाहर

सिंह वहादुर शाहपुराधीशेष्वित-उद्यनारा- यणसिंहस्य कोटिशोनतय स्स्फुरन्तुतराम्‌

टः (4

भभो ! आप ने सनातनझाय्येंवम्मे फी उछति करके दस भारत यासियों | का 'परस उपकार किया है। एंश्वर श्रीमान्‌ ऊेंसे घम्मेरक्षक, दानशील, | आदर्शपुरष आर आाप्येप्रन्यों के उम्रायक्ष मद्दाराजों की प्रतिदिन | संस्पा यट़ाये श्रीभानू फी रूचि स० आा० थ० की जोर देख कर मैंने येद के छः | शपतों में से नेश्रकूपी येदाड़ु ज्योतिष फे-उस अपूर्व धन्य का भाषानुयाद छिपयाहै शिम में झाज १४० यप पूर्व ही से एचियो-भ्रमए-लिस रवसा है। यह ,शायेभटीय था शार्पसिद्दान्त प्रष संस्कृत टीका सहित जम्मन ' देश में छपघा चा-आज सफ भारत यप में इस की ओर फिसी दा धूपान नहों गयाधाम ने थह परिश्रम से इसे जम्मेन देशान्तगेत लिपशिफ रपान » से संगया कर सटीक सानुयाद एवं विस्तृतभुभिफा सद्दित उपयाया दै। इस शटोक सानुयाद येदाऊहु ज्योतिष ग्रन्थ को मुद्रित करा श्रीभ/नों के कर कमलों में विनपपूथेक झपेण कर झाशा दाश्ता हूँ कि श्रोमान्‌ इस को स्वीकार कर मुभ अन्याय आपेग्रन्धों के सागवाद प्रक्मामित ; करने में रत्ताद्वित करेंगे ; शार्यप्रदाश-काय/रय अमलमहपची ---- स्पान-सचघरापर, विदृद्पर | क्षात्नय कुमार--- जिं० मजप्फरपर उदयनारायणासह ध्

0955595०2090950०90०2०59550%0700७2555:2550:-5>52५5

र्प्लट्पलर्प्टपत रे त्त्ट्म ह्ह्त्ट्त्ठ्त्ट [कटे जैन बर्न के कण करी

!

७, /ु 27% 7? टच

2 /५,३०./ ७,

९९”

का

5 आा्य्यभटी यस्प- समुद्र-मन्थन “ऋषीणा भारतीभाति सरला-गहनान्तरा

घीशस्तत्तत्व मच्छान्त मदह्यान्त प्राकृता जनाडश भाश-श्रयोत्‌ आाचीन प्रन्‍भों की वाय्य-शैली कूपर से तो बहुत सर भाशूम होती है परन्तु उन के आशय यहुत कठिन हुशा करते जिन विद्वान लोग तो समझ लेते पर प्राकृत पुरुष मुग्ध होफर शर्थ का झन करने खगते हैं समुद्र-मन्धन उपाख्यान महरभारत के शझादि पे में १७-से १८ अध्याः में इस प्रफार यणित है किः-

एफ समय मसद्दात्मा देखगश समेरू पर्ेल के कृपर एकश्र प्ोषर झम झराप्ति फे लिये परस्पर यिधार करने लगे। इसो शबसर में परम देय नार था शाएर थोलें है पितामह ! देवगण झौर कखसुरगण मिलफर रुमुद्र मध में प्ररत्त दो इस फे अनुसार देय ओर ऊस॒र गणा मन्यन-दुग के गीर भन्दर पर्थत फो टण्ााएने शगे, परन्तु ये कृत कार्य्य हो सके | इस के था परम देव नारायण फी धाशानुसार शनन्‍्त देय ने भन्‍्दर पर्यत को णह शणाषह्टा कौर देशगण सन्दर पयेत को लेकर ममुद्र के तीर पर भागे | अगर घामे की ज्वागा में समुद्र, शपने सन्‍्यन में सम्मत हुजा-घौोर कमर राज सनदए पर्यत फो शपने ऊपर धारण करना स्वीफार दिया

देव राज इस्द्र, फूर्भ के पीट पर रन्दर ! रक्‍्गा छर मन्धन रज्जु (सं धने पी होरी ) याशुक्ती ( सप ) द्वारा सन्‍्दर फो बांधकर समुद्र सन्‍्शन प्रपत्त एए शाप मे थासुशी के गले के उपरले भाग फो पफट्ा | णी देपगप ने पृष्य फी शोर परशुड़ा विनोष्टन फरते सम्दर पर्यत पर प्षों कौर क्लोषधियों थे निर्माण लीर रण भगुद्र कल में निषतिः झहीगले लगा ऊीए ऋूमस पके सपष्प रण सोग में देवताओं का जरीर झाद्ूर भोले लगा, देवाए धगर हुए झपूर्द रण मे शिक्िित शो गरुद्र फा जल दूध ही शएा घोर दव मे शत पच्यत हुया +

इमट्ट शम्दग में पटिसे दृध रे चन्द्रमा डचचण शु7 आर शत मे हाच्चीदेधी, अरदेदण, चप् चदा शाम घोषा घीर उत्प्त दशवत कौरतुभ शलति फ़ाशः लक कण कीहर५ शरीक परम देव मागायद में खबने ऋदुध में भारत किया

प्र

भूमिका ह् पारिजात और सुरभि उत्पन्न ठुपी।लद॒गी, सोम, स॒रा और उद्यैःश्रवा आदित्य साय सें देखताओों के निकट गये इश थे। अनन्तर घ्यन्तरि अमृत से भरे श्वेतकमएडलु हाथ में लिये झूपर शुए। और दान्त में चारों घेद से विभूषित पैरावता हाथी निकला। देवरा गे ऐराखत दो लिया। अन्‍्त में फाशफूट थिप उत्पन्न हुआ | हलाहइल विषके गन्‍्ध से तीनों लोफ मोहित हुआ प्रह्मा प्ती आज्ञा से महादेव ने इस विपपान यार लिया। तय से महादेव जी का नाम « नीलकंठ छुआ। इधर अझत पान फे शभिलापी देवता और अशरों में मुट्ठ उपस्यित हुआ, परस देव नारायण ने सोहिनो रूप धर कर असर के निकट उपस्पित हुए। इस सोहिनी मूत्ति को देख कर विश्नृढ़चित्त शसुर गया परिवेशनाथे श्रमत के भाण्ड को भोहिनी थे हाथ सें समर्पण करने में सम्मत हुए अमृत को दर कर मोद्दिनी संग्राम से चल निकली। संग्राम समय देवगण मोहिनी के हाथ के श्रमत दो पान फरने लगे। इसी अवसर में देवता का रूप चारण कर छिपा हु 'राहु' शझस्तपान दरतणे में प्रसत्त हुमा किन्तु चन्द्रमा थौर शूमे ने इस की घुगली कर इस फी कपटता को प्रकाशित फर दिखा छौर परस देय सारप्यण ने “सुदर्शन ' ( उक्र ) द्वारा राष्ट्र दो शिर को काट डाला कटा हुआ राहु का ससस्‍्तक शाष्यण मण्दल में छड़ कर एथियी पर गिर पडा जो बैर निर्यातनाथ (बदला लेने के लिये) जब सक यीच में राहु, अम्दभा और सू्य को ग्रस लेता हैं जिस फा नास ग्रहण है 0 दुवासर सभर में स्वयं नारायण ने प्रवेश कर सुदर्शन द्वारा अगर दुख को दिक्ष मित्र कर दिया और सुर मुदद भूमि घर शोभा देने लगे। भरमे मे शवशिष्ट अस॒रों ने रण में हार फर एपिवो और समुद्र जल में मवेण किया देवराज प्रमुख देवताओं ने जगत भाग अशुन को क्‍सदान किया। श्रीमदुभागयत के ८स रद्ध में अध्याय से १९ थें अध्याय तश समुद्र भपन का बरोन है ! भागषतके भत से घहां भेद दीर३ पष्टला है, रुप का सारांश नीचे लिएय चाता है। भद्दाभारत में देवताजों को अमृत पीने को इच्छा क्यों हुए ? इस का कारश नहीं लिखा है; किन्तु श्रीसटुमागवस्‌ रे लिखा है कि अति के पुत्र भड्टएंश रद दुत्वॉसा के जमिशाप से देवराध

ड्न्द्र ओऔखए्ट-हुए झमुर उद्द में देद-डेना हार घयोी इन्द्रादि

र्‌ देवगण ने 2 खगराज्य से साड़िन हो भतल फीर पष्ताल

पर शाकर शझाश्रथ लिया।

आय्येमटीयस्प- सुर गण ने खर्ग राज्य पर अपना अधिकार जमाया। यज्ञ कादि एक भाः द्‌ हो गया। भूस से पीड़ित बन्द्र आदि को ने निषपाय हो सुम्रेस पर्वत फ॑ टी पर जाय बरस्मा की शरस लियी। और ब्त्मा, मुख देवगण की स्तुरि सन्तुष्ट हो परमदेव नारायण ने देवरा इन्द्र को उपदेश दिया फि प्रमत से यलवान्‌ हो दर तुम असुरों यश फो रण में जीत नहीं सकते। ऋर देवता एंवं असुरों के मिले दिसा समुद्र गन्यन से अमृत मिलने फ' न्‍्य दूसरा उपाय नहों ! इसलिये झस॒रयण के साथ कपट सन्धि कर दोनो तर मिलकर झमुद्र सन्‍्थन फरो समुद्र मन्‍्यन से उत्पन्त अझत परिवेशन के एय में शहरों को उग कर देवताओं को पध्रम्रत पान फराझंगा। भारायण आदेश से इस्द्त के शएर पलि रेबत भगु-पुत्र यलि राजा के नाथ सन्धि गपन छार शमुद्ध सल्‍्यनार्थ उद्योग फ्लिया इस के दाद देखता और असर से भन्द्र पर्वेत को उखाड़ा और गुड़ यो पीठ पर भन्दर फो रक्स कर दद्ग के फिनारे लें ज्ञाये समुद्र मन्‍्थन के पहिलें हलाहल विप झौर क्रम सुरभि, उच्चेश्रवा, ऐरायत, दिग्गज, आर शख्रमु प्रभूति हस्तिनी, रिजात पुष्प, झप्सरा, कमा देदी, वारुणी, कस हस्त धन्वन्तरि ऊपर [) राषुधध उपासण्यान इस पुराण में भी है। पिप्णुपुराण के शंश, ग० अध्याय में समुद्र मन्‍्थन छा घशेन है ॥? प्णुपुराण के सतल शे समुद्र सन्‍्धग से पढ्दिले सुरशि, क्रम से धारुणी, पारि- त, शीतांशु चन्द्रमा, दलाएल बदिप, कमणइलु हस्त धन्वन्‍्तरि, और श्रीदेधी रक्ष हुई' किन्तु किष्णुपुराण में राहुयध का यान नहीं है ! ब्रह्म हो पुराण फे प्रकृति सष्ठ फे ३८ थें झष्याथ में राभुद्र मन्‍्यन का यान है व्रायष्ट पुराण के सत से समुद्र सन्‍्यन में सत्र से पह्धिले धन्वन्तरि और हम अमृत, उ्येशभ्रवा, नाना रब, ऐराबव, लक्भोदेवी, सुदर्शन चक्र निकले इन के प्यतिरिक्त ऊम्पान्य पुराणों में भी समुद्रम्धन का यर्णन है। पुराणों में समुद्र मन्यन झा वशेन है ढादने भे शशिक्षित लोगों में इस पार को रूपझ दःए फर सद्दण फरना नह्टों चादसे ? क्षिन्तु उपाख्यान के भय दा शगस्भव शोगे फी सभालोचना दरने घर इस की रचना अऋरधेबाद पर टै यद मदत दी में रिंद्ठ द्वोता है चित थी गरदर पर्वत फा दर्गट्रना कैसे गम्भव द्लोगा? दूधरे गथने की से वासुझी (सर्य) शपते धमवय जप वी यासुकी जैव से सन्‍्दर परदे को

ड़

भमिका दर

ह]

धाएग किया तो उन सनय एथियो किस पर थी ? ( ययोंकि पुराण में जिसे , शनमार लोग ममरते हैं फि फ्रेप नाग पर फ्थिवी ठहरी है) दीकरे, एथिवी एप्न्‍न २० करोड़ बे भाइल है, उस में ९५ करोट साइल में समुद्र विस्दत है.। इस सुयिस्तीणे समुद्र का मन्पन दींसे सम्भव हो सकता ? चौथे, विष्णुपुराणा फे मत से महपि दुबांसा प्रदत्त पारिजात साला देखशाज इन्द्र ने ऐरावत के गिर पर पह्टिना दिया, ऐरादत फत्तक महरपि प्रसादुभत घह पारिजात माला समि के ऊपर फेफी गड्ढे इश से महर्षि दुर्मासा के फ्रीध फी उत्पत्ति हुइ्ड। आर उसी क्रोध के कारण सहर्षि फा शाप हुल्ला। उस के पश्मात्‌ समुद्र मन्‍्धन में ऐरघल फी उत्पत्ति हुई यह व्योंकर सम्भव छोगा ? पश्चस, सहाभारत में लिखा है कि भमुद्र मन्‍्पन से निकले हुये रत आदित्य गा से (झयन भागे से) देवताशों छे समीप गये / यदि देघगण ने एपियो पर आकर एथिदी पर फे गन्‍्दुर पदेत फ्रो उखाड़ कर एपियो पर के समुद्र के सीर में रदफर समुद्र अन्यन रिया, तो मथने से उत्पन्त रण आदि आफाशस्य शयमन मागे में फिस प्रकार देवताओं के निकट जारूफते ? सुतरां यह ऋयश्य दी मानना पह्ठेंगा कि इम उपाय्यान में शवश्य छी कोई झति यूढ झभिप्राय है घेद पटने से हमे इस बात फा ज्ञान हुआ है कि ' रामुद्र, * सागर, ! | आम्दों शे शषिकतर स्पानों में छत का बेन किया गया और धंदाफू + निक्त शारद में ( ९४१४) झन्तरिक्ष नामानि सगए समुद्र “४ ऐसा उल्धिरिति है। समुद्रात्‌ अन्त रिक्षात्‌ इति सापनः शौर पुराण में जल शब्द फारण यारि अप में व्ययदृत दृष्ट होता है कसुतरां भष्ट पिपों ले पूराणों में समुद्र सन्‍्धन समय में समुद्र झर सगर शब्द को आा- काश छपे में ध्यवद्टार किया है ऐसा घोप होता है। ऊौर समुद्र भन्‍्धन घथे ने शाकाशरय पदाघ दा सन्‍्पत ससभमना उपास्यान को सट्टूत और संलग् द्ोना- घोष ऐता है। झौर भम्धन से निकले हुए रण झादंदि देखता के निकट हपन भाषे से ज्ञा सकते समुद्र सन्‍्धन डपास्थान फा प्रकत घर्ष यद है कि समद नाम झत्तरेत्त जोर सम्धन माभ-शयोलन्य दिध्य घष्ट

सक्तत्र झादिकके रुच, चति स्थिति झादि छा पता लगाना (-०फ्तनणाा

हो तृत्स्कु र्पृष्पक ) हे

कि प्रपनिज+-++ शुददाभे दुषा घस दिधता रपे एछो दश्तमाशिषनीं राधिं समद्रा दत

दिपप्पपेस्मे इस पुस्ग्फ्एसू ? ऋगरदे। ११४३! ६!

$उहगशर्श कोपेन ऋ्ताएई शोगफे उड़े प्रष्य पैर दुए प्रदतरन्टे रापर

ख़ाय्यमटी यश (ब्योतिष शाख्र का शमुशीलन)। वेद विद्चित 5 यशादि के सममादि णंय के लिये ज्योतिष शाय्राएत की प्राहि के सिये देंब (पराण) आर धरा (अन्धकार) में मेल छुला (दोनों पक्ष ने मिजकों कल किया सन्त पवेत ख्कप ''फ्रान्तिपाव बिन्दु ! में पाप की > चाली रेसा तंगीरि हुयी, छीर क्रम से गोलाई रूपी दिन रात “विर्भूत और तिरोभूत गोलक विशोष्टित झीर सथित हुछआआा क्रम से ज्ञो सता रूपिणी ( चान्दनी “लद्गी” के साथ चन्द्रमा फी स्थिति स्थान, राशि भर्र में निर्णीत हुई भौर सगेल के बीच “सुरभि” ( गी ) रूपिणी “यिवी फी अवस्िति स्पा निराकृत हुईं “कौस्तुभ” रूप “घुव” तारा कविर्ट मूत्ति के ह्द्य में स्थ पित हुई। और ग्रह नक्षत्रगण राशि चक्र के या सन में सब्िविष्ट हुये आर साथन काल यथोचित रूप से लिर्ण्शी होने लगा। याग, यज्ञा (तिथि आदि विचार पूर्वक) ऋनुछ्चित होने लगें। «सुल्विन्तारि” रूप से कुम्भ रा धनु राशि के ३० अंश शनन्‍्तर पर स्थापित हुआ सहधि पराणर ने खिप्एु पुराण के समुद्र सन्‍्थन के उपसंहार में यों लिखा है फिः-

“ततः प्रसन्न्नभा: सूर्य: मययों + तप्मना

ज्योतीपिंच यथामार्गं अययुमुंनिर तन ! ४7 श्र उपसंहार में वक्तव्य यह है कि, प्राचीन सम से "और जातियों हक. ल्वाभी झौर चन्द्रमा पत्नी रूप से परिगशित ही 26 20003.

€पष्टतया लिखा हैः- “समिथुनंडत्पादयते रयोज्जुओ चें

प् 'तेप्र० उपनिषदि ॥9॥ एते मे बहुघा प्रजा: परिष्यतः 0” हि? उपानपाद ॥8 सह्ि थ्ये को स्त्री पुरुष रूप से शथेः-प्रणा सृष्ि कामना से अह््मा ने चन्द्र, फ्ते साष्टि हुई पृष्टि फिये और सख्ये चन्द्र से सन और सन्‌ से सा आह डुई हू गे स्व रे -ग्रह कह कर परिगणित फलित ज्योतिष के मत से यद्यपि चन्द्रमा सती- पति कह कर परिगणित है किन्त चान्द्रमास गणनार्थ चन्द्र, नक्षत्र वा ताराप कि है दोनों कृति की रक्षा के लिये होता चन्द्रमा का इसप्रकार स्त्री एवं पुरूष दोनों पर रन घन हि म। की स्वतन्त्र करने में पीराशिक गण “चन्द्रविम्यों और घन्द्रमा की ज्यी जैसे: 20५० हे के हज नाम हुआ, ऊैंसेः-- बाध्य हुंए। समुद्र सन्‍्यन)से चन्द्रविम्य का लघ्छी +

क्षाय्रिणीपत्िर्ठ :”। शब्द्रलाबली। “दाक्षायिणीपतिलंक्ष्मी-सहजश्न सुघाकर कई

भभमिका 7 9

अन्द्रधिम्य॒ तारापति हुए ज्जीर लकष्मधारिणी व््योत्स्नारूपिणी चम्द्रिमा चान्दसी ) शमी देवो विष्णुप्रिया या सृय्े-पत्नी हुपी वैदिक प्राधीन प- लि और पौराणिक नवीन-पहुति, दोनों ही की समारसा हुपी

अब भी “प्रीनहेगड” यासी डस्किमो जाति में यह विश्यास है कि सूर्य प्रपन्नी पष्ती चन्द्रिमा के पीछे युगयुगान्तर से दौड़ रहे हैं किन्तु कभी च- न्द्रमा को स्पर्श नहीं कर समझे | और इन दोनों की यद फ्रीष्ठा उपलध ही एथिवी पर दिन रात होते हूँ

सर्यसिहुन्त ऋादि ज्योतिष शाखत में जो 'पहण' के कारण दिख ला ये ये हैं उस फा स्थल तात्यये यदद है कि 'शयनद॒त्त! परस्पर तियंकभाव से ऋ- व्श्पित है चन्द्रमा के कक्षा घृत्त का एक अर्ट्टांण अयन घृत्त के उत्तर में फौर झपर शट्टांण 'अपन दृत्त' के दुक्तिण में श्रवस्थित और 'अयन मण्ठल! शीर चन्द्रफक्षा के 'छेद्‌ विन्दुद्वण' को पात कहते हैं इस पात के दोनों बिन्दु की योग रेखा पर शमावास्था के नन्‍्त में चन्द्र शौर सू्ये के अवस्थित टोने से सूर्यग्रहण दोता है। इस पातविन्दु-द्वव की योग रेसा के मध्यभाग में सूपंधिम्ध शप्रवस्थित रहते हैं। इस “योगरेखा! की “राहु” कल्पना फरने से मू्ये विम्धरूप “सुदर्शन” ( चक्र ) द्वारा राहु दो खणिडत होता है अर पात फे दो बिन्दुओं में से एक को “राहु” और दूसरे बिन्दु को “केतु” कहते हैं। या इन दोनों विन्दुओं को राहु ऊलीर सांप की देह की नाई एग्रिवी छाया सध्ये चन्द्र प्रवेश फरने से “धन्द्रयहण' होता है ऐसा कहने से श्थियी छाया को 'केतु'! कहना झमुचित नहीं। ऐसर अथे करने पर समुद्र भन्यम में राहु का श्रगर द्वोना और “सुदर्शन! द्वारा राहु का शिर फटना, दोनों ही व्यापार सद्भत श्लीर बेदाद्भीभत ज्योतिष शाखानुमोदित द्वोते हैं

समुद्रमथन-ठपास्पान में मेह परवेत, नारायरणदेंव, देव, शसर, शनन्तदेख, शरमुद्र, अमृत, कूमे, इन्द्र, यास॒ुकी, दूध, छत, सुरभि, पारिजात-पृष्प, रावत द्वाथी, उपःश्रवा घोष्ठा, बारणो, सोस, लट्मी, दहलालहल-विप, नीौलकणठ, अशतभारष्ठ, अजुन, दिति अदिति और घन्वन्तरि आदि, शब्दों की ध्यास्या क्षियो गयी है. परन्तु वेद, निघण्दु, प्राहमणग्रन्थ, १८ पुराण तथा घाल्मी- कीयप शादि उल्लिखित-समुद्रमथन पर-दिचार अलग पघस्तकाक्षार रूपेगा- यहां दिस्तार भय से-संक्षिप्त लिखा गया ड़

ए्‌ आार्पभर्टी पम्य--

श्रीकृप्णाली छा की आधिदेधिक सख्याग्या की अवतरणिका

| चम्द्रगा की 3३ सा ' फिप्रनी, भरणी, प्रभ सि, (नद्यप्र) पलट गा एा घर या घडियी कि इस श्णा में गए शति आउयज्यभान फिसी की गयान में कए गयी दोशा छिम्मु पुराणों भैसे खनेका (दुसरे शार्यों मेंझायः सीग प्रदार के यफन हैं एृद झाध्य।त्मिक सारा शझाधिदेधिफ रौर तीगरा झाधिभौतिफ) सपक ं, शिनफा राघफत्य मे

फकाषट्गा चीराशिश जुयता ६॥३3 गशाप्र घर्वाएं

राइसा उपलब्धि नहों फिया दागा। शी एश नामछ कोई प्यक्ति थे नहीं दे

फोएँ प्रमाण झय तक नहीं मिला है|. प्रत्यत ऐसे प्रमाण सो भगे पाये हे हैं कि क्रीफृषा नागफ एक शष्छ झ्यादण पुरुष था पुरुषोत्तम सघरिस्र ध्या शुए है जिन फा इतिहास गद्याभारत में £। एयं श्रीकृष्ण सम्धनदी इस

फे अतिरिक्त भागयत जाएदि पुराणोर्त ऐसे गनिनदर्माय उपास्यानर जिन शेफर थिधर्मो णोग एगारे पेदोफक्त स०्झा० धघम तथा सारे गद्यात्माओं ' फलटू दिसलाते हैँ शिनकफा यथोदित समाधान उसारे भाई लोग ज्ञार के फारण नहीं फर सकते देद तथा धंदाज्ञ शादि देदिफ ग्रन्पों के देए मे पुराणोक्त उपाण्यानों फा सात्पय समम में श्याता (। दीगा फि पाठ फो वद्यसाया ठपाण्यान से ज्ञात हीगार-वैदिय फाल से हुर्य, उपास्प 4 द्वोते आये हैं, आश्राप्मण घायडाट पर्यन्त सब ही ऊाये इस समय भी शस से गात्रोत्थान कर, पू्े मुंह शो सर्यदेय को प्रणाम दिया फरते ईै; सूमेद ही गायत्री के उपास्य देखता हैं। शाराग्राम शिला शादि उपलब्य फर शि प्रकार देश्यर की उपासना की व्यवस्था मानी जाती है, उसी प्रशार सूये१ भी उपलदय कर देण्थरेपासना थी व्यवस्था फी गई है। श्रीकृष्ण भर झन्प १० शघतार, सब ही दिप्णु के ्रवतार कहे जाते हैं। श्रीकृष्ण नाग से कोई घ्यरि अवतीणे हुए, जब यद्द स्वीकार फर लिया यया, झौर वे शबतार कद्धकर गा भी गये तथ सन के जीवस के साध विष्णु या से (दारण वेद में विष्णु शी सूर्य एक) की लीला सिश्चित कर देना असम्भव नहीं है। श्रीकृष्ण की वाल्य लीला के साथ जो सूर्थ की खीला मिश्रित हुई हे बहुत प्रमाण पाई जाते हैं | वाल्य-लीला यदि इस प्रकार रूपक फे ऊपर न्यस्त किय जाता, तो परम पश्चित्र गीता शास्त्र के प्रवत्तेक फे चरित्र में “परदाराभितत जन” दोप अवण्य छी लगता परीक्षित राजा ने श्रीकृष्ण जी फी वाल्य- खीला सुनक्कर शुकदेव जी से इस प्रकार प्रश्न किया था किः--

भूमिका ह्‌ “संस्थापनाय घर्मस्य प्रशमायेतररुयत्च अवतीर्णो हि भगवानंशेन जगदीश्वरः कथ॑ घम्मंसेतूनां वक्ता कत्ताभिरक्षिता प्रतोपषभाचरद्‌ अह्मन्‌ परदाराभमिमर्शनम्‌ आप्रकामो यदुपतिः कृतवान्‌ बैजुगुप्सितम्‌ फिमभिप्राय एतं नः संशय छिन्धि सुत्रत ! ॥” जिस संशय ने राश परीक्षित के मन फ्ो झमाहोशा था सन्दिग्व दिपा था वह्दी संशम शाज सनेक्त लोगों के मन में उठता है। स्थतः दी यों के मन में यह प्रश्न होता है कि घम्संसंस्थापनाध शीर अधम्म के नाण लिये जिन का जन्म हुआ है थे परसयोगमन झप शड्रार्म था कुरिसत फर्म में कर भदृत्त धोंगे ? था तो यह फोई झ्ााध्यात्मिम व्यापार है था फि- ध्योतिष शारदोक्त द्रिपय फा रूपक है। राधा फो छादिनो शक्ति (घन रस्म) भानना पहुगा या राधा को “रावा” नहधात्र सानना पढ़ेंगा। नहोंसो बतार फी भय्पोंदा फी रता नद्दों ऐसी | शुक्रदेय जी के मुझ से शो राजा पेज्नित के प्रश्न का उत्तर दिया गया है उसे फो्ट भी सनन्‍्तीपष जनश (रुत्तर) हों गान सफता #इृश्वराणां वचः सत्यं तथैवाचरितं क्चित्‌। तेपां यत्‌ स्ववचो युक्त युद्धिमांस्तत्‌ समाचरेत्‌” थट्ट चात घुनने मे किसो के सन फो शट्टा नहों जातो सो प्रोधित का ती सन्‍्देंद् दूर हुमा शो या नहों इससें सन्देद ऐो में हजारों दुष्कमे कम- गा, रस पर कोई र्याल करना में जो कहूँगा चद्दी करमा,,। ऐसो धाव किसी धम्मे मवत्तेक प्यक्ति के में शोभा नहीं देंदी | छबमार का प्रयोशन क्या 2 हस पर अवतारधादो लोग कष्द ते हैं कि भनुष्पों को शिक्षा मिणना ही अद- तार का प्रपोशत ऐै जिस काम्य में समृष्यों को शुशिता 'हो फर कशित्ता पोती ऐसे काम्पां को झूपतार में झारोपन करना नितान्त झगइत * चादे छित्त भाष से हो देंछा ऊझापे शीकृष्य ली वो दचारएनीलः यो ऐलिटामिफ घटता कट्ट कर भानना धुत दिन हैं। दाल्ए लोला में मानाप्कार का शा- अथार्सिक दस भो एम भे को घेदाहु--ज्रोवतिए के झनसार शक वर

है

१० आखय्पभटीयम्य- किया है। इससे हमारा प्रयोशन यह है कि सनुष्प को सथ् थिषयों में सत्य अनुरान्धान फरना चादहिएे। यदि हमारे दस रझपफ यान में फो ध्रान्ति पिट्ठ तो,उसे दग सादर स्वीकार फरेंगे। श्रीकृष्ण या श्रीरामचरप आदि गद्यपुरुषों किपी ३२ चरित, में कोपू झंज्र रुपलालइगर से य्न फिये गये हैँ परसा से उन मद्दात्माओं की सत्ता नष्ट नहीं होती शर्थात्‌ ऐसा फोई सममे इन गहात्मापों ने जन्म ही नहीं प्रहग फिया फेयश रुपफ सात्र है। प्र ऊस में उन शवतारों के उपाणकों के क्षोभ फा फोई कारण नहीं सब! आराध्य आदिक के चरित में जो फई एफ झऊथयिद्ीन उपन्यास मा कर आरोप फिया जाया फरता, यह निर्दोष, साथफ, रूपफ सात्र, श्रौर उस अथतार शादि के चरित्र में कल्तडू स्पश हो यही हमारे दस रूपफयण का सहेश्य है। शय हम शागे श्रीकृष्णणीला-का यर्णन करेंगे शआ्रीकृष्ण-ली ला

आओीकृष्ण जो महाराज श्रीथिष्णु भगवान्‌ के झवतार कहे जाते हैं यसुदेव और देवकी श्रीकृष्ण जो के पिता, माता, श्रीराधिफा श्रीकृष्ण जी 5 आधाना शक्ति,-यन्दावन, सथुरा, द्वारक्षा और झुरुक्षेत्र, श्रीकृष्ण के लीलास्प कहे जाते हैं शसुरबविनाश के लिये श्रीकृष्णजी का एथिवी पर अचतार उद्देश्य भाना जाता है। श्री सदुभागवतपु० विष्णु पु० और अक्षम बैवत्ते पुराण में श्रीकृषय लीला वर्णित है।

चैदिफ आययों का परमदेव (९) सूख्ये देव छोर वेदोक्त प्रमाण से सूरे दूसरा नास सिष्णु (२) है कौर विष्ण सम्य का शखषिष्ठान्नी देवता (३) है। प्राषी:

प्य्येल्ञोग प्रकृत वेदोक्त देव भिल्नअन्य देघोपासक थे ऐसा कदापि सम्भव नहीं

गोलकस्य राशिचक में सम्ये देव का एक वे परिभ्रमण श्यापा चपलक्ष फरफे आय्पे जाति के मनोरज्ञन के रिये पूर्व समय में श्रीक्षप्ण सील फा अष्टूर आरोपित हुशा किन्तु क्रमशः पुराणों में इस लीला रूपी दक्ष की शा या प्रशाणा, पथ, होकर शा इस (लीलारूपी) णक्ष में विघगय फल -ही गये ( छुद्रती प्राकृर्त राशि लीला का से भुल कर श्रीकृष्ण महाराज जैसे शा द्श पुरुष था पुरुषोत्तम के चरित्र में फलटू लगा ) नहीं तो शघःपतन शील भारत भभिमे कुरणि की धारा बद्धती हुई झादु्श पुरुष श्री कृष्ण जी यो झतस स्पशे कलड्ूझूपी समुद्र में निमल्चित हो उदलना डूघना यपों पड़ता !!!

(३)-रपय युक्ू सबिटा देव (२४-७० ४७॥ १० प्वमू ह२२। १६॥ (३३-रायत्री

भूमिका ९१ सलकाज की विचित्र महिमा है! घनन्तकाल, अगादि देव को ग्रास करने के मिये सग्यत है। ऋनादि, देव जज भारत में कछुषित माय से पूणित ड्रीते 8ै। जदरागन होने से शोघ्म पूणा छणोष होगी। भारंत के थिप्र छुल सदा- शप साधवचित्त यह रूपक फकएपना करके भी ज्ञाण मनातन श्राप्यंतमाज के निकट दायी हैं। इस जातीय ऋण विभोचमाणये आज हम प्रीकृष्ण-शीला पे दृस्य भेद करने में कृत संकलूप हुए दें फाल्युन की अ्रमावास्पा की कायड्राल में एफ वार गोलफ ( झाकझाश की ओर ) सन्द्शन फरो तथ देखोगे कि शाह्यतन श्रीकृष्ण छीला गीलफ में अनश्वर अऋत्तरों में श्रट्टित दो रदी है | तुम लोग अपने मस्तक की ओर '(( भाकाण में ) तारक भय |धनुपराकृति जो नक्षत्र देखते हो उस का नास “पुनर्वंश” है। इस यमु नक्षत्र या वसुदेव की गोद में # यद्ध देवकी (विरा- जमान है। इस वश नक्षत्र के दृतीय पदान्त में जो दिन्दु देखते ही इस बिन्दु [का नाम कष्ट क्रान्ति' है यह बिन्दु उचचरायद की घरस मोसा पर ,बस्थित है इस बिन्दु के स्पणे करने पर सूटनेदेव की श्यन गति शेप होती है और इस पर नमे दप के “बालाक” का उदय ( जन्म ) होता है। यह ; बिन्दु बाल (नये साल का सूर्य) बाल कृष्ण के भन्म (उदय) स्थान है। क- / एपना नहीं समफी नव दुबबोदुलश्याम (१) तुम्दारे मामने जाज्यल्वमान दो रहा है श्रीकृष्ण रेखा में शियमणइल छायः तल (२) नेदशियाघुल में यात्रा कियी-हे | भम्मुय में कट सिंद कन्या तुला दश्चिक शौर घनू राधि। श्रीकृष्ण यमुना 3) अतिकण कर प्रपमतः अग्रसर हुए सम्मुख में कम्ट रागिस्थ तीन ता- रात्मक्त याग के झाकार का पृष्प नक्षत्र परियगाभिमुख विराशभान है! ओफष्ण पुष्प संक्रमण के पीछे क्रकेट राशणिरप द्वद सर्प कारिय (४) कालीय से का भस्वरू पट्सारकमप चक्राकृति और प्मको शाश्लेया नद्यत्र कद्दतेदं।

हि

4 से की अपधिष्ठाद। देदता 'फणोी! हूं

; श्रीकृष्ण ने आश्लेचा में पर रखकर काली सपे को दमन किया मम्मुरर | # पुनद्सू नठत्र सगे अर्धथष्टात्र' देबत्रा दवमात्प आदत उत्त८ व. 73 रू4स्थवा | कायपों बस्बदवरय अ०्द ७२७

अक्षय उन्‍्मम्सव्ट ॥४ अइितर्रेबका हू भा 3 श्ते इत्पि शो २ेबदा सन्‍ज से झिद्धा नछज एवं ४दन रंण्ट््च

बग्र नाम अर जा देंद) दॉजिगई

(१)९)5407 ४१६ झदत (रिक्त नाझद हुस्डशु गएदेके ८ू हाखंनसे गइने डच्रपाई ताक लय +ददरेप दर चर

।.. भो। प्टश्वैश नि देन है 5

! मच रिष्युस्पैरनि देनद अरइुश्च इनाम थे बरदें पे बयर्‌ स्मूदा 3$ इति स्गत (२) घड (09% - पली380% 07 एवं क्द,०१ ( रच १० +७+ # ४) ][९ 0८3 (०:४7)):६५5

"कर नकट

हे

१२ आय्येभदी पस्यू

में सिंद्द राशिस्य पन्नू तारकासय सघर चद्यत्र है भौर हम फी ख़धि देखता “मन हैं सुधरां सघा की ज्योतिः मय म्रमुत बाणय पा जीवन

रपा “शहि” पूतना नागय याह रीग का उत्पादक यही सघा (१) पूतन सघा की योगतारा (२) देवकी के (क्रयन रेसादुं) उपरिश्य कहने से ' फी साठ पद॒ में झभिपिक्त कर श्रीकृष्ण को स्तन्य देने सें व्याएल फियी है। सूख्ये देव के गधा सें अवस्थिति काल में मघा अआच्धादिल होत श्रीकृष्ण ने नया संहार कर पूतना फो विनाश फिया सासने सिंहरा पूथथे एवं उत्तर दोनों फए्गुनो वा शजुनी नपण्त्र (३) इस दो सछत्रों फो अं कर श्रीकृष्ण ने यगलाशन दृदा भशुन लीला दिखसशाया है। सम्म काना राशिस्य हस्ता थित्रा, तुला राशिश्य स्थाती, विशाखा, दृश्चिक रा अनुराधा, प्पेष्ठा,जौर धनु राणिस्थ मुउ, पूर्वापाढ़, और उत्तरापाढ़ ये नव हैं। ये ही। आधुनिक पीौराणिफ नव €भारी हैं (४) आद सखी और शाश्व पिशाणा या राधा ($) विशासा की आकृति पष्पगाला या तोरण फी

था कमग फीसी है। और विगासा को शणिष्ठात्री देखया 'शक्तारनी, या यु! है।इस खिद्युतारिस फा नाम यही 'र' (६) अरिसि का आधार कह क' शाणा 'राघा' नाम से विख्यात (9) है। शी कृष्ण, घन्द्रायलि, चित्रलेखा | ला (०) इन तीन सझियों के साथ सम्भाषण कर श्री राधा के घर में जाफर देख शयन रेखा फो (९) श्रीराधा ने ख़थिफार किया है। श्रीकृष्ण और श्रीराध मिदन हुआ यह श्री राधा फौन हैं? दृप राशिस्य स्य देव “वपभानु/ रा 'कप्यायती, चन्द्रिया उन की पत्तीहूं। कलावती छापने पति थष (राशिस्प भानु ( राजा ) से मिलने फी शाशा में उन्‍्मत्ता द्वोकर पूर्णाकृति शाप

(१ दिल्#्परो एड (३

मया वो पूतना कदने का अर भी कारण है मया दी आशति एल की सी हैक भौर ' में भ्दण ४४८ को साई मादुम पदता बश्ण गए को 4/यजिनी)) कएना सार्थक है। भ्ौर ४(घ्व बा दिनो सेना) पु पल चमू )) श्यमर, | श्स अगरोश प्रमाण से पाया जाता कि पूनना राख जिम के अर्य में स्ययदार वरने येगूव दे और गधा पूपना दोनों ही “ध्यज्रिनी) कदने से गधा पूतना दुतना कोे ध्राशष्ण मी के मापुसथान में विदयानें के अनेझ बारण दे जैसे सुर्तीय दिचसे गासो (वर्ष वा. गृह ६६ चूष्य राम मातुत 9) हटा अजब शदस | अ्रयूत्ण ली को पूतना के स्टस्थ देने का अर भी मारण कैबधा्श ( *८ऊ ) में यह पृठन' 6६ बाज रोग निकिलसाइान्‌ सब सराध्े पूर्ण धात्रा स्तम्दों बिशोषयो (३) छऋय १० 5४ ?३४॥ (५) आऋद् ु७) जित्र रण सीश शिएसए हब दिया उड़ देगी चग्पराला यवी और इन्दु सेसा ये ह। कह था विशारणय पुष्णपुछ् एम (६) ढमरुने 3 पारऊे कघ्येक शी में दनी (७/ई८बेशाप्से मारो पलशमर: (८) रे शत, जन वी पडा दी देखा बवान) अर स्वात। सूता राशि में अव/्बत्‌ दोगे से श्स गा * इज जज दै। भर इस ये पाच फट तुला शुक वर्ला दे (*) झवते घे यः रापय घोष

भूमिका .॥ छिये ज्येप्ठा नक्षत्राभिगुस यात्रा दाल में कमलाकृति घिशाया के बीच खि- द्यूस रूप राधा को प्राप्त हुई इस स्थान में राधा का पौराशिफ जन्‍म और सालन पालन शादि पाठफ स्मरण करें

श्रीकृष्ण का, तथा राशि में राधा नक्षत्र भोगकाल में आकाशाधि (स्य) अआन्तरिद्य अग्नि में ( विजली में) मिशन हुआ (१) शांस्य शाखोक्त प्रकृति रूप छा सिशन हुझा क्रमशः फात्तिप्ती पौशोभासोी झायी विद्यतमयी पद त्तिका फी शोभा में पौशेभासी प्री रौपमय' उ्योत्खा, घपित हुयी | फा- त्तेकी पौरंमामी फी कौमुदो ज्योत्स्ता में जयत्‌ भासित और छहासित होने गा। पशु, पक्षी आदि सथ जीवपण ओर जगत्‌ जन झहलाद से पुलफित ;ए | जगत जन इस विमुस्थ कर रशनी को नृत्य,गीत, द्वारा सुय से व्यत्तीत एने लगे यद्ध विचित्र नहीं। इसी जगत्‌ सय घृत्य,गीत, का नास 'रास- गीला ? (२) है। श्रीकृष्ठदेय श्री राधा और झाठ सखी मिल्त कर रासलीला में झान वृन्दुघन में प्रसत्त हुए। आश पौर्सासी कलायती झौर सातृुकर- एस (३) ( पटकृत्तिका ) अ्प्रनी कन्या राघा के शुमग्रह में उन्‍्मत्ता हुपी विभान पर पुरन्धीगण, आज शहद्वाउ करती हूँ प्रकृति फी इस अनुपस शोभा में संसार मुगध हो रहा है यह ' दन्दाथन ! फट्टां ? यह देखी ' गोलफ! में लाखोलास गोप १( ) गोपी अत ताशफ तारफा परिवेष्टित द्वो चाता, डेन्द्र, सथिता इत्पादि द्वादश आादित्य (५) रूप में श्रीदामनु, सुदामन, प्रभूति! द्वादश गोप मण्डल फे साथ श्रीसयदेख, श्रीकृष्ण! मास से शन्दावन में रामलीला में विराज- भान (६) दें यदि इस प्राकृतिक रामलीला भन्दर्शन से शाप फ्रे हृदय में शगस्भी विभल देश्यर छे प्रेम फा उदय द्वी फर सन, प्राण, पुहिकित दो आर बलुपित भोतिक प्रेसलाव यदि फिपो फे कदर छु्लस्फार तिमिशच्धन हुदय में प्रवेश फरता द्वो तथ हन ऋौर बा कईँगे, दां इतना तो अवरप कदेंगे कि भाइपी ! श्रीकृष्यभगधान्‌ में चाहे ईश्यरभाव से श्पनी रूथि अनुषार पूजा करो परर्तु ऐसे पुरुषोक्तन झादुर्श पुरुष के सघरिद्र में पापमय सीला चित्रित शाप को कालनट्टित करो झौर मारफी यनो !! ! इसने पुमयेसु नदत्र मे राधा नक्षप्र सक सशाादित्यदेया ( ररीफृष्ण ) का

ए0-रऋए सारण हा- झूनफि सता छरणा। एम्ब गतताउत्जण्वबा विरण बक ै॥६६। प-पालने (४)-ईशर से चत्र पल सूर्व के शाम + रात) हड़॥ सब

डे डिस्दात्‌$ भेग$ अययन्‌क भारस्र३ मिद्र॥ विधक 2७ बरएा) १३ पुर! अर 2२० इंरशा ६४ गदाभपत्र अप १३ ६६॥ स्पने चुगल 4 भय सनम खरद नये टयेदइ्ाद

१४ आप्यभटी घग्य - अनमरण फर रामलीला फा शोध फराया परन्त प्रभ से ली घोघ एुप्ा ऐै। पर्योफि यहदेध, गन्दगोपष, यणीदा दयी जीर इन के होने गे रामलीला का मारम्भ नहों शो भरता सरए आदिर्प देख की फ्रगति (९) नारी पोती, शुतर्रो भन्‍दरा आओरीकृष्ण को छे फर जाने फे छिये उपाय रहित (२) इस का घणदेय आदि फो भनन्‍दाणप से रामलीला में निमन्त्रण फर यहुत प्रम्पेटन से म्रपोजन नहीं यह देखो एफथार, राशिधफर में डृष्टि शाशकर देयो कर के पश्चात्‌ भाग में यूपदीधि में। (३) एपराणि में यणोदादेदी (४) दुबी ( 200) ॥57005 ) विशजती हैँ शपरारि दुव (५) देवराश सता नन्‍द्राश फहां? “योगस्पमित्र नहि तम्प हम ने क्रापतत नन्द राज फो दृपराणि में स्पापन फिया। वियार यथा स्थान में विष्णुपराण के परम अंश में यलदेंय की के थशित नहीं दे ! मधा स्पान में श्रीमदुभागयत के दृशमस्कन्ध में घबलदेय वी फा जन्मदृत्तान्त का विवरण प्रफाशित नहीं। ब्रह्मपिवर्त्त पु२ के जन्मसपड में संघर्षण देव (६) का जन्मणझत्तार किन्तु एफयार इसी के साथ दुध-जन्म वृत्तान्त स्मरण फर चसुद्देब पुत्र संघपेण रोदिणी गर्भधात कह ऋर 'रीहिऐेय हैं! थि लन्‍्दन ! था ' वसुदेवनन्दन ! नाम व्यों नहीं पाया ? दछृतीय बस घुध से सीम्प' नाम पाया किन्तु तारकानन्दन ! या सारणस् नहों पाया ? दोनों ही का जन्म उत्तान्त रूपफ मलक हैं। दस एं शायख में घुध की आविप्क्रिया घटना में पाते हैं कि, घुध “री।| चरण में रूपक विगए़ने के भय से इस का इतिदहास नहीं वि पकिम फारण से बच का रौहिशेय ' नाम पह़ा एज एक छणड्मावर्वे९ हर०१07॥ (२)-णशि चक्र में आदितय देव मेंत्र राशि से बूष आंदि दुआदश राशि एक बे में परिभ्रमण करते है कद राशि में ननल्दाजय मिथुन रा के पश्चिम में वृष राशि अवस्थित मुतण राशि चक पर्यटव करने से श्रोकृष्ण पृष्र राशि में * (३)--दष राशि के पूर्व और पश्चिम सीमान्त में स्थित दो मज़ऊ रेखा के मध्यत्त्ता' गत कहते + (४)-इव राशिस्थ पाटलवर्ण देवमातका पोडर मातुझा में देव सेना या पष्ठी नाम बदन मद्ठा चष्ठी पर्िडिता शिशुप्रलिफान्‌ + देवमाठुका ने श्रीकृष्णज्ञीजा में यशोद्या नाम बहने से यशमि धवचता (५)-श्येहमूले भवेस्न्द्रि: शतिकौर्मे १८ अध्याय” वा (६)-देकुप: सममे ग्भे कमो रच्छ दचौ। मिया रोहियी जझुरे माया तमा कृष्य रच तस्माद बभृद भगयान्‌ नाम्ना सघपण: प्रमु:]

(छ-तरझ गर्म सम्भूव एव चुवः स्वेयम्‌। हद्यवेव्पुष्प ०सण्दे६ १अ७ (८)-ध लिए पवन बदन 3, 3 प्रतदूषरच क्रनावशुय बसव्रे:ष्टी क्रमात्‌ स्मृता" गदा बर-द खड्गिण इटे

भूमिका १५

डस समय देखा जाता है जो, यलदेव का नाग रोहियेय है। जीर बुध

का भी सास रीहिएेप है गदप्यारी (९) पह रीदिएेय श्रीकृष्ण के चिरसड्ढी

हैं! गदापघारी शनन्‍प रौहिरेप अदित्यदेण फें चिस्सड्रो हैं। गदघारी अन्‍य

शसौद्तिणेष आदित्यदेव के चिर सट्डी हैं (२)। शादित्पदेव श्रीकृष्ण हुए, यलदेय

'को न्‍्यायानुसार बुध ग्रह फद्दा जावे घर का घर ही में मिला “गृह्॑॑चेन्म-

चचिन्देत किये पवतं म्रजेत्‌” इस समय हल रासलीला बेन में प्रदत्त हुए रास-पूर्णिमा

(7)मूपली मुपचा शरत्‌। (२)-ब६ प्रद शय गे ३० ऋूश दे बच में एटा है भहप्द दर दब, मद दिग्प. है में दिश रह हैं

९६

आपस्येभटीयस्प-

और एक चार राशि-चक्र पर दूृष्टिडालो तो देखोगे कि ९४ राशिए | *

रो ढ्‌ 2. | २७ नक्षत्रों में केवल पूर्यफरगुनी, उत्तरभश्गुनी, स्वाती, विशास के उत्तर

एक तारका और शअयण, चनिष्ठा ये दी छः नक्षत्र अयनमगइल के कप राग्रि नक्षत्र तारा. -आकृति अचिघ्तात्री झट्गरेणी संख्या देवता अश्िनी घोटकमुस अश्वि हं९5 मेत्र... भरणी इ््‌ त्रिकोण यम कताश्णा कूत्तिका दर अग्निशिया दहन ७40४ बूब.. रोदियी हा शायद कमवज पाएावैए$ मृगशिशा ड् विडाल पद शशि 0 मिदुन. झादों श्‌ पश्म शून्भूत कललहुशा0५ पुनईसु भनु आदिति (एवश्॑ण 0९ करंट. पुष्य बाय जीव डह्टीएए झप्नेतरा दर चर फणि प्रएक्‍58 मषा लाइन विवेगण या यम प्ण्ड्पोएक सिंद. पूर्वपान्यमी. सइग योनि द्रतपणह है हिए उत्तरपायुनी. सडस ऋअयमा फुलञाएणे५ श्णी( फया... दरग हरा श्निग्रात (007४05$ त्ति र्‌ मुउा स्यर्टू हु 8[00॥- शुत.. स्गाद बुमजमरर्ण पब्न औ.7०0॥06: विशागा र्घ॑ शव शाहप्रि है ५।)।म] ])९॥४: धा।ए 00* बृशयू झलाषा हि] सर मित्र >6370+% | जड़ा झम्मदता दा बूशइ१ शाह 0 | | श्गूत निष्टत वु,ह"व] ९: अत... दुरकाई शाथा लय 0, बतापिपाइट पर ) | विश 0 ह्रदह.. आहार शा #औगधी$ आजा डे मदईंस बसु ])0[7॥7४ डुबल्ज इबाडला #०5 हर बात है ६८०८३ 3 शारत अजरहण वक्त है णिएी' जि स्यचक इपा5 अद्दान हि [पवक्ता एॉ ]"57* अब कण हर म्ल्ज्व्‌ द्क [+ है ल्ल्क कनरट« नि शक « पक

- भशिका ध्ज

के फद्म्व के (१) निश्चटतर है। कुरुद्षेत्रपये में हम प्रथम यद्देंगे। द्वितीय दो कृष्पतीला की ललिता झीर श्रीराघा, दतीय दो के चय शर्ट में छोगा। यद देसो ! श्रीराधा का फिरीट, राशियक्र के एफ घमु २) शिरोभाग में उच्चासन पर बेठा ऐै। बाग भाग में लख्िता सखी, ख- न्य सखियों में चन्द्रावली (हस्ता) (३) राशिचक्र के दक्षिण में, चित्र लेखा पेच्चा भक्षत्र ) राशिचक्र के मध्य में | ललिता (स्थाती ) और प्रीराधा की घशाया फा ) (७) श्रवस्यिति स्थान पर कहा गया है ।रफक्षरेवी राशिचक्र मण्यमें प्रवस्थित है। सदेवी (३) घम्पक लता (६) राशधिचक्त के दद्दिण में स्थित तुप्टदेवी हैं तुझ्ू में ज्लीर इन्द्रलेखा (३)-राधि घक्र सें ख्पस्पित हैं भगहल के अपर धनु राशि के शिरो भाग में शप राशि में, गशोदा ) ( देवभाठका फृत्तिका ) (८) और बलदेय छी माता रोहिणी देदी के

|गय में दालायती कीमुदी चन्द्रिसा के ्यस्थित फा स्थान है

यह देखो |! दालायती आशियनी पूृणिमा, अश्दिनी नद्यत्न में लथस्पित : रास-दर्शन के उल्लास में द्रत येग से राशि चक्र में दीह रदहीहेँ श्रीकृष्ण ।ए क्रीरएय में परस्पर रासलोला निर्मित दिचार दो रए हे ' फलायदी शियती से भश्णी, फृक्तिका, रोहणी, मगशिरा, झादि एफ नष्न्न प्रतिक्रम रही और प्रम से लासाता यो निफटस्य होती जाती हैं, गामो नीण अगुयठन मुखकमल झआाच्दादन फरतोहं (९) पुनर्स नक्षत्र (११) विष्णु लारक दर्शन से फलावतो (१२) ने कलाजों को जाप्दादित कर लिया है (१३) ऋषशः शआओोराधा नक्षत्र में शावए जामाता फे दर्शन में ६६ छल शा

((-अुज कप अति. त्‌ नहर थे. प्रषयः मध्यवत्ती विद भुव से २४ झऋरा दूर एर बदम्द अ्रम्थिग हे। (बात शिल €बालर शति भम्कगयाये (३)-.शाएओं 0य70. (३)-ए१३ दे रब बरद्धबत शुढ्र दो है (२)-विशा'खा 4 तन पर सुराराशि में &ए एक एए शचकऊ रारि में और उत्तस4 कापकर बन रश्ट्रज है बत्र में एब अय ततत ददिण में) श्सगारण दुरचन कः स्यरहार ह। रामादख सराबारई् | विशारता के विराट वे १७ शदत ६। (५) भटुराधा का दुर'थ लारा भाव हे हित बरी बह का इठुटाण! बट 7 रब सम ई-न-ग्र ६एं -श-स| ?॥ रैब फर्क रुखय इकटमा (६)-२६४' बढ: ६१) कहुतर झूब जज मूच' ला बटर |) कोन ३७ ७६ ॥७५७०६६४- (६)-_ैघरर बहन हे वुरोकारा मश्ज टुइ देद से नाम पदा (मर्राबार हु बे धर हपबा'मइ हलयात्रायु हह३ कया हे |.

(१०)--च साइुगटश बम + दर परत्ऋ (११)- बध्टएक का 2. वजूद (१२) - इनअमु हान्द मे बस बह आंत बसु ध७ शुफाप ४» मे अर्थर्‌ दुरुब5ु मदर रे है। अमान भाई उप जिरफल्ल्न्‍इ बे फटव है | हुइ हाइवे सपारल रख शादी ऋग्क मं; ६२० वेग दी इनुष इयेतेब्लु इपेसेबटघ४क परदे (३४-4१ छि०६ु लाइट या गारोना

ड्ु 4

ध् आय्पंभटी यस्य- ब्छादून किये (१) और अनुराधा में उपनीय हो फलावती घशुर विमोचनार्थ उद्योय करये पर देखती हैं क्लि स्वछायस्थित अिबिकरत सर मे श्सुर के दर्शन से घड़े पुतकित हैं फल्ावती झद्वोषगुगिदत भार अबणा अतिक्रम कर चमिष्ठा आदि एक नक्षत्र को अतिक्रम शंख मुख वामल क्ष नील झबगुणठन रूस से सीचन करते चलमे (२) पा अन्त में शपराशि में उपसनीत दो कृत्तिका और रोहिणी के वागे में आकर अाश्वस्य भाव से शानन्द में सील शावगुष्ठन एफ सात्र क्विमी कर सादर ऊंचे आसन पर घेठ गधी। यों पात्तिकी पूर्षिना फी छः सौेंनासी का उदय ही कर ज्योत्त्वा सें जयत्‌ शाजोकसय हुआ। का की ज्योत्स्रा-शप्नल में झाइचा हो कर यश्ोदा देवी ( कृत्तिफा ) थिं नीलमणि की रप्सलीला देखगे लगीं कौर बलदेव को माता भी न्न्ठी रिउत सुख से रासलीला देसने रायों। फिन्‍्तु पौसेमासी कशायती श्य सुलभ शाक्ुगिठत भाव अवलम्वन से सम्पूर्ण जगतक्ते सामने एथियी के ए१ से घासर ( दिया ) घर में रासलीला देखने यो कामना से किनारे दी खुकरुक बारती हैं। पुनवौर जगत्‌ की जोर चाए दार श्रीराधा की सम्पई गदित हो उद्दा कर एंसली हैं। ऊपा कार में कौसुदी चन्द्सा वांखे नशा उभय पाश्लेस्प सैधाहिफ द्वव (३) थी ओर हष्टिपात दार अस्फट स्वर से कई हैं कि देसो देखो वह्ठिन ' हगारी राघा शाश स्थासी समागम से सखीकुतः ( लारामिय्य ) कहा छिप गयी ? दाभी तो कात्तिक की चस्द्रिमा के माई से नाचती उन्मत्ता प्रायः दो पर पयात्‌ वर्त्ती सेवाधिक सशिदानन्द गो कहतेदे कि याए ! शाज दसारा पया शर्त दिन है! शा-नन्दपुश्न आन श्रीकृष्णकी कृपा से हग्रारी राधा पविद्ना हुयी नन्‍्द्राज शह्दादसे गदगद में बाते हैँ कि श्रीमती शएद्व ' तुम्हारी सुता राधा ही आया (. गर्क्ति यद्द देखो ! श्रीकृष्प का रश्मि चूष्टा ( उड़ शुगर गयूस को ) तुम्दारे राधा पदुतत फो भाजेग शौर भौत फरला

देंपो 'फीमुदी चन्द्रमा थे उदय भाग में प्रजापति गहता शीरि शयहत ( ५) दिराशसान शे। शाज्ञ प्रश्नापति शच्या पूर्ण चत्द्ररुपी इंग

ऐीडकऋ किया छठ) - हक की शा हा बमन्ञ अर रदिणा। (2) -रार्पिंत शिशागामें बिता करने पर अर सलईद था विदत - मूल अधि वा झादि विरा द्दै॥ ७०). घह | छा ७8६ 00 प्रणपत छदा दे, सिद्धेद्श में प्रदपति गषत व)छीवि था इक भे कइ १६६ #ि३३ ४0]५४0६४६ ) “गत ददित एक में आप्रिव्याफ (8847 गण) ह४ ८7 ] हएइ ने दुई इदिए चए में वि ईंट > नहर (एप ॥.80,) बडा शि३ निच [:फरएप/

ननन्‍्द आसोीन हैं रासलीला देखने के आनन्द में ३३ फोटि दुवता के साथ चाधघर, ऋप्सरागणा, यक्ष, रक्ष, गल्‍्धद्दे, किलर, पिशाच, गुरझ्यक, शिहाधरणा, 3, दानथ, अशुर, झादि परिझत्त दोकर राममण्टल के ऊठ्ठें देश (९) में झासीन इसी उपलदप से प्रीराधा '्रजेश्वऐे', रामेस्यरी', बास से पुराणों में कही में हैं। क्लीर मए्रषि घालमीफि ने पिप्राण फो रुवेयंध फा कण नजत्र हू छर दरशंन किया हे। अर बहाल दे फवियों ने " रामी राजा, !” रापी किशोरों क्ञाम ने श्लीरादा पा साम लीतेंग फिया है झीर इसी पाय्ात्य ज्योतिषी जोर से प्लीराधा दाग सो राण्मकुए वाला लिखा 700०9) (२) है। आज राशिघफ थे फेन्द्र र्यान मे त्रीदृप्य (मूर्यदेय) प्लौर उन दछ्षिण भाग में यरदेग (दुघग्रद) धुघस्विग हैं क्लीर राशिघ में गोपी- शा (तारकाणण) क्लीराधा करीर सरियों के समसिव्याद्धर में चक्र नृत्प में प्च फर फृष्ण धरा फी प्रदर्धिका एरती (ब5दुय ने भी रमोन्मत्त हो एस नृत्य में साथ दिपा। रामेण्पर याएरेव घत्य-स्यूए पी चति परीक्षा फरते हैं गत्तिकी घणन्द्रिगा प्योरण्या घाए-झिल्वार पृर्देस़ गएगे स्तष पाताल आलिकून प्गेए भें एव रही एूँ। फािशी पीशेमानी के रीपरय उपोत्या गागर में वनों झुयप्‌ एए ऋले। श्यानन्द मय झखुपन्शु सागर मे जीय गात्र के हृदय नगग कौर शभिपिए टएुए शझण्यमीय ईदिग

हे भूमिका फ् र्र

प्पोत्मरा एस्मगेपिए्य ने अबन पद्धण किया घाएुली ( दात्तिशों ) डयोप्फा ने भुज्णता ऐो विस्तार फर प्रस्तपिदेययि झौए रापिगण ऐो ऋाणिप्रिन एर भ्यमु्ध फिया। इस भोमे दिमृग्प फण एगारे धापि

मे सं, भुतमप पर्दन्यापी परम पुरुष को एएसभाव के फानझ्रत राप भे शवदितृगाहष्षण सध्ययत्तों भारायण छा ऐी वर्णन किया ऐै। सौर रदितृमश्टल शी इस प्राइतिक शोभा दा (३) सूख फारणय £ै पशले भे समितगणणण थो शिप्णुगाप गे पृणा दिया करते थे। झीर भ्रीकृष्य छोटा फी शपक रघत दिपी (। शद्तिननदन झादिस्य देवमें शौर देवकी रग्दभ शोकृण्य भें भद्‌ पछ्ठो * एया धापियं६ ने मा नप्टों दर दिया है कि *्शदिफिएदद पैक्यभुपत्‌ ( एरिएंग ) (झाशिव ) और “दएृंपमाला देखको* ( द्रष्यपिदत्त क्रर्मरर६॥ ) पया इणणिश्य मे इशित नहों कर दिपएा है कि झछा- (दुत्परेंद ही देवदोगनन्‍दन दे

(॥१- !3 $ ६६०४ ७६ ८२: रह दए छ; शक गजद इस एमए गए रह | (३3)७७ ०७ >२ ३२ जि ३5२५ ("फ्छापरी) (६५ "६ (९ एट चडुम्श्र मे ६ण१-5 ऐजे > सटे

गा आओ

आपग्यभटा पम्ा- सतो४खिल जगतपदयथोधायाघ्युत भानुना देधकी पूथ्ये सन्‍्ध्याया भाविभूत॑ गदात्मसा 2 शिया २४७

इतना भ्ान्त क्यों ? कया बेदाड्व भूत ज्यीतिषशास्त्र यद्व नहीं कहता कि यशोदा (कृत्तिका|का) की अधिष्ठात्री देवता दस (अगर) शौर रोहि का|फसशण (ब्रह्मा) अ्पत्तनि एवं प्रत्मा एक दी हूँ। इन बच्ला के नाभि पद्म ( राशि] के केन्द्र में)) थिष्णु या आदित्य देय अवस्थित हूं। पद हैँ! रोहिणी के]शिरोभाग,में प्रमापति[ब्रह्मा हैं। यह ब्रह्मा द्वी नन्‍दरात हैं

रासठलीला--वखहरण

राशि[चक्र मे परिधय रहने पर रासलीला समर में झासकता है फिर ०“ बस्तदरण ( लीला ) समफने के लिये गोएफ शान म्योजनीय |] एथियीस्य' उ्पोतिपी गयाने एथियी के सेर दुष्ट (४४५) उत्तर में प्रहार कर गोलक|में जो विनदु,प्राप्त होते हैं,|उप फा नाम 'धुवविन्दुरेसा' सम है जौर एथियी सेटूट्रश्य,गोलक, वि-पु-पत््‌ मगइल द्वारा द्विधा किया है

राशि चक्र के,केन्द्रस्प)ज्योतियिंद () राशि चक्र के मेरु दयढ को (४ उत्तर में प्रसारित, कर [गोलफ;'में जो बिन्दु प्राप्त द्ोता उस का गा कद॒म्थ रक्‍्सा है। और दस केन्द्र से दृश्य गोलक अयभसगउल द्वारा हि एकया है मान लो कि (कदम्म ! पर सूर्य को रखने से अयनमणईत ] दुषिण भगस्य दूश्यगोलकाडु अन्धक्तारसय होगा

इस समभ वस्ब॒हरण देखो ! असीस गोलक के बोच शादित्य देव शर् स्थित, है। आदित्य देव का क्षेम्द्र (०००7९) और गोलक फा केन्द्र एया दी हैऐप बाहने में दोष नहीं। प्राद्त्यमण्ठल को वेष्टन कर राशि चक्र प्वस्थित है; ॥| ससुर राशि चक्र का नास 'सूदर्शनचक्र है (इससे सास की भी सार्थकता दीती है यद देखो। सबित्‌ृ सणढ॒ण के बीच नारायण श्रीकृष्ण एस केन्द्र में अधरिय कर ससूसे राशि चक्र को झुलाल-चक्र की नाई घूमाते हैं।श्रीक्षप्ण इस छुला! अदा का शक्तिसय[मेथि का हैं। सूर्यभए्छल--कुलाल चक्र के हृडुकाछ्ठ का राशि चक्र छुलाल चक्र का ये्‌्न काछ ( वेलन फाठ ) है यही झछुलाल रासलीला का आदर्श (९) है। न्‍

गोपीगणा (२७ चक्षत्र भय) राशिष्क्र में अवस्थित रहकर सूये किश्णकूपी बच्य में आयत्त दी जगत के चक्षु पर रह कर लोकों के शद्गृश्यभाव

(१) कुतादचक प्रतिम मश्डव पहुक़जाझइ कसम इति उत्कलकलिका

३४९

भरमिफा श्र्‌ प्-भीत में प्रमश् हैं। कुणाल चक्र की भाई रामुये राशिचक्र घमता है गत सर्य फेन्द्र को त्पाग नहीं झरते हट्टुकाए की भांति केयल घृमसे हैं पीगण चक्र नत्य में शादित्यदेव श्रीकृष्ण फी प्रदृक्षिएा फरती दें पा श्प सनोहर व्यापार है! विराट पुरुष पवा घिराट व्यापार ! विराट पुरुष के नाभि स्प में सूप हैं। फ़िन्तु आदित्य देव पस्पेन्त के चशवर्त्ती हैं। सृतीयष दिन आदित्य देय की प्रोराधा नद्दात्र त्याग आनुराधा नक्षत्र भें पदुएयंण करना पड़ेगा | किम फा साध्य है फि एस पस को तोष्ट सफ़े? पृथप गोपीगण रण में उम्मता हैं।शनुरोध ती सुनेंगी हैं; राप में याघा हप्टेंगी नहीं ।ठधर श्रीकृष्ण ने ऊझपना साया-आअपत सिस्तार पा। विशट के नाभि देशस्पित सूर्य कदम्य पर स्थापिस छुए कौर झ्पन एल छेद छिएसप गोलफाहई सनिशासय झुज्ला गोपी फा-क्विरए यरद्ध शपइत दो नागपा ) हुआ ? जगज्जन, चन्द्रावली, चन्द्रणोणा, तुद्वदेदी- चम्पफजता, दैयी, भरी इन्दुरण्ा प्रभूति तारा-घरियों के देख पाया। लज्जा से राीगरा समुद्र (९) में निमज्तित हुयों फिल्तु पदु-प्रयाम रूप िपा नही '! इम रुपए में शय प्रीवृष्या ददुम्य फदुम्यपण, तारागए गोपी, रुपकिरण ता, मोल अन्तरिष्ठ, कालहिम्दी-अछ, सद्धपिगएरचित इस सुणासय रूपया क्ष भे जो विपभाय फ्न धारण फिया है, इस छो देख फर महपिंगण शात्ग- भानि से दुगूघ प्रापः दो गये रासलीला भऊ्डू छुपी प्रीकृष्ण श्रश (प्यन- गष्टल) में चले | राम्मुख में शमुराधा नणत्रह | भाग्त शायेकुल! जो ब्योतिष- द्द मुम्दारे भयन में, स्पप्न में, उत्सव सें, व्यसन में, भोफ में, सुए में, समाज , घिश्षन में, पाप में, पुय॒प में, राष्ट्राय होटा था, जाश छुम लोग छमी ज्यो- रेपशारप को भूल पर श्रीशधाकृष्ण पे श्ाक्लीन रासछीला के जस्तित्त्य में दश्वाम परते दो !! कट्टर श्रीकृष्पा ! फट्टां राधा ! एथियी से करोष्ठों घोकम पं श्धिक दूरो पर गधे, उस से लक्ष शुप्र योजन झन्तर पर राशिचकऋर दे प्तत्र श्रीराधा झादि अवस्थित, दुर्देशार्मे पष्टले से इसमा सोह पैदा होसाहे दि ज्ञात आदित्यदेध ओोफृष्या का राशियक्र ही “शुद्झंनचक्र है चद्टी के उप चक्र के दिरण जाल में शाच्ट हो झाप्पंशाति, पुरकश्यिल स्‍क्‍्क्‍ापसिक एस्लोला को देखनेर्म अध्षण ऐोरदीडदे। रुपक रचादे ऋमुरोध रो, च्रीकृप्ण को रापलीला धन में पुराणफार गद्टपियों ने कौहुफ चअथचा से वत्तद में काहि-

(१)अ्क्षता नाभ हे छंद +०।६८। ६----

श्र ग्राय्यभदी यरय- घय दो शायताण जभ्दों का भी क्‍प्रयोग किया है £ शारप के पाठ झीर ब्योतिषणाा के अदुभीणन में * चर्यव्ध्चण ( (॥0०७४४(99 ) मे. भारतीय श्पर्पजा प्रणीस पुरागरभ इस गयय दी शाप याएे शब्दों के पे अर्थ ही गपी, ऋरर मदपिंगण पृणित आदित्य देख अक्ृतदुय क्रीह्धरि फो भूल पर आय्येशाति शन्पे की को भूख कर एचर उचर भदवासी फिरसी है पा कै ! कया भयायद््‌ विल्लाठ भारत में उपग्यित हुआ कौन पमिएत थेद फा क्षय पर छफता ? भीणफम्य छोड़ दर, कौस सुशिद्चिल शुधीतान पुराण ऐी शख्स प्रसाद में पमफ़र शारत भाता के जदय के कगरि भक्ति स्पापन करने शे परापुमुस द्ोफर, भीतिफ छः कोई सी नथह्लीप भें भानद-पैप्यर स्थापन में भरि हैं! ऋामेगण ' एफबार आपर्य छोड दर नरात्र, परीक्षा करो तो वेदोक् फ्रीकृष्णा (ओी दिष्णु) के घरिः कर मण्योगे सेद-दारा शो फर शाय्वेशारति फी निई घत भसस्वक सें, देश में, शिदेश में, गगर सगर में, में, घाट पर, श्रीकृष्णरी फणपट्टू रटना शोर व्यप्ली बसी खेद से छूम लोगों ने श्ाश पुराण के झपक डाला है। नहीं तो ऐसी ननोसत क्पूर्व भरीचिजा की प्रधृत्ति द्वो सकती फब इस के आग शिद्दान्त के विपय सह्िप्त विचार फिया जाधंगा और अन्यथा शोक्त उपास्यानों का खणेन-रिह्वान्त शिरोजशि के लिए जावेगा

भूमिका

सिद्दान्तज्योतिपग्रन्प भारतयामियों | ज्ञाप दंद्‌ और घमंशासर शध्ययनल फरत छू, पराच जय द्वीए धरमंशाक्त शाध्पयगाघे तैयार हैं; परन्तु आप जानतेएँ ! भमह फ्पा लिएहि- “हे विद्ये चंद्वित्य इति एस्म मद्न्नझ्ल विदोवदन्ति पराचया पराच / तलब्रापरा ऋग्धेदो चजुर्थेदर सामपेदोःपदबेदः शिक्षाइस्पो व्याकरण निएक्त छन्‍्दों व्पोतिषिति” मुप्ठफठ? ११९१४ अर्थास्‌-यिद्या दो प्रदार फी है, एक परा दुमरो झपरा। इन में क्रा्वेद यजुवेद, पागधेद, प्रपदेद, भिछा, कएप, व्याकरए, निरूत्त एवं ज्योतिष अपरा विद्या है। और छ्िस थिद्या शे अक्षर अज्म फा छान दो उसे परा दिद्या छह ते। में से शिक्षा आदि येदरुपी पुरप ये छः शपर स्यक्वप दे जैसा कि कष्ठा ऐड “शब्द शा मुझ ज्योतिषं घछुपी, श्रोश्नमुर् शिखक्तपु फ्पः फ्री सा तु शिक्षारस्प येद्रप सा भागिदा, पादुपदमद्वयं छन्द शआईपः० ॥१४॥ अपोत्-धेदुरुपी एप ध्याररण तो मुख, उ्योतिष नेश्न, भिष्या मासिक, एप दोनों एप और दन्‍्दः (घाए्य) पर पया घिना नेग्न के थेद पुरुष थी ए्रभ्षे रबखेंगे एपं थाप भी नेद्र पैन पंद पे ज्योतिष सम्पम्धि गढ़ गस्‍्गे है झूटपटाहू शण्लीए ऊध पर शाप पता प्रायीग भौरण नए फरेंगे ? छपोतिप शारद फएने ऐे-यद सन समझ ली जिध कि दोषण फलित थे ग्रन्पों ही को उ्योतिष क्ठ ते किन्तु एंद्धिता, ज्ञाशर शादि दीर गिद्ठान्त गिण फए एपोतिप फट्टाता ै। गद्ट यात इस नद्ठी पद्दधते फिनत फऊगतल्‌ दिश्यात घ॑३ दापदेष थाररो की फो फत्त॒ता दृगारे शु८शि/ की भगिकामें एढ लीजिये | कौर शद्दामट्रीपाध्याय प॑० शुदादर द्विवेदी की फपने * शराश त्तरशिरी 2 मामझ प्रम्ष में शिप में सिहान्त प्पोतिपिपों का हतिदान शिए। ?ै। खिपते हे शि- आधुनिका ज्योतिर्धिदः फलमात्रक

व्याकरण शाक्र भष्ठात्यव्ष लघुणराशरीवालशेधपीप्रदोधमुशूत्तदिस्ता- भतितोंलकएटीदइक्टातकफमिनिमुदाटामेफ्देशेन रक्षा झात्गाने दत्त दृष्यं- प्रोतिषशाक्तपारहूुटपस्पम्से (दघ साएपिसी सकराम्द्रादिर दिल घारर्दहमारेस शिष्पाद्रुपपत्ति दिभैदाशधारारएी घरसुतः शुट्टा दा शेति छेलवद्धरिद तिदिपर्ज विर्चम्था गहत्मप्रशि्टि क्टन्तिर दएटश्नरड्िटपाम एप भ््र्ह

अधोत-झाजश इक प्रापः कोण, घोह से दोटे रुलित ज्योतिद छे पन्‍द सीश शोष, भात्तिबिग्ताशि झादि घट घर झाऐ दो ज्योतिएि गान सदेटते अर

श््ठ आद्यंभटी यस्‍्य-

सिथिपन्र बना कर अपनी प्रसिद्धि करते हैं और वास्तविक ज्योति सिद्ठान्त संद्धिता के ग्रन्थ नहीं पढ़से इत्यादि | कतिपय ग्रन्थों में ज्योति शस्त्र के पांच भेद लिखें हैं जैमा कि- पस्‍श्लस्फल्धमिदंशास्त्रं हो रागशितसंहिता” क्षेरलिशकुनसय प्रवदुन्तिमनी पिणः प्रश्नषरतनटीकाकारः ! अधोत-ज्योतिषशास्त्र पांच प्रकार का है, द्वोरा, गगित,; संहिए केरलि एवं शझ्रुत। इसी प्रकार पूर्योक्त म० स० पं० सुधाकर णी ने 5 भ्न्‍य के आरम्भ में लिखा है कि-“अस्ति सिद्दान्तहीराख्॑ंहिताकूपं रक्षत्प यात्मकसष्टादशमहविप्रणीत ज्योतिःशार्त॑ वेदेचक्षुरूपं परम्परातः मसिहः अष्टादूशमहपेयश्च ज्योतिःशास्त्र प्रतिपादुका ये तेपा नामानि म्रकाशितानि! शत्र पुलस्त्य पौलिशयोसदेन पराशरेण ज्योतिःशाखमवत्तेका एश्ोर्ता शर्ति संख्याक्ा आचार्य्पा सभिहिताः कैचनाप्टाद्शाचाय्पानुरो धन पुलरप समुविशेषशपरइति बदल्ति चारदेन तु सूये हित्वा सप्तद्शाचायां एव प्वितायां प्रकाशिताः तन्नापि ब्रह्माचार्यों वसिष्ठोउपज्िरिट्यादी ब्रह्मसूर्पी वा छो४ब्रिरित्यनेपाठ घद॒न्ति हर शधादों एते संहिताकारा महात्मनो लगधस्य झुव्वेन्ति चधोगु। * भद्दात्मना बेदाजूुमयूलझूप उपीतिषं पश्चवपेयुगवरणन पर विसक्षर्ंं चक्र! सूर्यण/ भयारुणकृते श्रक्षणा नारदाय व्यासेन स्वशिष्याभ चसिए शायदव्यवासदेसाभ्यां पाराशरेण मैत्रेयाय पुलस्त्याथायों गर्माबत्रिभिश्ववख्र भिष्येम्पी उपीतिःशा(त्र विशेषाः प्रतिषादिताः तथायाह पराशरः “जनारदाय यथा ब्रक्षा, शौनफाय सुधाकरः सायष्टव्यथागदेयाम्यामू, वसिछ्ठोयटपुरातमम्‌ भारामणो यशिष्ठाय, रामेशायापिच्रोक्तयानू व्याशःशिष्याय सूर्योशपि, समारुणकृतेस्कुटमू चुलस्टयाचास्पेगयोत्रि, रीगफादिभिरोरितम्‌ वियस्वता सट्टर्पीं दाम, स्वममेय युगेयुगे मश्रेषाय भयाध्युक्तम्‌, शुक्ममध्यात्मसंत्तकम्‌ आरदमसाद्य सर्देथद्मू, लीफेपघाति दुल्लेभग्‌ >अफ्ाग से लश लत लवफिलस्या बज्फकसम्ल कंप्रेशा एप बवओ ४वपराशरद बाज्ययोनारकेगग्सी मरीजिमन्रत्िरा #

अमर चिप 26 अपनों गानों मृत | शेनद्ोष्शश्गारयेरे जदोविःशास्यश्रवक्तकाः

अप कप 3 दशक >ना िपणुशूनरदों धाम इस दस वे परत, होनसावदन, गू्‌बं रष्यवन: कर्योरों मंगुः॥ है 2लकिल [कहर बे हिस रोज पाई त- + सपू। पर विक्न देव स्वदत-यवत का )3व

बी

हा भूमिका श्प्‌ अधैतेषासाधार्याणं एसयादिनिरूपणं तत्तद्रचितसिद्दान्तानामलामेतीय ठेन्यभ्नतो स्माभिस्तावउज्यो तिपसिद्दान्तग्रन्थका रपुरुषका णासुत्तरोत्तर ख- प्रतिखण्डनट्वारेश बहुविशेषरयितृरां यावच्छल्यं तक्तद्प्रन्धधर्गस्पलानां गवलोीकनेन ससयादिर् निरुप्यते ' उपरोक्त संस्कृत का आाशय-नीचे खिखे सिद्दान्तज्योतिप के ग्रन्थों के तो पाये जाते हैँ पर ये ग्रन्थ नहीं मिलते शझतएब ये ग्रन्थ फम घने का पता लगाना कठिन है

सिद्दान्त ज्योतिष ग्रन्थों के नाम

ग्रन्थ सास ग्रन्य नाम ग्रन्थ नाम | ग्रन्थ सास है अप्यर्तिदानं।... मनुभिद्धान्त ११ पुलस्तरिदृधानत। १६ च्यवनसिद्धान्त भरीचिसिद्धान्4 अभ्रह्टिरसिद्धान्त। १२ दर्सिएसिदधान्त। १७ गग्गेसिद्धान्त। नारदसिद्धान्त। इषस्परतिसिदधान्द। १३ परारारसिद्धान्त। १८ पुलिससिद्धान्त कश्यपसिद्धात। अतिसिदधान्त १४ ब्याससिदधान्त १६ लोमशसिट्पान्त सूस्यंस्दात्त। १० सोमसिरपान्त १६. भूयुसिदृशन्त २०. यवनसिदुयान्त

ज्योति आधुनिक पीरुप ग्रन्थ

ग्रल्ध नास ग्रन्य कत्तो ग्रल्थनिमो एक्षाल स्थान

आय्यभदीय पर० झायंभर ४२३ शाके पड़ना

प्रच्सिट्धान्तिवा प० बराइमिदिर डरे. 99 वालपी

अष्टासफुटमिदधान्त प० अद्युप् ४२० 39 भौलमाल (दरिणिपश्चिमोत्तर)

द्वितायझ्रार्य सद॒धान्त हृवित,यभायंमद ड७४ 33

सिद्धान्त शिरमाय प० भास्वराचार्य्य १०७२ 33 दौलताबाद

मसिदुधान्तमार्वभं.म पं० मुर्नौश्वर १५२५ + एल चपुर

तनूवबिवक पर० कमडाकर भट्ट २५८० 33 बिडर्भ

र्यभदीय ञ् 0

चएलदध परीसय ज्योगतिय यन्परें में सब से घुराना-” शारयमटीय ?” है एयंभट चागक्ष ष्योतिपी ने श्यायोडन्द फे १२० झोकोों में इस ग्रल्थ को शादे २३ में-स्थान छुस॒म पुर ( थिद्दार प्रात के फन्‍्तगंत पाटलिपुत्र या पढना ) ! बनाया शौर दस ग्रन्थ फा सलाम “झायंभटीय” रक्‍्सया | लोग इसे “आाये- पहानत/” “लपु आयेसिद्धान्त” या “प्रधनार्य-सिट्ठान्त* भी कहते हैं। झाये- (ट स्वयं ऋपने जन्मसयान एवं ग्रन्थ निर्मो्षकाल फे दिपयमें यो (तिएते हैँ दि:--- ही ७३ श्र 'शशिदुधभूगुरयिकुश्युरकी रभगशाष्मरकृत्य आर्यंभटसिल्यिए्ट नियद्ति झुसुम पुरेम्यबितं ज्षानमू।श/सा८भव्यी०२९झो० भा२-ए्चियी, चन्द्रमा, युध, शुक्र झादि अधिप्ठित परप्रहझ्म फो नग- ष्ट

स्फार कर अआयेभट इस 'छुछुस युर! (पटना) के लोगों से संगाहत शाए। ग्रम्ध फो कहते हैं ९॥ घुन;--

“पष्टयब्दानां यघ्टियंदा व्यतीताखयथ युगणादार

उपधिफा विंशतिरव्दास्तदेह सन ऊन्मनोउतीलाः ता झा०्मथ्गीप्हहोत

भाश-इतत चत्तेमान रद्व थी चौयुगों के घहुर्थ भाग में से तीसरे भा ६० थे बीतने पर मेरा ( शायंभट का ) जरस हुआ झौर मेरे जन्म से जब तक २३ वर्ष बीत गयीं। वत्तेमान महायय के घटुघ्पाद के ३६४ यर्ष दीतने पर गेरी उग्र र३ दी हुई इसी समय में ने इस ग्रत रचा १० पुनः शार्यभट ने यह भी लिखा है कि में ने यह ग्रग्प प्र चैदिफ ज्योतिष के डारभार छी बचाया ऐ-पइसे नथीन रचना समम कर शझुस घी गिम्दा फरेंम-

“४ सदुरुउत्ताग समुद्रात्‌ समुद्धृत देवताममादेन

शक्शागोत्तमरढं सया सिसये स्थभात गाया ॥” शाध्माक्ष्यी८४एी२४९

भा४-ज्यी दिपशासप री सशुद्र मे ऋपनी दु्ठिरूपी गौका पर सुयाएं भमुद् में निमम्र पीपर क्या (अच्याज्त येदाड् ज्योतिष) छी फृपा से एद रूप रण को में ने (घार्यभट ने) याएर छिया शर्पाद प्रहा शित किया।४शर्ए

आधा यं सास्ना पूथे स्यायस्शुय गदा सद्यत्‌

शुफ्तायपोः प्रणाणं छफते प्रति एटा घोरम्य झाव्मन्गीश्षप्रोव३र

भा5ः-यादि फारा में क्षण एाहिप जार हो रेदु से निकाण पर में-प्रथार किया गया उसी प्यो।रच्करारा यो शयशगांध धादुफ पपोतिष्गाएं मे भे ( अपेभट के ) “शाप्भटीय” दाग से प्रफामित 'या। इस शा की बाई प्थक्ति सिश्या दोष दिरिताफर शुश पता लिरस्फार फरेगाटर्दी करू पएुच्प कई घाटा एफ कदाय था मा ्ागा प८

4

डुस “शायभटाय मे दो शगुण्य धाग £ ऋीर १८४ झार्या णन्द यो छोर

इअनएए कोई इस का /घायाोटश/ल८ भी दए३ॉ, इन दो भागों दी कोई डे बए बुआ दूत .परय साथ ४-जगा वफ़-दरम छा दीकाफारों ि पं्रपदकक दापणाएं धनदस भार छा दो प्रधाप गानक्र प्रत्येक की ता

हि च्प्वा: है< है जी, , हे $ (५. इ्किपघम्टेकाफिप्य दिएा 0. झच्याप धकूभ धेरागों सइग दो भा $& ७७ दम्य शाला इव परम गन्प खतव ;; घातम होता है रहिए! कट 2. दूँ बतश चु4 ऋ:०७ ४५७ डबरा | 7 शाश्द $६ एफका दश दिधाहा * हुह का हु €प कह भह उइ हक बम लिये दाना हो मिलाऋए १२ इदूथ आल ओह कक ६१$० ३२ कट # 5 इघ्स भगत काकाई दघक आर

जल

भगिका # २७

नहीं रक्‍्झा है लोर उप के अन्त में उपसंदार हो किया है, एकत्र पूरे दोनों भागों का ) ग्रन्य के फनन्‍्त में ही उप्रसंद्वार किया है ज्ञौर “पाये- टीप” ऐसा नाम रक्‍सा है। इमीप्रकार ग्रन्थक्षार ने ग्रन्थ भर में चार द्‌ रक्से हैं पाद का झ्े चौथा भाग हैं कलर चतुथे भाग फिमी पूरे १६ शो की वस्त में द्वोता है-अतएव प्रथम पाद के पूर्व दो श्लीक, प्रथम पाद ३० श्णो०, द्वितीय में ६३ श्लो०, ठृतीय पाद्‌ में २३ छीर चतुर्थ भें ३२, यों सब प्रल कर १२२ श्लोफ हैं परन्तु “आायोप्रशत” इम लेख को देंस कर यहुतसे रोपियन विद्वानों ने ध्रप्त से इम प्रन्थ में ८०० श्वोकी का होना भाना जो श्रीसानू डाक्टर फरण मादय फैे-सन्‌ ९८५४ 2 के छप याये संस्कृत टी का- द्वित श्रायभटीप के देखने से पाद्मात्य धिद्वानों का ५२० प्ञार्मो घ्लो० होने श्रम दूर हुआ | भायेमिहान्त नाम से एफ दूसरए भो ज्योतिष ग्रन्घ- मिद्दु टै>ठध पर थिचार किया जाता है द्वितीय आय्यसिट्वान्त द्वितीय आरयभट शाफ्त ८१४ में हुए प्रघम श्रायभट के सतिरिक्त यह एक द्वितोष “जआपंभट” सर्यान हुए, जतएप इन्हे "द्वितीपप्रामंभट* घीर इन के प्रत्प को द्वितीपयायांसद्वान्त “४ बदते हैं। पूना फे “४ दक्षिण- पधणिज्ञ * भें " हिलीय भायनिद्वान्त दी एक प्रति हैं जिम पर 7 लघुयायें- फिहान्त लिखा है, परन्तु स्वय प्रत्थकार ने शपने प्नन्‍्य भें ग्रन्ध फा नाम “लघु” था “एएत“ छुष्द भी नहीं लिखा है। हस पन्‍य के पढहिली " श्ायों ( धन्द ) ने लिखा हैं कि-- " विधि शश्यागम पाटी झुट्टक दोजशादि टष्टशास्त्रेण शाय्रभटेन फ्रियते रिह्ठान्ती रूचिर झायोतिः * भाः-हन ने झपने प्रम्ध छो "सिद्दान्त* ऐसा लिरा ु£ू इन के पृष्र छे * छायभट से पए नवीन एँ, (जो झागे लिटु होगा ) इमजिये इन की *ट्वितीय झापंभट* छोर इन के मिट्ठान्त को "ट्वितोय झाएंनिटान्र बहने टू इन ने झापता पनष निर्माण शा जलब्मदाल के एप से ब्ष्ट नी लरग (दिल्‍्तु " पराशरशिहवास्त * सन्‍ध ८ःा सध्यम शान दिया £ इससे इन से दोनों सास्त प्न्‍णो था उर्ोस दिशा ऐ। बएडाब्‌ पछिडाण्च इरथरा पएचाते दत्त हसन आारूमू* २० एध्टार 2 कु हु छै छतुदार दलिएुग के घाए् पी रुशए दीठने पर ये दस िदान्त ; र४ चंथे ऐसा (इसका का-इन शा सटपय है

श्८ आप्यमटी यम्प- परन्तु प्रक्मगुप्त के शनन्तर यह प्रन्प रचा गया ऐमा स्पष्ट प्रतीत होता इस फा फारण गद है कि यह अपने सिद्दान्त को फलतियुग फे श्रम ही यन्ना थताते ऐएैँ, इस से अपने ग्रन्थ फो पौरूप ग्रन्यकारों में गए करते हैं। ब्रह्म गुप्त के पद्धिलि इन के प्रस्योश्धिगित यर्पमान या नया सानों का घष्तुतः कीं. मचार दोने या कोई प्रभागा नददीं मिलता ब्छ्ल गुप्त ने अपने ग्रन्थ में ज्ायभट-फे टूपयों फो सम्र से चद्दिले दियत है। इस से धक्मगुप्त के पढिले प्रघम-आयंभट हुए यह भिद्ठ दोता द्वितीय आमंभट के मिद्दान्त के फिसी थिषय का वएलेस ब्रह्मगुप्त ने पिया, यदि द्वितीय-शायेभटश्रन्य ठत समय या उससे पद्धिश बना दर लो शवश्य इस फा भी उल्लेस प्रह्मगुप्त फरते पधशुसतिद्ठान्तिका ( शाके ४२१ का बना है) में जय गति फा उए तेस झुछ भी नहीं दीखता। र्पा आयंभट, ब्रक्मगुप्त, लट्, इन के ग्रन्थों में झयनगति फा यणंन नहीं है। शूस द्वितीय आयेसिद्दान्त में इसकायणंन है। झधिफ क्या कहा जावें-प्रधम ञ्ना' के जो दूपण अज्मगुप्त ने दिसलाये हैं, उस के उद्दार का गत, द्विः शायेभट ने किया थै। इन के ग्रन्थ में युगपद्डति (सत, न्नेता, द्वापए, के है, करप का आरम्भ रखिवार को साना है, भौर पहिला शा? में युग के आरम्भ में सथ्यमग्रद एकन्न रहते, स्पष्टप्द्ध एकत्र नहीं रहते. लिखा है। इसका सणष्टनब्र्लगुप्त ने क्विया है (झ० २। आयों द्वितीय आायंभट के प्रमाण से सृष्टि के आरम्भ में स्पष्ट ग्रह एकत्र होते हैं सथ प्रभाणों से प्रह्मगुण्त के अनन्तर शर्पात्‌ श्ाक्े ४८० के झनन्तर ररे आा० यह ठप्त समय या प्राचीन सिद्धान्त माना जाता और झर्वाचीन सिद्ठास्त से पहिले आयेकुशभूषण पं? भास्करा चाये ने रचा। सिद्धान्त शिरोर्मा स्पष्टाधिक्वार के ६३ वें छोफ में लिखा है क्षि आर्यभटादिभिः सूदम' दुक्कोफोद्याम पढछिताः दृक्कीण अपात्‌ राशि का तीसरा शंश ( ९० शः मय झआर्यभट से लघ्नमान को सीस अंश में किया है। दृश आंश नहीं परन्तु द्वितीय शा? भर ने झ० आयो ३८-४० में ट्रफोशोद्य (्‌ः शान ) पाद्दा है।इस प्रमाण से दूकोणीद्य साम्प्रत द्वितीय शार्यभट की अन्य किसी ग्रन्थ में नहीं लिखा है। इस के शनुसार भास्फराचार्य के यावयामुनार आा० भर पद्धिला नहीं, किन्तु द्वितीय ज्ञा० सि० दी सिद्ठु दयौत किस के छजुगार शाके १९०७२ के पूर्व द्वितोय आयंभट थे, ऐसा निश्चय 5 &। द्वितीय क्रा० भश मे अपनांश निकालने की रीति दियी है, इस के'

भूमिका श्ल

सार अयनगति एफसी नहीं रहती वरण उस में बहुत न्‍्यूनाधिका होता है। परन्तु शयपन गति सर्वदा एकसी रहती-ऐसा मानने पर भी इसकी सूद्स गति मानी जाती है जिससे उस में बहुत थोड़ा अन्तर पहला है। आधुनिक सूर्य-सिद्धान्तोक्त अयनगत्ति सब काल में एकसो रहतो है परन्तु इस का फाश ज्ञात नहीं ऐसा शिखा है। »« शाजमृयांफ भ्रन्थ में ( शाके ८६४ ) शयनगति सब फाल सें एकसी रहती है ऐसा लिखा है। इस ग्रल्थ को पूर्व के बने ग्रन्थों में इस विषय के होने का प्रमाण शव तक नहीं मिला है। इस फे झनुसार अयनगति का ज्ञान ( वरावर ) द्वीने के पहिले द्वि० आ० भ० भटोत्पल के दीका में लिख है। परन्तु दूसरे ्ञा० भ० में ऐसा नहीं लिखा है जिस से द्वितीय आर्यभट भटोरपल के पढिले थे ऐसा निश्चय द्वीता है

उपरोक्त प्रमाणों से द्वि० झा? भटोक्त मेप संक्रमण काल के उल्लेयानु- 'सार-द्वितीय शायंभट का समय ८३५४-सिट्द होता है .. इस द्वितीय शांसिद्ान्त में १८ शपिकार झीर ६२३ आप छनद के चोक (हैं प्रधम १३ अध्यायों से फरण ग्रन्य के निराले अधिकारों का यर्णन है, 'चौद॒हर्थे में गोल सम्यन्ध घिचार एवं प्रश्न दें, १४ वें में १२० श्रायों हो० में भट्ट गणित एवं छेत्रफन, घनफरल का बन है, १६ में भुवन फोश फा वर्णन है, (११ थें मं प्रद्ट मध्य फी उपपत्ति इत्यादि हैं और ९८ दें में बीजगणित, फृष्टक [गणित इस सें प्रहर गुप्त फे श्र० सि० से भी अधिक यिपपदें | इन ने संस्पा / दिख लाने का क्रम प्रथम जायेभट से भी पिलक्षण ही दिया है रैपा क्षि--

/ चरण वर्णबीधितसंस्पा ब-- संण्पा 4क, ट, पे, घर ९्‌ च, त, पर ह्

# ख, ठ, फ, रप८ रे छ, थ, सस-

॥।॒ थे, ड, थ, लक ट् ज, दु, हवन हू

(' घ, ढ़, भ, धर के, घर ढ़ (४, ण, स, शसू जक्ष,,. नर हि

/.. अष्टानां चागतो गाति+* यए नियम प्रथम छार्पभट ने नदी लिणा है।

एस ने यहा “द्वितीवजा्येघट* के समय जादि का विचार इसलिये किए पे कक जिय से पाठकों को य्ट धरम हो कि दोनों शयायभटोय पन्दों कं दोनों हु सि

है दुशाना कौमसा है-एपं दोनों पन्‍ए एक पन्थकार द्वारा धने या भिन्र द्वारा

|

भूमिका र्ढ वार अपनगति एफपी नहीं रहती बरण उस में बहुत न्‍्यूनाधिक्ा होता है परन्तु झपन गति सदा एकसी रहती-ऐसा सानने पर भो इसफो स॒ुएम त्ति सानो जाती है जिससे उस में यहुत घोड़ा अन्तर पहला है आधनिक /[प-सिद्दान्तीक्त अपनगति सब काल में एफसो रइती है परन्तु इस फा उछाल ज्ञात नहीं ऐमा लिखा है «४ राजभूगांफ ? ग्रन्थ में ( शाक्के ८६४ ) श्रपनगति सब काल में एकसी >दती है ऐसा लिखा है। इस ग्रन्थ फो पूर्व के बने ग्रन्थों में इस विषय के धोने का प्रभाण शव तक नहीं मिला है। इस के झनसार अयनगति का तान ( यरायर ) होने के पहिले द्वि० आरा० भ० भटीत्पल के टीका में लिखा था परन्तु दूसरे आा० भ० मे ऐसा नहों लिणा है जिस से द्वितीय आर्यभट (/टीटपल फे पद्िले थे ऐसा निश्चय होता रपरोक्त प्रमाणों से द्वि० ज्ञा० भटोक्त मेप संक्रमया फाल के उस्लेयान- आर-द्विसोप आरंभट फा समय ८५४-मिट्ठ होता है 6... इस द्वितीय शायसिद्वान्त में १८ शविकार जीर ६२३ शआर्यो दन्द के छोक हैं। प्रघम १३ अध्यायों में फरण ग्रन्प के निराले अधिकारों का यणेन है. हीददयें में गोल भम्धन्ध यिचार एवं प्रश्न दें, १४ थें में १२० आया झ्ो० में (इ गणित एवं छद्रफल, घनफल का वन ऐ, १६ थें में मुधन कोश का वन है, (थे में ग्रद भध्य फी उपपत्ति इत्यादि हैं झौर १८ दें में घीज्यणित, फृष्टक गयितहँँ | इस में प्रह्म गुप्त फे प्र/ सि० से भी अधिक्ष विपयर्द इन ने संस्पा दिए लाने का क्रम प्रधम शायंभधट से भी पिलक्षण द्वी दिया है फैपा कि---

.. धणे चर्णबोधितसंस्पा यर्ण-- सेगपा के, ट, पं, य,न- श्‌ च, त, पर (/छ, ठ, फ, रस श्‌ रू, थ, भर ] /ग, €, थ, लर ज, दू, हन- ४7प. ढ, भ, धन के... घन र्‌ (डि, ण, भ, शंस ह। जे, नर

कं अट्टानां घागतो गतिः* घ्ट नियम म्रपम झायंभट ने नट्टों लिणा छ।

धष्च ने यहां “द्वितीषजायंभट* के ससप झादि दा विचार इस लिये किया कि ज़िप में घादकों को ये शत नम हो कि दोनों झायेभटोय सब्दों कर पं चराता कौमघा है-एवं दोनों परुप एक ऐऐ घनदकार ट्वारा धनेंघा सिर द्वारा

3

३३ शाध्यभटी पष्य- दृत्पादि। अप दस फा णागे “प्रथम झआायभटीय* का छडुवाद आरम्भ एएा हमारे देशके घुसे शून्य ग्रत्पष सो आद्गरिशों मे पद्धि ते के शाये हुए दि के उपद्रथ आदि कारणों मे नष्ट भ्रष्ट हुए, णम मे यभे यथाये ग्रतण दशा विद्या के शत्रुझों (मूरर) के पास गहतेएँ छ्ीर उनका प्रचार नहीं होता, इधर घाये घनय एसारे परस गाननीय शटप्रिज्री गयनमेंग्ट क्षे सुप्रवस्ध घ्े घागरयों सथा सन्दन, जम्मेन शआादि देशों में सुरक्षित हैं, परन्तु यह पी यात है कि जिन भारतपासियों फे घर का रण समुद्र पाए शा" भष्ठ फे तरक् की गाठ़ू सिद्रा में झुम्भफरगा फी साईं सरा्टे मार कर होते और जगाने पर भी नहों जगते-पौर पइन्द्रों झअमुल्य ग्रन्‍्यों फा तशमा दि यत आदि से द्वोफर शाता है तो उसे यहे चाय से देखते हैँ ही इसने अपने देश के गौरव रक्षाथे ज्योतिष के पुराने ग्रन्थ ०" यी एक पति जम्मन्‌ देश से संगवा दर पाठकों के झवलोकनार्थ मटीफ सात भकाशित फिया है। झाशा है कि छमारे पाठकगणा इस यो एक संगवा कर अपने स्पदेशीय रक्कोंका संचए फर एसारे परिश्रम फो सफश

अनुवाददक

आारय्यभटोयस्य विपयानां सूचीपत्रम्‌ दिपय

सहू लाचरयापूर्यक यस्तु कपन

संस्या ज्ञापक अछरों क्की परिभाषा॥

चतृथंग में मर्योदि को भगणसंस्पा

न्ह्ोभ वध, ग़क्ू के शीभोघ्य भगण

फाष्पान्तमत सन छोर गत काल

राशि आदि विभाग, आक्राधशरष्या थोजन प्रमाण आदि

सयोजन परिसित भमि झादि का योशनप्रमाण

ग्रददों के क्पपान-प्रमाण और पुरूप-प्रमाण

सहूणादि पांच ग्रहों का पात भगण छीर ग्न्‍दोयांग

भयांदि फें भन्‍द॒दस झौर शनि शादि फे शीमएश ।+

( धक्रे प्ठो कप पगभपर्‌ में एक्त एवं भ-छाप पी फरपा फा प्रमाण +

चौवीश शटुज्य ( दश गीतिका धृष्र परिक्षान दा घाण प्रषमपाद पी विपएशवी शाह 7१८ हर

प्रन्धकार फे शम्मस्थाग फो घरेग

भंरया ये दश प्यानों पी संहा शीर संज्ञा दा स्यछर 4 चये झीए घन स्वहूप घरेग

चरगेसल

चनमृल

प्िभन क्तश्रफल झीर पन ज़िशुत्ष छा एन

हृत्तशश्रफल झीर पतन समद्च् शत्नफ्न

द्विपम चतुष्कोत्त घादि था रॉप्रफान

शप छेष्रों बा फल लाना छीर ध्यादाएं हुल्पज्या का क्षपम शुत्त की परिति का प्रयार

ऊोवा बी परिकषपना को छिणि।

भीलिकोक्त शत्टज्राएं थे लाने वा चए८

दृत्तादि छे एरिशाणएना वा प्णाए

दृत्त के. विष्शश्भाएँ दए स्टार

हटा का काना

बोटो फोर भुल्‍्ाफों टए रूापरर

बच एव छूट शरा था स्टामा 4

एपाड

४-५ ६-9

3-५

है 9 ११ श्‌ १४ हु]

इघ-३

क्धन्कच्च

हब ही 4

रा]

कब हहह बढ 4४

बन

आष्यभटीयर्य विपयानां मूचीषत्रस्‌ दिपय पाण्यंगत दो घरों का लाना ओेडीफल कर लामा गच्छ या लाना। सडूलित धन का जाना चबगे और चन के सदूलित का जाना दो राशियों के संवर्ग से दो राशियों का लाना शाभि के संबग से दो राशि का लाना | सूलफल लाना चराशिक गणित मिल राशियों का सबर्णीकरण। व्यस्तविधि। संच घन का लाना अध्यक्त मूल्य का मूल्य दिखलाना ग्रहान्तरों से ग्रहयोग का झाना कुटाफार गणित द्वितीय पाद्‌ फी विषय सूची समाप्त हुयी काए और जचेत्रयिभाग द्वियोग और व्यत्तीपात की संझया ऊश्च नीच झुत्त का आधार और गुरुबपे की संख्या ऋैर, चान्द्र, साथन, राफफ्षरु सानविसाणग आअधिसास, अवभ दिन था छाय दिन शमुष्य, पितृ, देयताज्नों के बंप का प्रमाण ग्रद्दों फे युगकाल, ग्राह्व दिन काल ! काल की उरघर्षिणी आदि खिभाग। अगादि सपने काला कल आपकी लाजू ' चष्टीं का भसगति द्ोना शगगति घाजे चरप्तों का शीघ्र रलि घोना। शाशि: भाग, छादि सेत्रों दा प्रभाण | अद्धद शददत्त मे शवोगल चदट्ट कदपा का ऋण छा दध्पा पू पे काक्ष दोराधिषति, दिगपति।

आय्यभटीयस्य विपयानां सूची पत्रस्‌ विपय दृष्टि के वेषम्प होने का फारण- मतिसयष्ठल का प्रमाण और उस फा स्थान- स्फुट ग्रद्टों का ऋन्तराल म्ाए- खमश प्रकार- उच्च, सोच दृत्त के क्रमश का प्रकार--- भन्द और शीघ्र के ऋण और घन का विभाग- ' शनि, शुरू, भद्जूल (स्फुट) भ, सारा, ग्रहीं का चिवर लाना- छदीय पाद की दिपययूची समाप्त हुई अपंसणष्ठटल छा संस्यान- अपकफ्रम मण्डल चारी ग्रद्धगए< ।शप्मण्डल के चन्द्रमा का पात उत्तर से दक्षिण-

एपाड़ू ४८-४९

पृ घइ८-६० ६०-६९ ६९-६२ ६२-६३ ६३-६६

६६

६9-६८ हद ६८-३०

चन्द्रमा आदि का दूर और निफटता से सूये प्रभा से सदयास्त 'ञाच-9०-9%

स्वतः अप्रकाश भूमि अर्पदे फे प्रकाश झप ऐलु- ।फदया और भूसंस्थान- भगोल के ऊपर प्राशियों फा निधास-- फिलप में भूमि की दद्दि शौर हास- भूमि का पूछे की ओर दलना- भपन्र के भ्रमण का कारण--- भेरू प्रमाण झौर मेर का स्वरूप--- भेरु, धष्टथामुख आदि का अधस्यान-- (भूमि के चारों शोर एपियी के चतुर्थ भाग में नगरियां-- शष्टा घौर उज्नयिनी के थीच का देश--- भूए्टस्थित ज्योतियक्र के टृश्य छोर अट्टश्य भाग- ईज्योतिधक्र में देघाशुर टृश्य भाग- दिवादिकों का दिन प्रमाए- शोल कएपना- पिसिज्ष में लक्षत्र दीर मृषोदि घष्टी का ददुयास्त- द्रष्टा के कारण रूले सोचे का विभाग- टृशसण्टल, ट्यतेप सवहल- ्ीः

ञ१ 9९-9२ 9९ 3२ 9२-५३ 3३-3४ कह 9४-३५ 33-9६ 9६ 3६-9१ 3१-3५ 95०१९ ड््ष्लपक घ्ड घ्ड

झऋ्ण्येभटी यस्य विपयानां सूचीषश्रर दिपय

गोल के ग्रनण का सपाय-

क्षेत्र दाए्पना दा प्रकार ओर अक्तावलस्क्षकू--

स्थाहीराजाहुं---

पनिरक्ष देश में राशि का उदय प्रभाण--

पदिम शाज्न की हानि वृद्धि

खरदेंसीय राशियों छा उदय

इष्ठकाएा में शड़कु फा लाना

शड्भु अपया कफ सपना

अफे ऊग्रा का खाना

सूर्य का सम सणठलप्रदेश काल में शडफु झा खाना

सध्यानए शह्ू और उप्त को छाया

ड्रफ्लेप जया का फाना +

द्रगगति, बयावलम्धन गोजन का हाना

इन्द्ररदि फे उदयास्त लग्न गिट्ठि के लिये अपने वि

शापतन टूफूकर

अन्द्र, से, भनि छाया दे चन्द्र गये ग्रहण फे स्वएप |

अष्टटकाल भछापा का देव

भूदाया ये घग्द्रकन्ा प्रदेश मे व्यात ग्रोशन फा लाना ््थित्पध का लाना

पविमद्धराल फा पाना

शझब्ह शेष क्‍्रधाल-

कारशालिक घात चघरिमसशतण-

इंचगे शोश्ादि क्षाग-

श्टवील विम्च ज्याद यर्धन--

शुंपेपदता में अदुरय साग-

इव शारद भातिषादित गट्ट गति मे डूछइ भवात द्वारा स्ः डारर करे हक

शोइस

ख्थाय्यंभटीयं ज्योतिषशास्त्रसू

» पतेजः प्रेरयेत्‌ मज्ञां स्वस्थ शशिभूषणस्‌

शगटट्टाभयेष्टाडून्त्रिनेत्रन्तमु पास्महे

लीलावती भास्करीय लघु चान्यथ मानसम्‌

ध्यास्यातं शिष्यद्योधार्थ येन माक्तोन चाधुना॥'

सन्द्रस्पायंभटीयरुप उमाप्यरल्पा क्रियते मया

परसादी श्वराए्येन नाम्रात्र भटदीपिका 2 , त्ब्रायमायाय श्रायभटो विष्नीपशमनायें स्वेप्टद बतानमस्कारं प्रतिप« * बस्तुकफपनश्वायरूपया करोलि

5 हि 2 हि ।] / मणिपल्यकरमनेक क॑ सत्यां देवता पर ब्रह्म आयंभरस्त्रोणि गद॒ति गणित कालक्रियां गोलमू॥ इति कं ग्रह्माणं एक फारणरूपे णेक अनेक कार्यरुपेंणानेफ सत्यां देवता

एयदेवता। स्वपस्भ्रव पाएमाधिको देय जन्‍्पें तेन सृष्टा इत्यपारसा्थिका/ रत्ह्य जगतो मूलफारणं त्रिमूल्य॑तीतं सर्वेव्याप्तं प्रध्ठ स्वयम्भूरित्युक्ती भ- ति। झआयभट एवं ब्रह्माणं प्रशिपत्य गणित कालकियां योलम्‌-इत्येतानि धशि बस्तूनि निगद॒ति + परोक्षत्वेन निर्देशालिगद्तीति बचनम्‌। तत्र गणि- /चाम सद्भूलितमिश्रश्रेडीद्श धीकुट्टाकारच्डायाक्षेत्राद्यन कविधम_। इद्द तु काल- क्रेयागीलयोयोयन्मात्रं परिकरभू तावन्मात्रं सामान्ययणितमेय मायशः मे /तिज्ञातम_। अन्यथ किलिता दालरूप क्रिया कालकिया कालपरिच्देदीपा प- [त॑ गृहगणित कालकरियेत्यथः। गोलजाम प्रह्माएडफ़टाहमध्यवरत्याफ्ताशम- स्यगस्थंहनक्षत्रकध्यात्मर॑ स्वमध्यस्यधनवृच्॒भूमिफमपक्रमाद्यशेपविश पे पते शवाह्वास्यवायुपेरिय कालचकण्पोतिश्पव्न्भपश्नरादिशव्दुबाच्यं गोजः ।स बच

;'

गीतिकापादुः

चक्षक्षेत्रत्याधतुरभाद्यनेकन्नेश्रकल्पनाघार त्वाघ गशितविशेषगीघर' यमपि टद्विविधम। उपदेशमात्रायभेयन्तन्मूलन्पायायसयप्टेति सनन्‍्दोदचादिवृत्ताद्मपक्रमाशुपदेशमात्रायसे यम्‌ 'इष्टदिनग्रहगतीह्ाप' अचरदलादिष्छायानाष्टिफाद्युपदेशसिद्दसुग धमाणादितो न्‍्यायावर्त 'विच्यण अत्र स्वपस्भृप्रणकरणेन फरिप्यमाणरुप तब्द्रस्य सूलमिलि म्रदर्शितम_॥ अथोपदेशावगम्पान्युगभगणादोन्‌ सड्छ्येपेण प्रद्शयितु दशगी रिप्पन्‌ तदुपयोगिनों परिभाषाभाह भा०-आअनेक देवताओं में परमप्रेप्ट ब्रत्मा-जगत्‌ स्वरष्टा (री देवों को रचा ) को प्रशान कर आयंभट ( ग्रन्थकार )' गशित , आर * गोल विद्या इन तोन बस्तुओं को धर्णन करते हैं शः _ः वर्गाक्षराणिवगे३वर्ग उवर्माक्षराणि कात्‌ डूमी खट्ठदिनवके स्वरा नच बरवर्गे नवान्त्यवर्ग इतिस-यर्गोक्तराशि बग। ककारादीनि सकारान्तानि वर्माक्षर चगस्थान एकशतायुताश्योजस्थाने स्थाप्यानि | एवं ऋमेश संख्या चग अवगोद्वराणि | यकारादीनि अवर्गोक्षर/णि तान्यवर्गेस्थान लक्षदियुग्मस्थाने स्थप्प्यानि | कातू फकारादारभ्य संख्या वे एूकसंसयः खकारो द्विसंस्य एवं ऋमेण संख्या बेद्या जकारो दुशर्स एकादशर्संसपः लफारो विंशलतिसंस्यः सकारः पश्षुविंशत्तिसंण्यः पिपाठकऋमेण संख्या चेद्या ड्मो यः डफारसकारपोयगेन तुर पप्ृसख्यायाः पश्नेविशतिरुस्यायाश्य योगस्त्रिन्शंसंस्य इत्यथेंः सूथानमद्ठीफुत्य जिंशदित्युक्त' नतु द्वितीयस्थानमद्लीकुत्य द्विती पज्िसछपे! यफारः $ इत्पुक्त भवर्ति | रेफादयः ऋमेण प्विंवीयस्पा संस्यास्स्यु५एकारो ड्वितीयस्थान दुश्संस्यः शतसस्पावाचक इत्य चर्गेस्थानथिष्ठितापि हकारमंस्या संण्यान्तरत्येन घगेस्थाने स्थास्य कारादिसंप्या यर्गेस्यानविष्टिताध्यवगस्थाने संस्यान्तर॒त्येत्र स्थाए क््यायतवस्मिटुस ऋशगतुल्पो यफार इसि यक्तव्य रूसी य' 'छुतति चरण; सन संपुरक्तरण्पक्षरेस्मं्या मतिपादपिच्यत इति मदशिसं भवतति लामनद्गी कार्पस्यावियपस्‍पाई मयुश्यन्ते इत्मत्राएं। एट्टिनयर्य

आ्यभटीये वर्ग ।इति द्विनप्रकेष्टादुशफे नव स्वरा; ऋ्रमेण प्रमुश्यन्ते झा, इ, ऋ, लू एऐ, शी,जी इत्येते नव स्वराः एतदुक्तं भवति ककाराशक्षर-

एरस्वरास्स्थानपद्शंफा भवन्ति संख्याविशेषप्नद्श का इसि क्थ नव- गा शष्टादशर्क म्युण्यस्ते | इत्यत्राह। वगर्बग होते वगस्थानयु न- 'घराराद्या नव स्व॒राः ऋमेण प्रमुज्यन्ते तथा झवगस्पानेंपु एवं * ए- पम्यैरपि कल्प्यम, तथा प्रघमस्वरयुतैय कारादिभिविद्धिता संस्या पणमें धरगेस्थाने स्थाप्पा ट्वितीयस्वरयुतेद्वि तीयें शवगेस्थाने।एयमग्यैरपीति। ए- परष्टादभस्पाने पु सं ध्या बैद्या।यदा पुनस्ततोरधिकापि सस्या फेनचिद्धिबक्ति- लदा कथमित्यत्राह्। मवान्त्यवर्ग या ' इति + नवानां यगेस्थामानागन्त्ये धघ्वंगते वर्गस्थाननवर्क तथा नवानामवर्गस्थानानामन्त्ये रूध्वयर्त शबगे- पाननयके एते नव स्वराः प्रयुश्पन्ते था। केसचिदनुस्वारादिविशेषेण पुक्ताः प्रयोध्या इत्यथः शास्त्रष्पवहारस्त्वप्टादशस्पानानि नातिवतंते अप चतुय गे रठ्यादीनां भगशसस्यामाह।

भा? -वर्य के झतरों को (क, स' ग, य, ड, च, छ. ज, क, भ,ट, ठ, उ, ढ, ।]॒ त, थ, द, घ, न, प, फ, य, भ,म,) ये के स्थान म॑ एक से अयत तफको /विपस*» स्थान से रक्ख फर संझया जाननी चाहिये | इसी प्रकार झाबर्ग में ब्रवग के अक्षर जानना यकारादि (य, र, ल, थ, श, प, स, हू.) शबग के रुथा- पर मे दृशमहर्त्र, लक्ष, आादि को”सम“ स्थान में रकसे। फफारसे लेकरसंस्यः हननी अर्थात्‌ क,से ३, रा,से, २ग,से इत्यादि, स,से .४ इसमफार को ९६ सं- हएपा सानकर पस्येन्तक्रमणः २५ संस्याहोंगी। ड, घौर स. इन दोनीं कीसंसपा का योग्य की संख्याहे। प्रथम स्थान में ३० फा थोधक, द्वितीय स्थान रे का, इसो प्रकार 'र' ४७ का योधक शौर द्वितीय स्थान मे का थोचक है ।हकारादि भो इसो प्रकार फजानना। यद्टां फकारादि में झो शकारादि स्व- ( संयुक्त हूँ थे संस्पा प्रदर्शक नहीं हें सन्त स्थान मदशक है।श, ₹,ठ, ए,ऐ, शो, शी, ऋ, लू, थे नव स्य॒र दं-तो ₹८ संस्या स्थानों नयस्वर बर्यों कर रझख जाधगे ? दग स्थान भे॑ नव स्वर ऋम से अथक्त होते हैं, उमी प्र- कार दे स्थान भे भी चेंद्दी भव स्वर ६ै। इसी पक्ार छौरां का भी लानना मथम स्थर यू क्त यकारगएंदि द्वारा स्शपा कटष्टी रार्ये-डस को पट्टिले झवबर्ग स्था- भें, और द्वितीय स्थर युक्त को द्वितोय जबर्ग स्दान भें रखनी इमी प्र-

्‌

| गीतिहझापादः फार शीर भो ६६ भंग पा शाननी चादि से झगर ६६ में झ्षिफ्रापंगण देती मियममे शानना घरम्त जास्द्री ्स ६८ सस्या से झधिफ या घ्यवरह्ार शा० >निश्तन जिग्वित चक्र में (झद्र ट्रारा भी इस सू में ०९५ का निर्देशद्णा है) गीशिफा का ऋर्ष फिया गया है संख्याज्ञापक चक्र।

अक्षर रुए पा। आत्षर मंस्पा।

अर खू-१००३११४१#

हु+३१०० 62००४१२

छउरत(६९०२ आऔोर>(०१६६३००१३१११ अर-१००८०२० आर१३2४:टरश्व्सटरश्सार फर९ न. ट|११५ तज६ पच्र]. यह३०. गतआ खज>-र दछज9 ठन्श्र ११ फरू२२ मन8३.. पलम गज्३े जन्प ड-९३ दनन्८ न२३ सात३३ सन्त घर>४ मजएं ढत्ह४.. घरन्‍१० भर न8 यनतई0. 59) डत्पे जर१० णर>१३ नतर० ज्२३

'. और नव स्वरें का योग, यदि यर्ग या अवर्ग झक्षर्टी के साथ - तो वे ९८ स्थान फे प्रदर्शक होते हैं। जैसेः-

के फ्‌+झर-९ इसी प्रकार ऋर व्यप्ननी का भी पं कू+इच१०० और सक+झशर३० कु कू+/उरू१०००३ यि सयून+इ-३१०००२ कू क+ऋ-१००२००० यू यकउत३०००२१ कु, कू+लू-९०००००२०० इत्यादि पक कू+ए5-१०००००००००० ऋीर के क+एच१०००००००००००० रु र+अतच-छ४० को क्‌+पख्ोर+१००००००२००००२०० रि र+इ-४२०० यी कू+आर--१०००००००००००००००० रू र+उ--४०५३२० इत्यादि इसी प्रकार 'ख' का भी जानना झा सू#झत-र सि ख+दज२०० उनन२०२०२ पु सु सूतउत्स इति संख्यापरिभाषा-समापष्ता

आयमटोये भें

7रविभगणाः ख्युघ शशि चयगियिदुशुद्धक

जीव.) [माकूशनि ढुडद्धिष्व गुरु खिच्युभ कुज भदुलिकूनुख सगु- तर सीरा: ॥१॥ टद्शस्यातयतानां संख्पानां संज्ञा तः- «एकद्शगतसहस्तायुत॒लज्षमयुतकोटयः ऋमशः] अगु दुमणब्ज॑ सर्बनिसवेमहापदुमशट्टूबसुतसस्‍्मातू जललघिशचान्त्य मध्य पराह्ुमिति दशगुणोत्तरं संज्ञा:/» पर्मेन वेद्या युगरविभगणाः चतुयूं गे रवेस गणाः रुयुधू इति | उकारयु- पकारेणायुतद्वयम्‌ क्तम्‌। सकारयुतयकारेण लक्षत्रयम्‌_'एवं सत्र हल्द्वये एफ एव उमयत्र सम्यण्यते | ऋकारयुतघक्कारेश प्रयुतचतुप्फम्‌। एयमनेन न्यायेने श्र संस्या बैद्या शशि शशिन इत्यथंः सूत्रे ्यविभाक्तिफोषपि प्रयोग- व्यात्‌ १.चयगियिदुशुरू लू इति मुगभगशाश्शशिनभ घद्‌। त्रिंशत्‌ | शि शत भू। यि जिसहस्त्रमू' डु श्युतपश्यफम्‌ 'शु लक्षसप्तफम्‌ 'छू प्रयुतसप्तकस्‌ ।लू टिपश्ृुकूम्‌ + इति कु भूमेरित्यथः ड्िशियुणलूरुपू इसि भगरणाः। माकू ग्गल्यर सम्भूसा भगणा इत्यथ:। शल्त्‌ पशृुद्शायु दम नवमस्था ने पश्चदशम- पाने एफश्चेल्यथं। रह प्रयुतद्रयम्‌ ' पृ फोट्यब्टफम। भूमेयत्पाड, सु खंभ्रमर्ण स्प चतुयू गे संभूता संण्यात्रोक्ता | भूमिष्येपलेति प्रसिद्दा तस्पाःकपमत्र क्र शकथनम्‌॥ ऊुच्यते प्रथहाक्षेपात्पशिचिमाभिस्‌ खं ध्रमतो नक्षत्रमण्ठलसुप सि- पाषानयशादुेधेमण प्रतोयते तदद्ीफ्त्थेह् भूमेश्रेमशमुक्तम्‌ बस्तुतस्तु भूमेधे मणमस्ति झतो मध्त्रमपटलरुप भ्रसशप्रदुशनपरमत्र भुधमणकथ- [मिलिप्रेद्यम्‌ चदपति मिश्माज्ञान स्‌ अनुलोमगरतिनोरुच' पश्यत्यचल विलोमग यद्धत्‌ अचलानि भानि समपरश्चिमगानि लह्॒सपामू [ति + अद्दोरात्रेण हि भगोलरुप समस्तभागधमदादहुव रवेदिंनगतितुल्यभागो पि धरमति। शतो रवेयू गभगणयुतभूद्विसेस्तुल्या मक्तदरभच््टनस्थ भ्रमदमि- सिभवरति सैवाजोत्ता स्पातू 4 शनि दुष्ट घिएुव इति+ शनेयू भभगणाः। हु डपुतानाएशद्श पट पछुशतम्‌ शरद फ्ट्महम्इमू 4 घप चत्वार॥ पांष्टः &

दर गीतिदापादः गुरु खिच्युभ दलि + गुरोज गणा। सि इति द्विशतस्‌ | > चु इल्पयुतपटकम्‌ ' यु इति लक्षत्रयघु' इसि चतुविश चूसि कुजस्प भगणाः » चतुविशतिः (दि खप्टशताएं सहस्त्र प्‌ :छु झयुलनवकण नु लक्नद्वयभ। स्‌ प्रयुतद्रपभ' अर लिए भूगुदुथ सौरा। भ्‌गुबुघयोय गभगणास्सौरा एवं। स् एवं पुथमसुज्ेण रव्यादीनां सुगनगणान्‌ प्रदभ्य '्वि गणान्‌ दुधभ,ग्वोण्शीयूघ्भगणांश्व शेपाणं कुजगुरुण चन्द्रपातभगर्णाप॥च भगणशारम्भकालझाह हक घन्द्रोच्च जु प्खिथ बुध सुगुशिधून भग॒ जप है. + गज, चुफिनच पातविलोमा बुधान्हअजाकदियाउ चन्द्रोच्वस्प ज्‌ प्खिय इति भगणाः ) जे प्खिथ इलि ताष्टकम! रू लक्षच॒तुष्कम्‌ पि अष्टशहस्तर॒प/खि द्विशतर युघधस्य शीघ्रोधभगणाः सुगुशियन इत्ति। सु लक्षमवकप्र्‌ प्तसहस्त् ५"थू प्रयुततप्तद्शकभ् (न विंशलि/ भू गोश्शी घोः जशप्टी। अशी तिः विशतत्रयाधिकद्धिसहस्तरम + खु शयु कम # शेपाकोंः! शेपाणां फुजगुरुमन्दानां शोधीधभगणा एवं उपरिष्टादेपां भन्‍्दोचांशान्यप्यति | अत दहोक्त 'सिच्यति युफ्िनच इति पा्तसरुय चन्द्रपातसुय यिलोमा युतानों अऋषो्िंशतिः कि शत्तद्वृशशधिफसहसतद्व पम _ ध्स कुशादीनां पातणगणान्वध््पति | अफेस्य तु विक्षेपो चन्द्रपातसुप सगदा इति रसिष्यति। उच्चपातानां व्यो सपा च॑ प्रह्मगुप्तः--- ढ» मंधिपादनाधमुचाः प्रकल्पिता ग्रहगतेस्तथा | इलि॥ दुन्शपक्राकादयग्ध शब्दग्याम ! कृतथुगादी

दुघ्भासण्य घ्यजात्‌ भेषादिभारण्प राणशिवफों गला अवोष्दा इत्यघ ससूर्योदुपी सध्यमृयाद्यः कल्पारष्भस्तु स्फ च्य

8 हा 0 तन 35० 7 32 कब 2० 2६ 5. "कद

ऋयभटोीये

भुदगण मुगोय भगरसंण्या * घृधिवो १४८३२२३७१०० सय्ये ध३२०००० अन्द्रमा ४६७५१३३३६ चूहस्पति इ६४९९७४ भड्ूल 4] भुक्र ४३२००९०० युध शीघोच १७२१३७३२० आन दिन १३७१९१७३०० अन्द्रोघभगण एष्प्श्ट्र अन्द्रपातभगण २३२२१६ चुधपालभगण ४३२५००० शुक्रशोप्ोध्रभगण 3०२२०३८५ शनिभगण १४६५६४ सौर सास ३१८४२००० अधिमास १४९३३३६ चान्द्रमास ५३४३३३२६ तिथि १६०३२२८६४८० चयाए २३:८१६६२

चर्षभमान दिन ३४५ २४५पश११ वि १४॥१, २० काहोमनगत्रो ढ़ मनुयुग श्ख गतास्ते मनुयुग छना च॑ फलपादेयुंगपादा ग॒थ गुरुदिवसाच्च भारतात्पूर्थम्‌ ॥३५

काएमनयो फस्प प्रामणः शट्ट शादी भनवों चलुदश भ- चम्ति सरपग शर। एफेकस्प सनोः काले यगानि चतुुयाशणि शूरर * स- जज डे बुदु यू प्लतिः + तप ट्रपम्‌। ट्वासप्ततिरिल्यथ: | गतास्तें दाएतस्माइतेमानात्कलिय- गास्पृंथभतोतारले समदः पट्‌ सनुषुग दूना च। दलतमानस्य सप्तमध्य भरोः झतोतानि चतुपुगाणि दूका | दा सप्य / भा धिशलिः॥ शप्तिदययति- पिल्प्दा + स्थणर्दों ह्रवरीएपोन दिएप. झशफारर टृथ एदाकारः बन्चा-

षट भीतसिशोपाद॥ देखु गणदः गुरद्यियाय भारतागटपूर्यम: युगपादा विंशस्प चतुर्पुगसष पादाश्य + न्रयः पादाश्य | गता श्रेप्नाद्य चफरभ्रपं नसस्पापद्ध कम कदा एयमिल्यप्राह 'दिवसात्पूथमिति ) भारता युधिप्तिरादयः | तैरुपलक्षिते झुदिवतः + रा्य चरतां युधिष्ठिएदीनामन्ल्यी गुरुदिय चइत्यथः सस्मिन्दिने युधिष्ठटरादरों राष्यमुत्सृगप सहा+ 'िट्डि: तस्मादुगुरुद्विसात्पूर्दे कल्परदेरारम्य बता सस्द थे/ श्स्मिन्पद्दे युगरनि परसुपरसमानि युगपादश्च चमु था चेत्‌ बुववारादिकें चतुयुं गे कशिमुगारम्भशशुक्रवारे तयुगारस्भोी बुधवार इति * बुधानहयजाकोंद्याथ् साद्धार मकाशिकायां फलियुगादेः प्रागतीताः कल्पदिवसा: शरा बेदकृतेपुयुर्ममखरसमितः सुयात्‌ इति आहर्गेणों सात युगानां समयस्सिध्यति चतुर्थेन सुूत्नेणा राश्यादिविभाः झसाणं आणकलयोः क्षेत्रसाभ्यं गृहनक्षत्रकद्यायोजनपुमा भाएई-ब्रछए के “दिनस चौद॒ह मनु हीतेहेंौर एक सर होते हैं | हा भनु पूरे बीत गये, सातवें मनु के २७वां और वत्तमान युग के तीन पाद भी बीत गये (सत्‌. ऋेता, ' से कलियुग का झारम्स हआ--गरुबार को !दृएपर समा सुचिछ्ठिर ने राज्य किया ) इस प्रकार शआायभट्ट फे सत से बफ्तेनान फलियुग पर्यन्‍त १९५६ १२००० वर्ष यीते हैँ ( अंभट्ट के मत से चारो युग ( सत्‌, त्रेता द्वापर, के) चारे युग की वर्ष संख्या न्‍्यनाधिक नहीं है युग के च॑ एवं इन के मत से मनन्‍्वन्तरें को सान्धि सीनहीं होती- से मन्वन्तर मे 9० मुग होते हैं # शशिरा शबछ चक्र त्ेइ्शकलायोजनानि यह आशेनेति कछां सू:*खयुगांशे ग्रहजयो भा

अं 7+++++/४६++--...0808ह00तै

ष् आन लकपक _ (») हणेनेलि कर्शाभुयंदितहिं कुलो अरत कमर

आयेभटीये ए्‌ शमिनम्चक्न भगणा हादशगुणिता राशयः शणिनो सुगभगणा द्वादुश- शिता युगराशयों भवन्ति भगणादु ट्वादर्शांशो राणिरित्यक्नं भवति। ले शयो यगुणास्त्रिशद्गुणिता अंशा भवन्ति। राशेस्त्रिशांणों भाग इत्युक्त धति ते। शा वगुणाष्पप्टिगुणाः कला भवन्ति! रशात्‌ पष्टयशः कलेत्युक्त' धति ताः कला जगुणा योजनानि भवन्ति शशिनो ग्ुगभयाः कला द- गणिता अ्राकाशकध्यायोजनानि भवन्तीत्यथः ब्रत्मागठकटाहायच्धछिल्नसुप परश्मिव्याप्तस्पाफाशमग्डजस्य परिधियोजनान्याफ्राशकश्यायोजननी त्य पन्‍ते। खसपष्टपद्रीपरराश्विस्वराब्ध्यद्र यव्यिभास्करा इत्याकाशवाध्यायो जना- १॥ प्राणेनिति कला भम्‌ | प्राणेनोच्छूघारुतुरयेन कालेन भ॑ ज्योतिश्चकऋ लामेति कलापरिसमितं मदृशप्दहवायुवशात्पश्चिमामिमुर्ण गच्छसि | सख डभयसतल्‍्या हि एपोतिश्वरूगता. फला। चक्रश्रमणकालनिप्पनाः माणाशचः सलल्‍या इत्यक्त भवति अतोधटिफासण्डलंगताः प्राशा 'राशिचक्रगताः लाश्च क्षेत्रतस्तुल्या इति चोतक्त भवति सछयुर्माण यहजवः समादाशकऋछ्षया। गे ग्रहस्य भगणया। | श्राकाशकध्यातों ग्रहभगराराप्त ग्रहजव एक्परियत्ती हस्प जदो गतिसानं योजनात्मकं भवति ग्रहस्प फप्यामग्डलपरिधियोंज- [मिल्यथः भयाशेठफ: भरूप न्श्रमश्डलस्य फदयाया यांश पष्कांगे श्र्फी प्रमति षत्रफटयातप्पष्ट्यंशेन तुलिताफंकध्येत्युक्तं भवति। अत्र नक्षत्रकष्या 'चधिधीयते अप रष्यर्गद्ि पूर्धेश्विपिनिव मिद्ठा श्कशष्यर पप्टिगुलिता नत- विकव्पा भयतीरयुक्तं भवति पघुमेन योशनपरिमिति भूग्पादयों शसमभाय्ष पदर्शयति * / भा:-अन्द्रमा क्ले भगण फो १२ मे गणन करने पर “राणि* होगी प्र्धात हन्द्रमा के सुग के भगण फो ६२ में गुणन कर राशि होगी ( भगण के १२ भाय फो शाशि कटद्दले ) राशि को ३० से शुरान करनेपर “शंश* होगे, “राशिका ३५ था भाग झंश श्ोताएँ) झंश फो ६० भे शुयन बरने से वष्णा होगी, (जम के ६० थें भाग को फछा कहते हैं) वजा को ६४ से गुरुन करने पर गो- जम भण्या दीगो ूपोत्‌ अन्ट्रमा के १घुग के बता को १० से गदन करने पर गए लझू रझाफाश कहष्ठा का ( घोशन मर ) परिमाष्द ह्रोगा इक ते डर ले राय कर सकररदा था प्रभार हाता डरे एक * कक 2 हक डे

को गाते पर्ष मे परचम को ए्‌क कपा

* खायभटोये ; पिश्य््यास के योजन संख्या से क्रम से वां अंश, ११ यां शंश १४, २०, भंश, है! चन्द्रमा की कक्षा से ये प्यास सिद्ठ होते हैं यहां चन्द्रमा का [जन करो से चम्द्रमर सध्ययोजन जानना + युग में सूर्य के भगर के देय जानना ।॥ ४६ राउपक्रसों ग्रहाशाश्शशिविक्लेपोष्पमण्डलातकार्थम एनिग रुकज़ खकगा्वें मगबध सचा ड्ूलो घहस्तोना ॥६॥ | भाषपऋमी ग्रद्म॑थराः ग्रहाराों शशाश्यतर्दिणतिभागा श्पक्रमः पर« प्पक्रम इत्यघः » पवोपरस्थस्तिकात्रिराश्यन्तरे घटिदामएठलापक्रम सएझल गिरन्तराल॑ चतर्विशतिभागतल्यमित्यथः झपसगडलाच्दशिनः परसविद्ञेपी 4 मयानास् साधाोश्चत्वारोई शा।॥ शनिगरुकण खकगाधथस शरनेविष्तेपः द्वायंशी। गरो; एकांशः! कुजस्प गाथें अ्रयाणासर्थ साधों5 शः। भुगुबधखा ८मुयुधयोधिश्षेपः द्वादंशी रुचाड्‌गुलो घहसुतो ना। पुरुषरुस्चाड्गुलो घ- /स्तश्च नवतिः पट्‌ पणुणवत्यहुलः पुरुषः। घहस्तग्चतुहंस्तश्च रुप: सूपियीजनमित्यादी नरशब्देन पणरणवत्यद्युलप्रभाणमुद्तिमित्युक्त धबति तदेव चतुहंस्तप्रमाणं भवति चतुविशत्यहूलैरेकी हुस्तो भवतीति वक्ता भवति | अहलस्य परिमाण नुपदेशाल्ले/कसिहमेवाहुल गद्मयते उत्तझ्ल .(त्परिमाणं तन्द्रान्तरे !(( लीलावत्याम्‌ ) / “ययोद्रेएहुलमण्टरांस्य इस्तो-हुलैप्पड्गुशितेश्चतुर्भिः हस्तेश्पतु्भिभेवतीह दुपढः क्रोशस्सहस्तद्धितयेन तेपासू” इति इष्ट विद्येपकथने शन्यादीनां भृगुवुधयोश्च पृथग्‌ग्रहरां कृतम्‌ तेन तेपां तयोश्च विश्ेपानयने मकारमेदोउघ्तीति सरचितम्‌ कजादीनां प« 4धाना पातभागान मययपताना तपा सन्दोघांशांश्च सप्तमंन सन्नणाह भाः-प्रहों का परमाकमम २४ अशह। अधाताप्वस्वास्तिक शीरअपरस्यस्तिक राशि के अन्तर पर हैं" चघटिकामणडल"* और" अपक्रममणल » के (ीच का भाग २४ अंश हैं" शपक्रमसप्टल” छे चन्द्रमा का “परमधितेप»

हर 22253 3 ३7

शेंग है, शनि फा विध्ेेप शा, गुरु का ऐश, मड्ुल का ना अंश शक 4३

6 भीर दुध का विज्षेप शंश है ।+४द्वाध का पुरुष द्वोता है। और २४

“भट्ुल का हाथ एवं र६ अहुल का पुरुष ट्टीता है।६८ पेटे से घंटे मिले

९३ दीशिकाधाद * कप चब का $ छाट्रत 3० दाह लत फा१ हाथ एप का दा कोश होश हि # धपभमगकजरग शान सम्रफणहा गदयांशिकार सबितरमोपाशु तथा दा अगि सा हदा प्त्चस ०)

थपए्प घोयाशाः ने दिंगगिः भुगीः थे परिदाए )गरोप्पलर्गशि०७ जन गतप 3 शटपादरा दएपारी। चादितो गत्या ट्पर्यान्धिता चुधादीना ४णम परातागूरध॒ः0 चातोउघ्तीति सितम्‌ सच प्रदशवाताएफाधघान्तई र् सब्डलापमपटलपीरगपातम्पान पातगम्द्गोच्यते पशु? यबच्रनाक्षेपां पातानां गतिरभिप्रेता गतिश्थ पिलोमा! चातानां विलोमगत्यगुरघ्‌ | शस्सिन्फाले पातानों प्ति # सावितम न्‍्दीच तथा द्वा | दा शपष्टादग "या पा गाज तथा भेपएदितो गरवा शियित सपिलु् स्दीधमित्य युधादोनां मन्दोश्यानि शगिरित्पेवनादिभिरक्तानि। दृशाधिकशतद्वपभागाः भूगोः सा नवतिभागाः + फुत अष्टादश श्ष्टादधाधिफशतभागाः + गुरोडः छल्प पफ्िंगतू ऋअशीत्यधिकशतमागाः शनेः गिच्य। सि शत पद्तिशदुत्तरणतद्बयभागा। गल्वेतिववनादपानए्ि गति

चुलोमा अन्द्रोच्चचल्‌ अस्मिन्क'ल एव भसन्‍्दोशरस्यि पातोचनां बहुना बालेनेवाल्पोश्पे गतिदविशपस्सं गांतारहानसभाहेतर | उक्ताश्शास्त्रन्तरे ( सर्येसिद्ठा देप फल्‍्पशगणाए+- माग्गतेस्सूय्येंसनद्सप करूपे सप्ताप्ववहूयः कीजस्य चेंद्यप्ता चीघस्थाए्टतुबहय+ प् खससरन्ञजाणि जैबस्य शौकर्यपाथगणासवच+ गोग्पूनय+शनिमन्द्स्प पातानाक्य धाणखत , है सनुदस्तास्तु कौजस्थ दौघस्याप्एप्टसागरा,

मीतिकापादः झअशितोचयुगं फौज दि रण भगणा इद्देपयश्तु तयी! ! के इति | आदन्वापि चघढितभागा एय खश्यन्त लत भगणाः अतएवे दोनचिदशुद्धिगता रबबहया परिकरलप्पेय लिखितमिति ।अस्मित्पर्द

चीतारसमा फिए्य ससखाध्रा्फपगनागगोचनद्रा प्रपमरुलेससमाः

बलि अष्टमेन सूत्र आअशिनण्च चर्वसत्नोदितएयदुधभ गुकुअगु सन्द्व॒त्तानि शनिगरुफुजभुगुबुधाना जे अवत्तानि चाह सा०-बघ फा पात अंश २० बक्र का देशसडल का ४१ का १०० ये प्रथम पात हैं | ये उक्तपात अंश प्षेषादि राम अरएदि के व्यवस्थित पण्त होते हैं. यहाँ प्रथम शब्द से पचत होता हे और बह मथमपात से चफ्राह तर मे स्थित है गडल और शपसपइडल » क्ले सम्पात स्पान की पात बेही दोनें यहाँ होते हैं ' सूय फा सनन्‍्दीज 3: अंश, भेप भर्ि रिपत होता है ' कुध का सन्‍्दोश्य २९१ अंश, आुछ्त का ५० भा ह९स.गुरु का एस? ज्ीर शनि का २३६ भाग हैं ॥७॥ क्रा्धोनि मन्दद शशिनरुछ गछ है क्क्य गुड ग्ल कु दंड तथा शनिगरुकुजभुग॒वुधी चर

कक

अधेपश्रुमैरपवर्ति तानि दत्ता लय शशिनी मनन्‍्दुष्त्त छू सप्त यथोक्तेस्यः सर्वेबधादिर्याे क्‍ने गादीनोत्यथः अहाणाघ्चाणए्डि सृत्तपरिमितिः कऋट्घ्यते स्‍्तानि भवन्ति तंत्र सर्येस्य मन्ददर्च गे ज्ीणि मन्दुव॑'त भेंवतीति बुधस्य थे उप्त भूगोः्थ अत्वारि फुशंसय <

रू सप्त शनेः के नव 9 जआनिगरुकुजभुगुवुधोचर्ण '४ भय ओघ्रोश्चनिमित्तणी बत्तानि कादीनि ! शोः्गष्ठ 8 गनश्नीणि भ्षट अयोदु्श घोडणशेंत्यथे: कुशरुण श्ल झुप्णव्‌ यर्चः भूगोए कूल के नव पश् क्‍ईटिसिट्यथः शघस्य टुडे ! दू अध्टादगा डे अऋघोदण | प्‌ + मफाशिकापुस्तक र्ूद्रशस्मैलयसुमुनीनद्‌ सभमाः 5

रे

रच भगणा जवेपयम्स संपोः | इति लिसलबु

आायभटोये शप सन्दणीप्रदृत्तयो: कृरमभेद्र्स्यात्‌ तेन सन्‍्दस्फुटशी घ्रस्फुटयोन्यों यमे दृस्तूचि- यथा भी घ्रमुआफलस्यकसाध्यत्वं मन्दुभुजाफलस्प तदुभावश्च | अथवा 'दुकरणतत्माधनानामबिशे पकरण शो प्रकरण तत्साघनानां सदभावश्चेति ए- ग्ोजपदे घुत्तानि प्रदृस्पे यु-ले पद वृत्तानि भूवायोः फदयाप्रसाणस्‍्त नदभ बणाह्‌

2७

80८ 3 है? मे पदर्सि भाः-चन ट्रमाफाम-्दवृत्त५६(यहां४ है परन्तु से त॒युत्त

पु दवा जाता है)पूर्वाक्त भून्र पढित सूम्य थुधादि से सिद्दवृत्त आदि है ग्रहों अंग ही से यृत्तपरिभित फल्पना की जातो ऐ-इस लिये ग्रहासे दृत्त से हूँ शूम्य का सन्दवृत्त ३, सूर्य और धन्द्रमा का सन्‍्द दी वृत्त होता युघ कर ७, शुक्र का ४, भड्ूल का १४, गुरु का ७, शनि का ७, शीप्रोधग- पर धशतः उत्पण थूत्त शनि फा ९, गुरु फा १६, सद्बल का ५३, गुक्त फा ४६, गर घुध का ३९, शोता दूं ७४८४ * $ ३5. पु बर

न्‍न्दात्‌ द्‌ ढा वक्रिणां द्वितीये पदे चतुर्थ गणक्क्दछ कूनोच्चाच्छो प्रात गियिद्श कुवायुकद्ष्यान्त्यावर॥

चक्रिणां प््षेघप्रोदितानां घुधभ्गुझुशगुरुशनोनां द्वितोये पदे चल॒र्थ पदेच नदात्‌ मग्दगतिवशाइशा/तानि भन्दवत्तानि डादीनि | घुधस्य डर पप्ठु॥ भ- ) द्दे ' फशस्य अप्टादश | शुरोए्ण झपष्टी शने। हा घयोदश प- पक्तानों शनिगुरुकुशभगुषुपानां शीघ्रादुच्चाषट्टोप्रोच्दरलिदशाइजालानि शो- 'बृत्तानि जादीनि | तानि द्वितीयचतुर्घपादयोरुष्पस्ले शनेः का धप्टी + ,ऐः था पछुदृश | कुशश्प क्र। एकम्‌ पशाशत्‌ एकपशाझुत्‌ + शुकरस्प ४ज धप्त + पशाशत्‌ ' शप्तप्चाशत्‌ | थुधस्प कून नथ | दि. /तिः + एक मदिशतू | जत्र द्वितीयचततुर्षपदोषदे शाल्पू्दोक्तानि प्रदमततीय- तेरिति दोक्त'ं भवति कुदामोभ सथन्धिनों वापोरमिदतगतेएम्ल्या कप्पा घिसतभदा कददा गिपिद्श इति। मि शतत्रयम्‌। थि शश्स्त्रपघ्‌ ड़ पश्त 4 भष्वतिः 3 णत रूभप्य मदहोनाम घापनिएलयलिस्मटर भदलि येन व्पो!हच- “दक धिदुमपरानिरुष् धरातल » दृशभस्द्ेल दरशतक्रथाशोप्रोष्पोग्दे/न पराधोश्याए 6

श् -* गीसिक्रापादः

| आाचको बुच, शुक्र, मट्ठल,गुरु और शनि का युग आर चतुर्य पद्‌ में सन्‍्दृगतिं वशतः सन्दधृत्त इस शुक् के महल के ८६ बृहस्पति के ५, शनि का कु, शक्र, बुध, के शीघ्रोच्गति वशतः शीघ्रवृत्त हो पदु में शने के ५, गुर के ९3 सहूल के १९, शुरू ये ३.७४ पय्यंनत चलता है इस के ऊपर अबह वायु

मरझखि भखि फरख्खि चखस्ि णखि जरखिि फिष्ग शुचक्कि किप्च /एइलकि क्िग्र हक

हात्र लक प्र फू कलाचऊवपा: ९० 0

कला्घवपरः कलाटिसका अधव्या इहोफक्ता इतः लि द्विब्रिया हि जीवा ) चापाकारस्थ वृत्तमरिधिभा शेसासमस्तअ्येत्युरूपते तद्धंसर्धध्येत्युब्यते ) गो प्रायेण झपवहारः तस्मादिहा्थंत्रधाधदर्शन क्रिय चढिताः अतो गोलपादरुप चतुर्थिशलतिभागं चार्ष इत्ति प्रदर्शित भवति शाद्यजीवा भरिः इति पश्नु सि चत्तथिणल्य घिकगतद्यप््‌ ! एक्मन्याण्च बेदा डु का।। स्थफछि चन्द्रा्ट्र काः * किप्ण ग्रियसचन दूवः शुूय येदघड का: इस येदेंडियन्द्यः। फिय चिमनद भाहर नपरूद्राए सत पहुदुश 3 रूग फ्यदुः श्य भव रूझ एफेचय $ पघस सप्ताण्नयः द्वशवियनः ॥छछ कीयपा रहिता ट्वितीपश्या ।' चापद्रपोत्पञ्नीया भा शूतोष्जपा ? एव पा अपि झेपाः $ यद्यप्य्धेश्या शृत दद साजे यहुप मापतत्वादिद्ोपदुगः कृत इसि घोड धरिक्षानम्प जणाह।

पी में ऋचए सास घकार के चाथ 7 जग चट्ट भद््ट, परिषद फरार घरादेड,त इज धकार दा ऋतजड चाप? था हु.प शिनऊफेर ३२ होल दो अरतफा

श्ायंभटीये : १७ ३० थीं गौठिक्ना छा अप नीचे सिसे चकऋ द्वारा किया गया है ज्या-झापक चक्र

संस्या|.९ (४४६ | ७[८ (सप स्था कार हु स० २३२६४ | २२ [ श्र | ७०| २० [ए०एत | ५] ६३ संस्या [१४ [९६ | १६ | ९० | ६८।१८(२० |२२/२३ | 5४ |

हंस [घर (६१ ] ३७ [१३

दृशगीतिकासबत्रमिर्द भग्रहचरितं भपझूरे ज्ञात्वा ग्रहमगणपरिम्रमर्ण याति भिच्त्वा पर ब्रह्म ॥९१॥ भूमेप हाणाश्तु दरितं यस्मिन्द्शगी तिका सुत्रे सदशगी तिकासप्रभ ! भपन्ञरे सवा गोले झारपा। सपठ्नरमध्ये भूरुपछ्ठति ' चन्द्रादिसन्दान्ता ग्रहासस्य-

या पाइुमुर्स चएन्‍तो फ्योतिश्यव्रगत्यापरामिमुर्र खमन्ति सतत उपरिं प्रतोगलिएलीन॑ नद्यत्रमण्टण मपराभियुरय द्रमति + इत्यादि न्ञात्येल्पथ: स॑ ते गशितविदृयंदिय प्रषादियरितं ज्ात्वा प्रह्नछन्राणा गाय सिर्वां पर्र मर गष्ठति

[ति पारमेश्यरिकायां भटदीपिकार्या गीतिफापाद:प्रथमः। . भा०“पृथियोी छीर प्रष्टी का चरित जिस में पर्णित है? उस फो राशियक में अआपत जान फर, नक्तत्र चर में पुथियी झपस्धित है शोर चन्द्रमा सन्‍्दयह्‌ एंदि शपनी गति से प॒र्थ की झोर चतते हुए ण्यीतिश्चन्नः की गति भें प- तभिमुर भ्रमण फरते हूं हम फे ऊपर झप्नी गति से हीन सक्तउमण्शज

7मण फरता शा दीणए पहला है वशितत्ञ गण हस घफार ग्रह धादिको के रित फो जान कर पर प्रह्म को प्राप्त ऐले हैं ११४

हति शारप भटीये गीतिया पादः समाष्लः ५७ एपं एशगो सिकाल्मकेन मथम्पे नासी्ट्रिपसप शातमुपदिश्य दानों सम्पूलनन्रादा- गए पमप हालत प्रधन्धाग्सर प्रदर्शपणिए देवतानमस्क रफप्देतद्भिषान प्रतिजामनाति ईँ अहफकृशाशयघभणगरधिदःजगरुूफीणमभगणान्नमस्क्रम्य

आयमभरास्त्वहू निगद॒ति झसमपरेपभयर्ित ज्ानस पश्त अष्यभभिय्टनतश्यटाण्णस्फुष्य दा मएरे कर रमपरार सेदरिम्त देशे। पम्प दिये

/ मे ऋुगभपुरथामिभि पलित्र तटदातिष्ञानसाथतभत् लगद्भाद भटो निवदा ति

आयमभटोये वर्गस्समचतुरश्भः * फलज्च सहृशद्वुयस्य संवर्ग: :; यस्य चत्रप्नस्य क्षेत्रस्य चत्वारो याहयः परस्पर समास्स्युः कर्णाद्यध्च धपरं सम॑ भवेत्‌ तत्क्ेत्र (समचतुरश्रमित्युच्यते च्षेत्रविशेषो धरगसंशितो [लि। फलप्नू तस्मिन्‌ क्षेत्रे यत्द्ोत्रफलं भवति तद॒पि चर्गसंज्षितं भवति फलसमुदायस्य वर्गेसंज्ञा भवति | शअमीष्टक्षेत्रस्पान्तभोंगे हस्तमितेश्चतुमि- हुभिनिष्पल्नानि यानि समचतुरथ्राशि तानि क्षेत्रफलानोत्युज्यन्ते एवं होणवत्तादिश्षेत्रेप्षपि हस्तोम्मितचतुरश्रपरिकल्पनया जातानां चतुस्थस- (नां फलसंज्ञा भवतीति येद्यम्‌ सटृशद्वमसुप संवर्ग: सट्टशयोः परस्परतु- योस्संस्यपीरय सुसंदगः परस्परहतिस्स यर्गसंज्ञो भवति। स्वस्य स्वसंस्यया न॑ बर्गकर्मे त्युक्तं भवति उत्तराधेन घनमाए भा5-जिस “चतुभुंज क्षेत्र*के चारो भुजा एवं दोनों करण परस्पर समान हों, | “समचतुर॒स्त» छोत्र फहते हैं। ऐसे समचतुरस्त्र क्षेत्र का नाम “यरप्षीत्र० ' है। कऔीर इस के फल फा नाम यरंक्षेत्रफल होता है। सभान दो प्याओं के पररुपषए गशन को "संदग » कहते एँ २, शौर शाधी गोति- ! का अप हुआ सहशत्रयपंबगा घनस्तथा द्वादशाप्रस्स्पात्‌ सुल्यसंस्यात्रयस्य संग! परसुपरह्ठतिघेनम्रज्ञो! भवति।॥ स्वस्य स्वसंस्य- गुशितस्प पुनरणि स्वसंण्यया हनन घनकरम त्युक्तं भवति तथः द्वादशा- तेत्रपु पनर्स॑त्तं भवति एसद्क्त' भवति ! हस्तोन्मितिदेध्य थिस्तृतेश्ममचत प्रस्थ स्तस्भादे यंचा मृले सिपंगायतानि चत्वायंश्राणि भवन्ति सथाप त्यारि अपकथ्दंगतानि चत्वारि। एवं द्वादशभिस्श्रयुंतं क्ेत्रप्त पममंतं बतीधि शत्र घटूशद्रथभंयर्गस्सटूशब्रयसंयर्ग इत्यास्य]मेव बर्यकमों पनकर्म नमदृभि तम्‌ अस्माद्धिपेस्थोयतस्थिजु पररुक्त प्रक्रिपाग्तरं विलिस्पलेन 0? *समद्विपातः फृतिशष्यतेग्य रपाप्योग्स्ट्यथर्गों द्विगुतान्त्यनिष्नः *

* चत्रभ्धरि पिपाटो थे दिकः शतपष्ग्राध्मादिषु ड्ृश्ण्ते फ्यौतिषपम्धंष गिपलम्यते किम्मु चतुरस्गरिस्येष घाटों टृश्यते | यत्र थत्रास्मिन्‌ प्रर्पे-झस्द 'पामे छ्र* पत्रेपेत सत्र सधद्रायभेय द्हुक्ष या।

| तपा छी 428१ छीलावश्याम्‌

२० गीतिकरापादु) # स्थस्वीपरिप्टाध तथापरेण्ट्रास्ट्यल्कान्त्यमुत्गार्य पुनस्थ रागि३।' इति वर्गकर्म "“समाश्रिघातरच घनः प्रदिष्टः स्थाप्यो घनोडन्त्यरुप तती#न्त्यदा' आदितिनिपघूमए्त आदिवगेल्भपन्‍ल्याएतोग्यादिघनश्च से स्थानास्तरत्वैन युतता घनः स्यात प्रफरप्य तत्सगएपुगं ततोग्यदे। एवं मुहुरवर्नंघनमणिह्या जआाद्यद्भुतों वा विधिरेंष फायः | इति घनकम धान्त्यानि तत्काशस्था पितथनस्य सूलादीस्यस्व्यस्थार आदिस्तस्याद्भतमेरुमेव 'स्थानम्‌ सप्ठसु गनादिसप्मविन्यस्त ते न्‍्यस्तमन्त्यसयष्ट व्वु झन्‍्यतू शन्यत्र प्रफल्‍्प्येत्ययेः॥ भिल्नयर्ग “ज्ंशकृती भक्तार्या लेदजवर्गण मिलवर्गफराम्‌ अंशस्य घन विभजेच्द्देद्स्य घनेन घनफल मिल ५५ डत्याभ्यां लगफलघनफजले फरूप्ये दगम्नससाए समान सीन संख्याक्ों के परस्पर गशन को “घन” कहते हैं एवं शास्त्र छ्ेत्र (१९ कोण का ) का सास भी “घनकझ्षेत्र” हैं ॥.

०० जा. 3. 2-4 भाग हरेद्वर्गान्लित्यं ट्विगुणेन वर्गंमू लेन | आर 5 ३5 पु बगांदृग शुद्ध लब्ध रथानान्तर सूलम्‌ ॥४॥ | १02 4 ल्ोजस्याना नियगे पंशिता निःयु प्मल्‍्थानान्यवर्ग संजषितामिन्त्यादग॑._ बच चयये विशोधयेतू' शुह्॒स्य तस्य यगेस्य मूलभेफत्र संस्थापयेत्‌ पुनस्वरग थक संस्थाप्यपृथदस्पेन तेन द्विगुणतेन नूलारुपेन फर्लेन शुद्ध समवयेस्थानंविभज्य लब्धणलस्य वर्गेशु विहतस्पानस्यादिभूताद्वगे शोध्यपुनस्तत्फरल मूलाएय पृथेस्थधापितमूजफलस्थादित्वेन पहूक्त योर

पुनसुतया मृलपददुक्तूया पृथदस्थया द्विगणितया शद्॒वगस्थानस्यादि

झरूथानंघिभदय सन्न लब्यस्प फलस्प समशरी < ४! गदर्गस्थानादिशोध्यतत्फलमपि भुलपटडक्ती स्थापएयेतशपनरप्येयं * नायसानण सत्र द्वष्टा सूरापदूक्तिमृंजमेय। सदा यिभज्यम यदि तब भयेत्‌ दा शून्य सृरूपट्री संस्थाष्य पुनरन्पद्यगेस्थान दिभजीदित्यपः। दा पत्स्थान एियते तद॒र तस्यान्त्यस्थासाईन तस्यावयवर्भू तानीधिरर्री

आयभटोये | श्र्‌ व्यं स्थानान्तरे तत्तल्लब्धं स्थानान्तरत्येन पड क्तूयां स्थाप्यमित्यथः ए्नमूलमाह भा?- इकाई के स्पान से झारम्भ करफे प्त्येफ दूसरे खट्टे ऊपर एफ विन्दु वखो, इस प्रकार प्रो राशि फई अंशों में घंट जावेगी, इन अंशों फी संस्या | घर भूल के झट्टों फी संख्या जानी जायगी। घांद घोर फ॑ पहिले अंश में से ग्ैन सी सब से यहो संए्या फा वर्ग घट सकता है, उसे निर्णय फरो वही घ- मूल फा पद्विणा अष्टू दोगा, उस को भाग को तरह दी हुई संख्या की दा- हनी प्रोर लिखो झरर उस के यगे फो उसी बांदे ओर के अंश में से घटा- प्रो फिर घाकी पर दृसरे अंश अधोत्‌ झआगेके दो अट्ड्रों फो उतारों ।॥ इस प्र- णर जो दो राशि वनगों उन फो भाज्य » सानो झौर उस भाजय के दा- छ्विने फे एक झट्ट्ू को छोड़ फर उस सें पहिली घगंमूल संप्या के दूने का भा- गे दो शीर भागफल फो उसी मूल को दाहिनी ओर भाजफ फी दा- हिनी और लिखो फिर उस माजफ फो सूल फे शेप शद्भ से गुणा फरफे गु- एन फल फो भाजप में से चटायो + फिर शरीर श्ौर सथ झंशें को उतार कर पद्टिल को तरह फाय करो। डदाहरण+- २२०६ का यगमूल यताओ | २२०८ ( ४७ १६ ८9) ६० ह्ण्ल

यहां पद्धिला अंश २२ है पथ से घष्टी भंस्या के यगे १६६ फो २२ भें भे अटा भफ्ले ऐं+ इस लिये हो धर्गमुल फा पहिला झड़ ऐोगा। पछिले घंध श२ में से ९६ घटाने से शेष रए टूसरा रंश ८० फो को दाएनी झोर छतारने से ६०९ हुए ६८८ हे को डोष्ट देने से ६० रहे ६० में भूल के शन हू के दूने श्घोत्‌ का भाग देने से भागपा 3 हुछा 9 को के दाष्टि- मो झोर फे दादिणे लिखो। किर ८३को 3 सेगुदा करके गुएन पल ६८ में से घटाने से धाझी कद नहीं रषटा; इस लिए ४१ इृष्ट दर्घघत्व इृदा ६४६

श्र गीतिकापादः >> मम अचघनादु्जेड्द्वितोयाव्‌ त्रिगुणन चनस्थ मूलवगेण

चर्म स्त्रिपरवंगेणितशुशोध्यः घमादुघननन्‍च चनाव ॥*

अथमस्थान घनसंज्षम्‌ | पद्वितीयतुतीये अघनर्े चतये पनपण

चज्ञमपष्ठे अघनसंत्षे एवसन्यान्यपि स्थानान्‍्यक्तक्रसादिययानि ' बरगद भागो घनविभागश्च यक्तिसिहुत्वाद्हस्चारयणानुपदिष्ट अन्‍्त्यादुधरसए यथालब्घ घने विशोधयेत्‌ पनस्तसुम मलमेकत्र संस्थाप्प चुनस्‍्तदुपः चर्गीकृत्य जिमिश्च 'निहत्प तेन शद्गघनस्थानस्या दि भू दीयाद्वामगाद्घनस्थानात्फल विभजैत द्वितीयमघनस्थाते विभनेदिं तत्र लब्चे फल घर्गेकृत्य फ्लिभिश्व निहत्य पूर्वेस्था पितेन सलफलेन घ॑ रु वविहतस्थानस्यादिभ, तात्प्रथमाप्यादयनस्थानादिशीध्य तस्प फलस्य शहराणराएदिभ, सादुघस्थानादविशोध्यपुनस्तत्क्ल चनमलाएय पूरे घने मलाप्यफलस्पादिस्याने पट्टिरूपेशस्थापयेत्‌ पनमलपड: क्या

धस्यया वर्गीकृतया क्िभिश्च 'निहतया श्‌ द्रुघनसयादिमभ,

उय लद््ध फल बर्गक्त्य जजिभिश्य निहल्य पूर्वेस्थापितमूलपड, क्त््या झ्त्य फवहतस्यानस्पादिभूतात्मपमास्याद्पनस्थानादिशोए फलर हुश्थानस्पादिभ, तादूघस्थानाद्विशोध्य.. ततफल चघअनमलाए्य पदितपनपट्टी स्थापयेत्‌ चनरप्येव क्यो द्यावत्श्यानावसान सत्र चद्धिपनमुलफर्ल भदति भिन्‍नेपु तु ' अंशयनमलरणशी खनमूरं खेद डल्यनेन येद्यम तथा मिलयगेसले जिगुणेन घनस्य भरंयंगण * केन ' एपं प्रथम सनभोधनमभिएिति भयति 'यगमूलू द्विगशेन एंटेद्टियनेंन प्रथम बर्गशोधन भयति घनकर्म लीफिफे गणित जत्‌ फालक्िपागोलयोः प्िभज्शी प्रस्प फर्ल पुथाधनाए

आऋ०४-दफाइ झथान शे शारम्म करफ प्तरपंफ तीसरे घट कऊप

पधनद्‌ रहाश फर शामि फो कई एफ अंशों मे योट खो, यह अंगर्मए

ले की सट्टमए्या होगी

रेआोरफक चिसे कंश ने जिग यही से यो गंण्या का घन करता हो दस को भार की सेति के धमगार दी झुइ राशि की दा

लिफो पी ऑप्या पट चससत्र का चदिलणा शद्ट दोगी पदिने

आयेभटीये ९३ उमूलॉग के घन फो घटाओो और अन्तरफल पर यार वाले दूमरे अंग को तारो आर इसे “भाज्य” समको

घुनः लब्ध सूलांश के वग के तिगुने की “जांच भाजझ” समकतों। भाक्य ' पिछले दो झड्डे) को छोड़कर उस में »जोच भाजक” का भाग देंने से मूल दूसरा अट्टू सिल जावेगा मृत में जो दो अट्टू ( या कई शड्ढ ) अभी मिले हैं, उन को से गुणा रो और गुणन फल को नये मूलाडू के ( जो जांच भाजक द्वारा निश्चय हु- है ) घांदई ओर रक्‍्खो, फिर इस राशि को नये मूलाडू से गुणा करो झौर एणल फल फी “जांच भाभकु” के नोचे दो अंक दारिनी जोर रक्सो झौर इन को जोड़ी, श्रय यही योगफल असल भाजक होगा + “ख़सल भाजफ को उस के शेप शक से गुणा करो श्र गुणन फल को भय से मे घटरणी। फिर शन्तरफल पर पास वाले दृसुरे शंश को उतारी इस प्रफार जब त्क सब अंग उतार लिये जांय, सथ तक ऊपर लिखसो हुई रोति के अनुभार कार्य फरोः- उदाहरण--४२८७३ का धनमूल निकालो +

चाचभाजक झ्ल्रे ४२८७३ (३५ हा ९५०८५--४५४ 92९२9 अणखभाशफ (३ नर

३१९७५२८१८१४८७२ ६५ शृष्ट घनमूल हुआ ५2> >शरीरं ०.6 बन्रिभुजस्थ फरछ शरीर समद्लकोटीभजाघेंसब रे: | विभुशरण हे श्रस्प या समदलकीटी | लम्ध इत्यथा। व्िभजस्पाथोंगतो अजो भूमिरित्यच्यते रष्चकोखाद्भम्पस्स सयलब्धसत्र लम्य इत्यूयले | ल- « स्थस्योभपपाहयशतले ये व्रिभशदले जिफोरहूप सयोगरय लम्ध एक एवं कोटि- | प्रयास 4 सरमात्यमदलकोटोत्यवस्यल स्रयहषः कोल्या भजा सत्यदाइवदतों भर श्रशहस्स्पात्‌ झतो भजयोरध्य भम्पथ भवाति $ भग्पऐडम्प्रयोस्मंद्मिय्थम «

ञ्ह

ऊ्तेद्रफल भर्वात पनस्य दिलृत्षसुथ

चर

| गीसलिकापादः भा ज़िभजततेंत्र छो जो दो तुल्य दल (णहुमाग) पोर्ट !ज के सअर्धीगत भुजा फी भूमि ( आझाधार ) फहते अचार तब जी-लम्ब सत्र उसे » सम्ब » कहते शो लम्य से गुणन फरने पर-गशानफल विभुज धीरे इवें आ्राधीगीतिका क्षय इआ ऊध्व मुजातत्संबर्गार्थ से घनप्पर्डा

ऊष्चभू जा लेत्रभध्योच्छायः | तदिति ह्वोन्रफलर फ़लस्य संबर्गाथा यत्‌ स॒ घनः+घनपाले भवतिश से ' बाल पदुबाहभ वति सर्वेतस्त्रिफोण दोत्रमित्यर्थः पुजयोगोगसतदुन्तरगुणो भू वाहतो लब्ध्या द्विस्था तयोस्स्‍्याताम्‌ स्वायाधाभ जकूल्योरन्तरमूर्ल प्रजायर यक्तया तल्सिध्यति + य॒त्तिस्त शीलावतीण्याख्याय चयवेगोन्तरपद्मत्रोध्वेघाहुर्भ वति वृत्त्षेत्रफल पू्यों

झशदुध्वंभुजा ( छत ,फे बीच का ऊच्छाय ) #॑ का जो शहुंभाग-बह “घन होता है | अपोत्‌ वह छोश्न हु” छ्लोता है। झथवा यों सममो कि चह सब ओर से

समपरिणाहस्थार्थ' विष्कम्माधहतरे समपरिंणहरुूय सरमशत्तत्े त्रपरियेरथ पिप्कम्भाये चत्तदेत्रफलानपने ध्यभेष मफारस्मक्ष्म इत्पेवशदव्देम प्र ओनत्रस्प फलमपरा्धनाए दि समवृत्त क्षेत्र के परिधि के आधे की व्यास के रने पर गुजनफल खूत्तत्षेत्र का फल होगा०५६ एयं आर्थी तबन्निजमूछन हत॑ घनमोल्फल निर शझत्ममपृत्तधोत्रफल निशमुलेन स्वफोयमलेन छत श्यग्रेपं स्फद्सिट्यधथर थिपमचतुस्कादीयासन्तःफर्य योर

अरशधदटदपघला/रणं हंशफलसू्गद

आर उक्त गसपतक्ष दाव्वफान फो ब्यफोय भलसे अब शसोनरूज दरोगा 3

आयासगणे पार्च सम्मोगरते स्थपत)

आयेभटीये- २५ आयामो सम्य-। लेन गुणिते पाश्ये भूवदुने | भुमिमुसप्लेत्यपः | भूवद्नाभ्पां हते सम्धे भव्रदनयोपोगिन हते ये लब्धे ते पातरेखें भवतः। करणयोस्स॑- दुरभम्यन्तो लम्यभागध्तया कर्णेपोस्संपातान्मुखान्तो लम्यभागश्रेत्यथेः | सत्र खड्ध भूमिकेयोगपोरन्तराल भुखतो लब्ध॑ मुखफणेपोगयोरन्तरा- आपामे लम्बे विस्तरपोगार्थन भूमिमुसयोगो गार्धन गुणिते छ्ेत्रफर्ण भवति। छेपम्‌१ समलम्यक्षेत्रेयं विधि: नतु यिषसलम्धे तत्र चेल्लस्थपोः फल- परिणश्दीत इति सन्देहस्स्पात्‌ उद्देशकेन यदि समलम्धो नोट्िश्पते तदा प्रानलम्धस्प चतुर्भशस्य मुखोनभूरमि परिकष्प भूमि शुजी शुक्री अ्यक्षप- गच्पे तस्पावर्धेलेम्पमितिस्ततकातघाधयोना चतरअ्रममिः | सहम्यधगफ्यपद ध्यात्‌।समानलम्धे लघ॒ुदोपकुपोयान्मुसान्यदोस्खं युतिरज्पिका स्पात्‌। इत्य- चमशम्पसत्कर्य तत्सम्भघा वेद्याः उक्तानक्तणेत्राणां सर्थेपां फलानपन चनाए भा०-शम्प से दोनों भुजाओों को घुशन करो, गुणन फल को आयाधा

ह) फे योग से भाग दो, तो भागफल स्थपातरेखा ह्वीगी अधात्‌ फरणाप्रित + सम्पात रेखा होगी उस पातरेखा को लम्यरेखा|से मुणन फर गुणन

आयाम छोत्र फा फल होगा ८॥ ४2५

सवंपा क्षेत्राणां प्रसाध्य पाश्य फल तदभ्यासः उक्तामामनुक्तानाप्ठ छ्षेत्राणं पाए्वे प्रधाध्य शायागयिस्तारास्मफी याटू छिये उपपत्त्या निश्चित्प तयोरभ्पाप्ठः करतेश्यः सत्‌ छेत्रफल भवति सम- रप्नस्प तदुपनस्य पाणश्वेयोस्स्‍्प्टत्थाज प्रशाधनम्‌ ! व्यश्रस्प लम्य शायामः उप्रतभूम्प्धं बिस्तारः घनगोलेएपि दत्तरलस्प मूलमुच्छायः | पिपमचतुर्रे जम्ये लम्य श्ायामः। भवदुनयोगार्थ' पिस्तारः। रविषमचतरशे दिपम एक कंणमर्मि प्रकलप्प तत्पाश्येगतयोरिरकोणयोलेम्धद्वघभानपेस्‌ | सत्र पद्ध॑येफ्ममापामः फर्णास्यभम्पर्थें विस्तारः। एवं सर्वत्र स्थधिया पिस्‍्ता- पामी परिकएप्पी कालक्रिपागोलोपयोगरद्दधितानां गणितानां प्रतिपादन सक्मूकमिति वेचम्‌ समदघपरिधी व्यावाधेतुस्य्याप्रदेशश्ानमपराधिसाद: भा-जिन सेत्रों का यर्णन यहां किया गय्रा टै एवं शिन-फा. दणन यहां में हुआ है ऐसे सथ क्षेत्रों. फे दोनों भजाओंं को उपपत्ति से निधय करे, नों छा अम्पापत फरना चाहिये.सदत्तेत्रों का फल जात दशा फरेगा पारचण्पड्भागज्या एवष्कम्भाघन सा त्तत्या €॥ परिधेष्पष्ठभायस्प राशिह्ययस्थ या झोणा सा थिप्फप्भायन व्याताएन सुन्या

ष्ट

झायभटीये+ २७9 समस्लण्यें ते गोलपादस्याद्यन्तभागयोः दीघाल्पपोस्तु यी भेददी याहरीः फोट्पोस्तधाच यः सद़॒गैक्पपदूं सध्यभागरय जया समस्तत्पा समस्लज्यात्रयस्यात्र सास्यात्‌ खणशन्रयं समस्‌ व्यासाधाघेमिता तस्मादेकतज्येति निश्वितम्‌ ते जवेवापरिफएपनायां युक्तिप्रकारं दर्शयति भा०-दो अयगुत (२०८०) परिमित व्यास की शासल परिधि का परिसाण ८३९२ है। अरधांत्‌ ६१ ३, १४१६ थे गुणीश्र हुए। इसी प्रकार प्रराशिफ द्वारा[इससे नाधिफ परिमिति ध्यास के रझासल परिधि का परिमाण समकना चाहियेशशा समकृत्तपाराधपाद एछन्‍्दातातन्रभुजाबूतुभुजाइूव समाचापज्याधान त्तु प्प्कम्भाघ यथप्टान १९७ समयृत्तश्प परिधिपाद॑ टिन्द्यात्‌। यक्तिपरिफल्पिताभी रेखामिशछिन्या- त्पधः। सत्र जासात्व्रिभज्ञात्णेत्रात्फानिधिजुज्पाधानि मिध्यन्ति। त्रिभशस्याश्र- शात्मिध्यन्तीत्पर्थः शझन्पानि तत्र जातायतर्भ शात्छेत्रात्सिष्पन्ति घतर्भशा- (यशारिहिध्पन्तीत्थर्थ: समचापज्याधं।नि परस्पर एसानामर्धयापानां ज्या- एरनीत्यथेः थिप्कम्ताथ' सिद्दे सत्यन्यानि सिध्यन्तीत्यथः। यपेष्टानि ।गीलि- गप्तक्तानां चतुतिशत्पर्धजीयानाग्म्ध्ये यानीष्रानि सानि मिच्यन्ति सर्वाशि पेध्पन्ती त्यर्ः एवं पिरदज्याधानि सिध्यान्ति सानि पूर्वपूर्वद्दीनानि गय्या- गीनि भदन्ति अध्रोच्यते॥ शत्तेशो धनुराफारस्समस्सधमरुष्यते तम्पाथट्टपगा जीया सभस्वत्या च॒ सरप स्पा अधमिदादज्या सच्चापाधप तहनुः ॥॥ दोःकोटिशीये स्वर्धल्ये णदा सड़नुपी रूपा गतगम्तध्यभागी हि दोः्कोटो दृत्तपादके शजज्पे दिप्मुद्रयुग्गान्ते चे्टट्सांशकाएसः ते शपेज्यापात्परिध्यन्त शदुत्झमदुफों भरत दोकीटपोरेक्टीना दिझोीवा स्पादितरोत्तसः छपन्पोत्कमवर्गश्दपद हट्नपी भयत्‌ भमस्प््या सद४८ लत हच्च/एाघ इघधरांदका छर्पेतिशनगभस्ताएं भज्ा भष्ययप८ भदवार्‌पष्॥

के ३७०२३ ६४४४ 705: 75७.: ध्बे 4:38 3 ४7७ ४७४७७३२ 229६ ७४७६३३४७७१४७

-४घश२2२30७३ 4955] 22७२ शछ:१४ 390४ उहै5५5६३५४७ )४०-॥३४१७१११४७७ शर५5]७४2७ 0-७४ 95४१३३ 8४७४ श०७७४७ ३>0७:५४ 3३ ६]७४००४-४०४७ 30४ ३७४५७ 428 उछ0ज्ज वसा पर ४४४ ह0७008%७ ४7७9७ ॥0७७ ॥0309 # ४३४२ 30९.०४8 98 30029040302 हैए७५४७३७४छ३०७४२:७ शुक्त;% .. 8४9४७ 25३०६ +थ -फहा६ ॥5]4] 02 व80 32002 | ४2)४७४8] 35)0005909॥ 90 :9४०१॥४४४३॥५ १)॥79 4 #ट]0+छ8॥ ॥9॥9 ४७]१32७१४ 82७०0: ३.६७४४२४७ ६४0४७ 20:898; जिछछुत ग्या22७ 95 %३७७8३ :270:0२७ डक .0005%०३३ १872४ "0० 8000090:38७ 2४३२४ 5)9805४॥७४७/ 2४४० १॥८४७०७२।४४४) ४9% ४६॥॥०७४७२॥॥७००२॥४७६४०)४४०१४६ ४४४ ॥५)0208 7७7-24॥००७३]॥७: चाय: ७5३292३४१४३ ४६३१७॥४४३४४७)४६)१५२॥७:७७२४६१७६३)))२१४ धरे ॥:9फ: २०-०0 00७/0२ ५२४७३] ५७२॥४५३७)७ 2॥28) ४१४/१)२३७ ४३५४७४७ ७५ /8]88700 १३॥६५७४०४॥ 2 ॥<॥0300:00॥0>)9 ॥2 5४ ५0702॥202562] 90७७७१|०)>हि३फे ॥०0छओ]॥७ ॥४५७४४ 0॥७२)७ 2७ ७)२)० |७७)१७ 890८ ५)७०)४ ७०३))१४: छ8%|003% ७४६)॥७४ 2१७४ ३8% 28 209 0४४६ हु 0४४ 'ह ल्‍2)0808॥ है; ऐप) 398 ॥02)४ ७७७ ३७४ 2408 2४५२७ (०२०८) ४०७७ ४०४४७ 8) २॥४००३३४ 000202%२)४१४१४ ।टे 99989 है एु३३२१४२ 222220000७ ७४७ ४४39४ १20५08 3६00७२४॥००।३४छ ॥3०९+३४७ 9० ४03 ४%७४ 00/029 ५३ के ४3७४> पेंच गए २98 ३४ 30७३१ भ।ए४ा०20३३१७9४९ ऐ. (५७8 >पए[ए१०७

+ ऋम्णड 5.28 ४३९) ४45: 7२२

[8 258 है ये 3 3:७४ धार (८४ धककनात कट मतितणएाा घ७६४ 3.3457॥% ॥2 उज्ञेगफ बेकार ६६ 4 :४००३४ 44539538+ $४33 9१: ४४ ४७३४. ॥रछका5७ ७३४४६ 30७३ 407030 2.04 ४१33

4 ॥१798% 24.[7542 ४2]१७ 390२ (४३: 2%88:0४7388९) #%४६ ॥२०४:०१॥४ शाप 30:2] ७७५७ ६॥४१७३ 2:7४ २४७ १0007

4.33. ५४/2४0फ)। 020]98 98२७२) 3४७२७७) ६४४७०) 3१०७ घट फएट०३ 25 # ॥2829३)२०२४ 3290%59४)३) ३३ ॥239)0) 2-५७) 20००३) 25 )28 ॥४७७०३२३)३०४३) 9०॥)०४४७]३॥४७३७४ ्शरेण्य 8)3022)928॥09४79७ ॥७४३१)४७१५ ०08)। ४) ४४0७0 [थे 50॥8॥:५७७२) (शत काका ३)४9%8%30308)229922) ४४ /22७]:204):23:909(:)45 कु थयूएारे अपर: 62420 २७००३४७४.७७/२३४७७३४१४), ९(मै00 3२४ 297900७58 23) २)४७ 205] -८) ॥%॥३ १033) अ्रष्रथहिएशुव०४१फ एफ फिकियो ४५३) 0)॥5 ॥9३॥0३)०३। ५8988 पोपउ७ अषरफकयु ४092% रे] है।०५७४ ( ्शल समर: मेअधापरे 720 अतीत कै। 20७३ ४७)३२१४४५)१) हैँ ४३) ९)४७। शिशु ७४२७ ४७0:॥५) ६:७। :83॥00) :। 30 20 98] 07% 3३४४७ 97 ६च2:2४ १२७. % ४७:

3॥02]०७/>४ ॥॥8७७॥॥३८८७५:७३)७४४॥२९

॥#ि्डे७ ॥७४२२१॥०५४ [06802 993]

# ३१७ ४६४ ३५४ 805 (४४ ॥६ (5४७

थी (धिडम) 2288 ४8 8 ०७७ १8% है; डे 2) २३

2४ (08) ॥४७३६ १४ ॥% १४००७) ।३० ३३ ॥:0६ 88 ४९ ॥३२)७-

, 2४६० ४0७७४ दि.5992%७]2)0 :३॥४) 34७

2७७ 7४४१2 ९९७१६ डेप रे अ0०४४२) 30

७४) ॥#0७२९]७ ; ४५ है027323५ ॥४2३]5)५४७ +७॥०४)६)॥ :294%2) [६

फ्र

अरे )१ 8 2४०७७) १११४१६0४७॥५४७:४२: 4$५4% 25 73७१७७४ 3३ 7५४४७ ३५७७४: 3 27:0७ 89852५१ 2.0.0%/2४॥ ४३६१४

मे सछ:४३३३२३॥७७ 49४5॥ 7420७३ ६७२५४ 3 एए: 4805४5२५७ ७७-५३) पा: मे कणड]७३४३७ ॥:४४४७)४२३ झट०७क इ2(१: शा एृधाफ्या३ 399 ३९४४ 30॥ 28009 2७ २४

3 ब:४७ 200%0532 2४5/७३७).७४ 2392 ४७ 20502%8 423]8 ४५०४०. 82.७५४१७४२४७०७३३॥४१५।५)६ |] 7 समर मे >पक 28|0 2४ 30009 223758॥ 20॥0005300] | एफ ४३ ७:४७ 9७४७७ ॥६॥॥9 $2)08७॥४७ 8००७ ७०१०१४५२४७ ४0७ >208७ ४॥१३४७४ :०००३३०००७] 8)7:०४०७ 29॥ 00॥9५0४2] २०० १४१४१॥७४॥४३७७ ३४३०४ ४2] 0४१०६७४७४७ 90०८७: 3७॥४०2)४। 2:)032२30032/020542॥6 5४४ ॥00253 :४४२१॥; 20४953७55 ॥22)४८५०] 8॥005%७)१६११५०२१६५३४२१४१७६३॥७१४: -७००७७१४५३॥४६ १३७४४४४६)४२३))०५३)४७ 72228] 20/02४ 0३६ 3३ ॥&507% 09000५%३४७॥ ४७॥0॥७०४७॥१०) 72 90/0+ 59%) 50६2252%॥ 90/3]»]0॥>/ ॥०श)७ 3७५४७ ॥09290 2७ /)28)7 29205 830८ 000 8४७/१४४ ७४६)३३६ 30५४ १8.8 25 208 (६ ३४ "है 8 220 8५ 003७२)४ 3७ 008४ ४०७ ३७४ 8905 ॥205२॥४ (०२०९) /४१४ ३३ ॥0)0६% 2४५०७७३)६ १030:02५२॥७) मास था] पु एन करेााार 222५२ + 9४४४ |2६३०७ 729:908 5303%/25॥: 2०2४२४७ 7:8 ४३ ४१४४८७॥६ 2४/ कक 8७फे फल :ही।ए 9॥ १४ खिएुत घ७७५॥४7203230/8॥0४ % 72

प्टे >हाएकएछ

4 ४392%00: ४७३३ 2॥७ ४०%30:30505

मि 02050 24408 7000 3 यह 7४४ सह? ७०५ 2७४३४ है छड़ेडभपिशपय

7 सीता: ३३४ छैड |

९७३४६ ६००७७०५॥ 8 ४-४-))००१ ४२१४४ ॥8७७७४०९७४ ७5७ ॥0७७७:॥६ फ्रश5

४०७७४ 3३)29)॥०3६ 6:2)8 :छमरे एफ 0५७४४३३8३।४ ६७ ०७७०४] च्ता३ररे

4 3७१ ३४४६७१७४१०३]४ १2४० ६२६४४ /5038302 हब 22७३

5 मकर 3 हे *.

पचुशिषकमय) परिक005 32]%8 ४७७४७३०॥००३ :8-230४॥2)%)0५४०४:५८७८ 3232 छक्षंण/ 22७) ४४२३३७७२४७)॥४७४४ ४. ७४३8)20 |975928 इथ३3: 9 ९॥४ | 2५४3 ७६8 [श0 ७४७))०४०७७३ ३२७७२७४ ,धए+॥ ।टे]8 05% ३920 ))४०४४१४॥0000:0220२९३ ४। 805४४४०१७४ए७६ ३) ३00)॥8 2 ्शृकाोकाहुईे 22२४ 52520 :७ु०३३७७०॥४७॥२स्‍७६७)७)५११६४१॥०२३१३) शिशिगमामेपे 20१०४४४७॥७)२३)७ 235] 822॥ 200॥2 १४39305फ३टे शहएग:४४ १३:४४ ५फी 2५३)४ 9४5४ ॥099309]9%9 पल ए४६ ४2४६ 82% 2४१8॥४२७४७ 22७०४ है] है) ७०७४४ ७8२०३४०७४ पी मथे/ )३)४३७४३ ॥२% 532) हे अरेफ रे श०२१०००)२)४७ 2302 2 ;8 8४2४६) 7३४२२ ४॥:./5) ॥00॥ 30002) 9 :५४॥)७।४ ४शोशकुररी2827 84942 ॥॥१98/)॥0६8४४७ ७॥६ ९४१७)२४२७ ०४ >20>]०/>४ ॥.७७-॥॥:३७८५५:०।२)०६०४६७ ॥79#0%छ है ॥0७१2२१।४। है ॥0680७/25 ५85॥% 98: »॥ ४५ ३3४9 ३७४ ॥8208 १90७ ३६ (33०७5 ४४)] ॥७॥ [%) 39१४ 25 8 0०७ १४४ | है; १४४३ 20290 १५ 80७६ ४७

2 2४ (08) ३०१० ४६ ।९४ 3270000 (|; ॥00६ 20७ ४६ 030)0-०७ शुरु ७४१४४ ॥09029७]2% :29७)॥9 .9॥0#92फ%७)॥9

भ]० +2#४४ ६९४०) 8४0२४ मरओ, 9005४) ॥02७329॥0 30) , ॥72(॥220 ; १३४०७४2/23]६ :॥2]]5)+09 30078 ]40 38)00६

;49%2 (६ डे

४0४३9४2७३ 9७५४३)७४४३२ ६६८७५ ३४००॥॥४३ ॥045:75] 4२२७२:

११9:४ 38:5895%2४४७ 3

छ४७७१७३७२७ 2०४४४ ०५) ६१४५

3 ह४35७४ ॥2५४:ऐ 2] ३७॥७०४०७४७

40४ ३४४४2 9७ ७७७० श्सुर्यर

529 ह09003० 06095] 08 ॥०)३

कडोरे 4050२४७ /388 205200932

3 ॥2209-9/22503209222५03:0% 4)57]3 2 ... सुण्थ७ अप 52) "फट ॥2]29828 398 ४2४०७) ॥६)॥0४४॥५७॥ [0 7902१॥:४७७॥ 29 प]039 ॥2]8 294७0 8३७७७०४ ४४०४ 22] 99७ ॥७॥७७8॥ नशु३९६ १34820 | :9029:७७७8॥ ४६)॥४७४७७ 28] 70॥9५०७] 5१७४ 3७40005005799 ३०३२४ ॥६)0005४॥७४७७ ४३४२३४०४७४२३ ७४७ 2६20७४०७॥ ॥८)०७9269२७ ६॥२१६॥०8 ४७ ॥:)॥0०७ +४००१०४०७४२) ४५ 2247६॥४१६॥ ४२३४४) ४६३१७१४८)52)05]92%8 ४६२१४६॥७६३१।२१)६ १४४२ :७४'

-१०४३॥६॥७॥०२ ३३७॥२४२३ ५३० ७५५३० 227290 ३१७/७)१)७ 273५७४४७7

३४ 32380 080५७५०७] 3 ॥2]]8)08७)॥>४४:

॥90छओ)७७ 4४५४७७ ॥39२2) 3७ ॥५२)७ ४29४ ६४ 93%: 32) ४0५ ५३))४४ छे9%(00% ५४६॥॥३७8७ 2१५४ ३9% 28 90५ ७४५ ३६ ३0॥३ 'है 8 72080 है; देह 2७/४२)४ 9 /)२३७ ४७४॥७ ३४० 8)75 300 २४५ (०२०४) ४५७ ३४-५०४४

हम ४ए१३)०६ ॥00४४2५रे] ०१४१४ ॥३ :४श 8 2६०३५०१॥७)२ 3०४३) ७५६५४४७० 9७४ ॥४६४०४५ १२)१३)8 8६७२१६॥॥:६)-३४७ 4७5३४४७ 39५ #उस्‍सफे5४ 223९7 + मई #७+े एम पी ०8 ४५ मिक0३ 94 घ॥०१४४३१४३४१०१३४७ 8 (९४२७७ "हुए एतार

ह#४म गिल] ीप७०222722:9 4 35 अःमथ 0७० 05 ५॥09 १0:३७ नि &722]020:0024& 0६४ 29407332]0:98॥0 2:2॥2॥5 )७॥०४- %७ 4 20005 29927 5 ४8% ७७२४ ४७ ४०४४ 5६)७॥05% ॥७ ॥5%& ४८% ॥9009 0४:87 [६६४४१७४०२४०-७४७ #करे॥य विजय २3४८ एश्ड्िएम सिम 4 कलर. प्णरे]0॥७७ - 9हए. 0०% ॥00४७ १०५६ हरित पिशामन शिया मफरपुरिय+. आह४,. ॥0२॥ ७४२४४४३)४४३ को 4 20 309,- 8208, १४88६ मारे. 2.0५ 290 2]90 - एएफ 28 धु०४०९३००)०४५ ६६ रुक्रा+. [शत छ:५5७०2७५७ 4%४७ 720%95) छफुए% ;४३)8 099४5 ॥200232॥2४॥७:) ४० 0000900408)0॥5#6]... 0.2४ ४६ उश]घछतरे४ ब्गा्]) #ण, भरत (४ 23१ |& [७२१० 8॥0॥0. [६ ६८॥8]8४॥2 पशच७ १ै]४२३0४०१७)४४ट: 08] | 00899 ३०७०७ ०७७). एफ. (थ्वारेए ९५४8४ ६४४४०१०४॥६)५७४०७५३ ३४४४४४ 3७702% ॥0७2४7॥४५४ कक हरे थकरकाए.क कण४ 8 किि७७२७:०४४६३३ ६४०२४ ै8)8 (४७ गए ३४०७०७ ७७ गुर ३)४3१8 008० ॥: 8२७४३ 9) ४४३ ४0७) इतता।१५ हि 0७४७७ 5002॥5805]. ।)% ॥0]0४७ ३०४] ०७४४६ इनक ४०) कफे 8 हा हुमे४. ॥0825॥09॥039 .. िरै॥००७७)४४७३७ 590॥20%) 2४ ४9५४४४०-२६॥३-)४७॥2९७४२॥७॥०)३)७३॥०२४०. ॥४५॥॥>४७३)२॥५४-१७ 00% श्ण्थु 29७ ४3002) ॥५॥४७ [2432052७४००)२७ ६०४ ॥२2॥20६ १६-2७ 9 99039020 )200% ६४॥03॥२ ॥६०४४४२ 32% ॥५)५0७७४ 30२३७. १२७॥2७५४ 920४००७४७ 0290 2४ ४१६॥४ (६२४20: (६0७७७०४ 20२४४ ॥29 | ,वै0[डे 0४% ॥8]88 8५४४३ )४05॥8: [३४ ७/२७४००:२४५ 08४७ ४५, 2228202५७ २७५७७३४५७४४ ॥52॥5 ॥७०१७ ॥४७०७॥७% (॥9)> ि७०६ि5] 0४३४ ॥08)5 [>ेड ॥७॥ ६४॥६ ३१४ 25 >४७१9% ( ०४ ०७ ०१६ ०४ #छठछ ) २]७४: ४१९४ ११२४ है: -६402४४७४ - फैटेटे-+ छह 3४॥8 २)॥७ :१९९ै ५७

#ड़े 808७१०:२॥ 80। है; ४॥६-(१४३२) £30०४७॥७ ४#४७४-६०१४६ कप के 8090%%0७)॥५

कर 02 ९2४४७ ॥७३७४४४॥॥४७।४५३७॥४०५७ |६७७९॥ [एफ ११४९३ ॥0408' ॥+५2 88४ 099 ४०१8 80७ ६०४३)१)०४७४ मेकाप्ाए)]5 श्हे

श्र) 5 एास%%ह. एक: इक 3७३ 77००२४॥७५११४०३४४ हि ट्रए अर्सु अएरे)०ए० 499 3७ ॥2]2॥ ३2३७ इछरे डर ७४१४१) ऐरे२0% 008 ४छै।280028 ७७७६ ४२१४६) ॥0ण2/24ए07 909 20४४॥क्रेस्सि २१2१ 2४... हज: 2 075३२॥०६॥७९१४ ३२० ४४ /2]2ल्‍६ 2४४६ 4000०६ ॥9 2092 3)७६२४५ 4 7900 ॥2/0]॥॥६ ॥०8४५७)२॥२)।२)३०।४५ 20)0263 कै 0४६ ॥3४ 30॥७ ३२४७ ॥॥४॥ 3 ७२ 40% ७४६ , 2९ ]६ करोगे) (व अहु७ 9० ०: आए. छे 40029. ३४ & पे १४७ )४ऐड ॥98 ४7 208 ३४३ 'टै ०४ ४४६ ॥2002:08 १५ 989 >]5 ०४ १४४ ३५९ को 2४४ १४ >पू३-छै[& ॥023%29॥ ॥0ध ४१७ 4920 8५0॥६ १२३ 0.॥६ ३०ए५- हैंड (७७ 2५०३३ २७३ ४५ १५४४७ है. [६ 8/5 ३३४ ४४६ पथ 8 2५४४ ॥0॥5 है; ४४0४ ३७० (९४ ४2८ २३४ 3६8 |050220 है; 88५: ॥]॥५ ७४ 9 »2) |008208 १६४३-४४ ४९ है] ००७५) ४६ 2६४६ ५६ 88-:99 23902४७७१७)७४-७३७१७१७।३४०४४४७१५ ४४७ | !०२४३००४४०)४३॥१४ 3०७७४७७४२५ ७७ ७४॥२७०) ॥४४:०४॥०। )|४।॥2]४०१६ रथ डँ६ 2०४ 2 29 :88)230900009:5७४:एफ४।डैडि [5 ४2७९ १४ ॥ा५॥ 2७ 490 ६६३७४ ॥0५ ॥६930-१७2%:50:3॥23॥5/६ ४१ ३३४४६ # हु।०७))॥89॥23४0 ४८ ॥23) ४४ 24 [ट8949 8४४७ :एप्टे 2७8 ४5 2820४ २३७६ |६०॥०७३ /0]40५0७२५ ४०:४६९०॥॥०3४ ३९ 0]०४६)०६8 ४७ हे ४७0४४७8 [६४२ ०८ 7३०५७१४००१७/२४फे।: ८2] 0४४ ४:2॥5 ।०0 :/७8॥03ल्‍0802 ! ५४ श2):2%508 'े६ ॥३॥७१७३ 9/0!९2१५ ९७७७॥१)॥४६ २०२॥ 3४६ 230 म४24७२॥६2॥882] ७१७३३ 2४५:2४७)६)।१४ 970०४)४४ ]2४ |६१४)॥2५४७४२०।७४७४३ 3)25 30005 38) [३2/8 ४03॥१28६ १७७४३३/३५४५४:४७ ॥0४ 2) ४३२॥४॥४४६३॥६ ॥०3॥) ॥६४॥२]७४ 4 556 ॥० /३६॥५2॥३४०४६ 222] 00002 :8]0५ ७४४४ ।:52 92] :2/6 कह 8209 हैं।४ ॥0३ ॥0073 ॥७ 8०३४७

65 ८५५

४०2७।४।०॥०१५:३४४ ४॥०॥2]॥00 ५२ :३॥४ ]064:8॥8 2४28१५॥)]]5 दे

-॥८१३८ 35 5४७ »४25 ५२७०६ 3७ ४८७ ३४ 'है (७६ 4४ 3७ बह है शहर हू 82६ * 2८४४४ - (६ १७ ४५७०७ $४६ »99४-- 3239 "४4४६ ॥5 7॥:2%0०5१२0३०२॥१७%७३४६७४ ६७१०७ 3१३७ +फफ्त उज>08 2423 59%-4४2 0089 2/34224 ५5७०४७४७१ ४०४४ + ७४७गे। 23४ #% शा थे ७:7१७३)०५३॥ ३१५७७७४॥)२४४७ ४) + पड दिफा, "श्थटो8 2278 00705:0%78980॥93॥22)05 घकौं+0 ५७ कफ "छत ३2: ॥.० ॥220 ११४७ 8॥:242.3022 225429 9 370 2790५8% ४७। ०हे ४७४७ 9800 9>02॥॥३९ ॥]0७[ऐ>४ ३2] # है| 2छसे (०9५ 4६ 4७ ॥०३ 3५ वश 33]5 फरार 4५ ४0-४८ हट +४४छकय 8 2१5 25 4 :००२॥७२१७४७ कापाए0४५२॥ ७४ 5 3 :४>००००३ 40072492 3७०)॥७४६ ३४ सै 22३१ ॥४307७4ल्‍ 720७४ 4 है; ॥0ऐ५ ४४७ ४५७३ ग्यष है जय | 4७१७ १:४० “४ 22५४४ « 8 20]॥:-%375 ६७४७४ कैप अजक बुक झपर है 25 है धयडे [से ४७ ७७४० है; 4७४ 4४४१७ “2५ 4७१5 ३8 ॥॥ऐ९ ३2289 ४५७१७७७ ३४ 'हुआ 23७ & फेर 2४205 ३४९२६ ३७22७ ॥922048 ४0 है [६ ॥[67+ ४३ ३५४ 2% १७ ४। -॥9छ! 88 ११७2७ 205 8१०७७ ज१)5 फिद्ाड ॥७६१8७; ७) & 0१०:

3४॥५४॥॥७७ ॥02[090॥:4६ ४४७)838/5७]2 2) 88 ॥02/8: 4४ ६६७७७ 4920%03/४9373७॥ :७५0) 0॥६] ४७१४४०४४६५७३७:७४ "9 0५४ ४छे।ऑ0038 ४0२०३४०७७३:४॥४ 8०५२४७)४७ 40क00/:9798 )5 ४&8829००७ ७४ 2७ ६०७) पे १78७ 220२२६॥४)४४४४ ४४५ १23026 209४ ह) 7६ ४१०४१४४५)४ ॥४०४२५७२2)१३४००४ ४५४१ हैक 4वेपे09७७७१७ 25 5008 4 मैट 4&॥599 देईे स्व ७!

92 3७४७७ है४ 2४&8७(३ 4३ पा (फपडे १७थे ३४

ब8 4 देह मु 8400:009%॥009 ऊँ ॥०४७५)३४ 03 "७७

अंपश३०25 $ ३२४६-२४ ॥६/ 0४२० + धछुकछ स४००४७ छा हुनं200॥:20058 22३ 0४३४४ ४४४०२)॥३)७७७ ४२४ ॥॥४७ 4४६ २२४ 4५ डे “#ए#(०ले

है. टिभे ४७७ ४४३४.

9 9 कल १७छ ३20७ 2)8 १७०20:७७०७३४७ ३४ फ्रलशमऊ रि4200 ६६0५3 ए८2॥ ७२७०४ | 990:8%:5% ऐिं॥ >ष* झहुर ,वीओे. आओ पृ ह5 32॥0% ७३2७ ३२ खडडत स्छुा७ #739 282 2०टे+ शा 5 औ४लिडथएेमव ४७७७६ ४»३००३०७०)६३४७४४ ४8१ ) प;ुणथ ०७० ॥0॥७ ७७४७ ॥] ४६२०७ ५/६)४ ७» > वाजण फारेडी302४७ २०॥७४७७२ |७39॥9 ५. ७0930 (र्ण>ेकियंध 92 9 १५) भ्ुदप्तपहु चतह 2 'हह$८ह २६ ब्रेड ऐड 22%

॥४ 2४ ४ऐ पूछ १४ #॥६ 285 ०६ै ५४१0६ 0४ ॥(४४ ४० फधछे ६०७४ ४२५५ ३४२ के ४-४ 360 [०0 46009 ४५७०९ ७7

छड़े 2७ 000५७ ३३४)०७ &ु६ 03७ 0७४ ४७७ | | 90 श्रबफ 22 20५ है; ४४-४७ ०४४७ ३७४ 3४४ ४३२

है « 2१४७ » १३३ ४४४ 20025 ३३ ॥.%६ १3२2५ 2२३४ ढ़,

पर ऐडेटीशके है रध४७३३७ ७३४७ है 900 ३४ १2055 6 & ४४४9 ३३५७ ४६६०० ४४७७२४७७३/८१०४०१8

४३७७)४५७७६४२७०७७>४ ]२५:६)५)१॥११ 89४४४४४ +७॥२४

88 ६४४७४४ 8४ 28७०४ 2०७०८४४४७ 3०४ 32)9)3%0 4४0७) ४४ 00:9%0250049. 88४४२ 'छ7 खिध 280+9४00008 ( पुणड0]७6. 82४88 9४29. ।शकीशिके #9 स00०७४२०७७ए७०७७):)४७ एच? हा के ॥े 90 |२२००७३०७ १७)२)४७)> 8३४४४:

४४2809 (४२३४६ है

घच>६३०१) जा 0७7 ५०००७ -२५ १५०६ ४) ३४ 20५३ ४१४ ३७ टेट३८ #+क) ४४ ॥५-५ * ४७४७०५७ » 2५ ६३३४-+०८४४४-०६०८३४८३०७२७ $ & ४! ६९ 208:७५॥-) ४४६ ४७२ 'है ६४ 2००७ ४७ &7०००७८ 8४६-702328 फऋफे « ४०४८ 3४ हर७ 30६ 8४५ बल # ४5७ ,, 235 फट « ॥७०७४७ » छै. छऔ७ ( 703७ ) हे) बैड ॥कवए 3७ 5 ३७ ४७ ( 5 ) ५) 3६ » ॥05 )2<0 » रेछ+ 2] ग्रधठ «४१७२-०७ » परे अपछ इस « ७७४॥०७ » |६ 89 ४४३ जूक रे "6६ 8 ४७ (३२४४) « ४७ , ३७ 40 »5 8५ ॥:02७ »0 & (25७) &। -8) है 2० ॥03 ३७ ४१००७ है. ६२७५ ४१३५ ]दी/3,,0%-:०७ 3 र७७४४।2०४ ॥2000 ४७१४७:७७ ५॥ चुणए७:७७३१००३७०४११६२)७०७४ 2:75४६७१४४४७४ ४४७॥ ४४०६४ ॥9)७]४५) शिंएछ ४०२७३४०४४७ ॥)७१६ ४०४७ [२२७३४४ ३७२॥७७७१७०२५)४)५४ नह + 483 | 7:०३१७४४४७ ४०॥2099७05 २३०७४ ११४॥)४४३०१०:१७५ ॥:00)5॥0) 58॥ 2)08 १७ 8७६०४ ०॥॥४३४४४७)। ६०४ /0०905)00 ४१५४)०४०१०१४४१४ 8 0४७ [२०७५५ 0029300०99 2४ ।०४२१४७७६। ४१०४२॥३॥४ ५७ 2४7) है )०3' हुआ४4४०७४७४०५ ५११४2१७४०। ७७७ ४४७/०३४ 02०१0५७)४ ०४४ 309]89/ 2089७ कै 72%४५७१७४०७७३१७। ३४ ॥+3% ६४७॥७७४४७४०५॥७४७ ।१५४४४४४७२४: 68०४४४३॥५))७४४४०७ ४१४०४)२॥४३ ॥३)७४७७७७ 28] ॥७५॥3029]५ ३० 8 नफकेड ४3% छुषा४॥2५039७ /50340 8९५१६ ४४७ ।$ १+८७४॥॥४७ ४०४७ [४४४२७ 20 ॥:]2)00७23४:)०१॥४५ ॥952२४७५ ७५६ ४४७५०७३७०७ ॥23930७ 9४ 22७८ ४४०१४१४४ ६७० ७४४ "२०४॥०फ:०८४ ३६४६ ॥॥२३५,। ४३)४)६ !२५ ]२9७४४०३३४०१४७७४४४] ७४७ >म्केमिरं 9 9१२३४ 92४० 808 9050 2205 ॥9) ४0 ४७४०४ 9 2४४३-१४॥७ 228 क्‍20009४५४६॥०७४:१०४६ 3०2] 0४४६ ॥0009७७ 495४७४२॥)२४७०४ :४४१४२ 399) 4५02. ॥70४४४६४६॥०४४८३४४६ 29050. १९७॥४४१७२४७)४०७३४-)२।७ "95४ 2७७ ४.४४-००१२४७):०७७ ॥3 ३६०॥७॥४७)०७४३|३)०६४०।०४५ २3 ) "१४३ ४७8७)०३]४४४ ४१९) ४७७ ३०४ 70४५४ ०६७७ ४६ १7538 3४. नि 320॥09%% 3॥298७४४७७४। ४८४०० ३॥०२६(८४४ ४६)2४४ ॥६2248?9202392४8. ॥09908 29+०३४ |७४४७७8 8 8०४४७॥४७३१४२४४०-१७ १७४ 32): हैहे नछ्पछ

इशया्छ का 20%898320029. 3४)४४॥७%8 ॥0७33 3० छंद] ४१७४०४%४७ 800६ |#फडापि!फड़े: ॥७4240%॥७ ।2फ%) ॥१२॥७७ ७७०४॥५७ स््म्यप्ते 28१४० २४७४६०७७४।००९ 0:१:७ 40४०४ (2322॥५ उ्चो॥ मद ए० 8 + आप 8४5]॥० एप४१॥ 8०० ३७४७) >७७२४६॥॥०७/७॥००७७ ॥92०%००७२४१/म३१४७०।६॥ :९४२४६॥॥७४७/२४३॥ ७०४ ४302॥2)%9। 89309 ॥50:0/9023 9 ४४७१६) ६१३)७ ॥240 9-७: 2020०२४३) ४४ 303४ %£4७ 0४०७ ऐड ॥8 ३850३) ॥७॥४७५०७२॥७१७।३)३] १७२५०७४७४७ 3७७)०६)३)२।७श२।८७०।७६२४६।७ ०२६७ 2० ७६६ 2292॥5, 20 ५४ ३२ 3७४ ॥28॥9 ३७ ६-॥+हेंहे (९ १०२] ७०४४७ ]३ 9-४ 'है६ रेहेटे (२ ॥७320300 है [.४मै० (रह: (08 4% छे परशेनरिफदिण्टयं। भर :७४५)2४० है [8 ३४ 2७३2७७ है ०४चटेके ४७ धुत) ॥0058 ८६०५७ २४ 3७५) 3।४६ 8७ 9 8.8 ३>८०२-०)९७६०४ ४७२७ ++है[ 0००३॥४४ ॥५5 0४२७४ २४४ ॥0 7सेकि शुभ औ५ २४ ( 30308 ) ३३2 २६४ 5०0३७ 20७ #0० (७ ) | #४०००६ 20४ ६६ १४४ (७ ) & ४०७ ३२ ०६ 8४३७ २३४ ( 9 ) ४७ ४४5 2४)६५४॥ ४४॥७ 8४% [०0 '॥७३ 8050० 39 ४४ >४ 83 | फ्रकषकि # किन. हिल हि।* ॥02 89. ३९ ४४६ १७४ २७ हु>थ 3२४५ पक 238(५)४७ ॥६ 89 2५४ 203३ ३७४ (+ ) ४४४)४७ 20८ २४ 2४५ 2 ३) ४४ १४४. रक् 0५४७४. 385 0६. है २९३ #पडफ०3॥ 3 82४॥४॥७१७७॥०१२॥०७ ॥०॥९०७ २१७) मे) ७) 20४। है 80 2४१७४: 6॥४8७ ॥02४ (०२२२) हट ४5४३ ०0 ०३६७-)९॥॥४०१७ ५ह॥ ४१० #४४॥२॥६६४३/७। ४५४०४ ४४५ ०७१६७ ४3४/८॥३] ६४।४७६। ०४७४:७ ॥४४४६९)४/७६२॥ ४५००४ ४20] 5 % 30३७४०५ |०३७:७)६|३४)२) ५६०३ फिशाशुए5 ॥0% १९०७६ (0४४०४ ४७९७४ ४७४छ ४४ 2 आश ४000७ 70२४४। २०० एडश |६७१०)॥४०७ ६१ ३४३४ .ेरे-2॥29 चव ७9६ ३४ 309000 ४3३४४ »>500॥)9>052)४7४ १200:॥ 4 छु०७ 22999 22090॥083%0॥:%08 7:09॥02] ॥६४॥:७/४थे

|0७५७ 2॥5॥७/४३ |०॥!४४॥ को ॥9४शि५%रा०> ४0 ?]9॥20॥999/898०6 ४४४७॥७॥२॥]१४ पे

29498 23% ड) 3९७ है 0रझक ४०४)७) « ॥ऐ२ ५» ४४ 99% 35% की >ए अब 2 आड्व 83 रथ 40६ 8 #ड बड़े इ४ए ४३ ध्य३] (४! इईफ़ो 8२० आए जग १७02 ३8१३० 8 ६४७ ७0 ]३ २५ कपशु-पथार.. ४३ ही "08 ४०००१४७॥४७४७० 3३: %४४४ ॥०२५००५७७०७:३४०९०७६ 3220 मृष्थ 0358 के॥ 22020022 ५9 |.2३४४७६७४५३॥४४७॥०४७४ ते 270फ 5 | एुआ७४ 4%95४ ६४३]७३४४८७ ४४७ ४०१ श[मुन्घ 'ेऊ ।॥0: पछेक हो भुणर 9 ॥837% ॥७ है+2२७७४७ 3४ 97०६७ 0४४४३ ॥। 3 ४४५७४ ७55 #%5 एट्टे]७) डक वछुाऋ 8 ॥७व५ 29809929 :४७२४७॥५०७४४]५७३ ॥०१.०४७)॥७ . 325०0३३३३७७ 8 ५६०७ एम #मेपटे:2३)रे 2 20:502730 ३००६५, पृ ४७ ४छ३७७ १800 ॥7250 ३७०॥३)॥.१५६ ग५082000 ॥:भ०० 40405 ४३७।६४४७३ अरे /धूण) ४४५ ३४) ४४४ 000% ४) ध्युख मैप दिकआावओ ४8 2६॥0000४ ४४७७ 8३००७४:४४००१६ ४०७ ४४४४५ ॥है 4405॥2]03॥90 ॥0208)॥-९॥॥27६ 0>0050॥॥2॥09

आह भर ४४, पद७ ४>2000&020% !७।४४४४-७:के.. दा 4७ ७७७१)४७॥ कैरेस3 + ०४४ 498 0३५ ३४ 320020 3 8) ४४८३)९))९ गह। उनहेनके ७७१ ४७७४४॥३५७छे ४७४॥४७॥ 0४ 33% कैट >० ६४ 29 98 98% ॥059 ०8४८-६)८३)१ [६छ.8 49 ४७५३२ ७३ "६६ ॥050% # 02४ ५७४+ 2४५ ३: ॥६]॥9 ४१२२] 90७ ३० ह+के 5)0: ४४४ (कै) >४-५६॥ ॥०४॥४४ है १० ४४०२४) 2५ हुई ४१४ 3 2४ 420७ ३७ ४७ | 8५४७७ 7५ ४४ 29 8%& २५७ 52008 ) ॥६ 5)0 ४४४ ॥/ है १०७१ » रे)भछ 2088) » २४ हैंड 0६ छे स४ १३४ ०४ ३३०७४ ४७ 305 है ४ऐे 790५ ४०१७ है ४४७६ ४४ 720 ४0४२ '॥४५ 790 ४१२३३ ६४५७ | 83 है. है४ # 2०४ » रे [900 अप 2002) भक5७॥७२॥ 7४0)2)2) »ग। ऐि 2५४): 0४४ मूठ ४३७०७ अहिकिफरे ४व।388 :४७ ४३७ से ४2४ ४छे ॥28 32४४ [७)22]99%5902]00॥ )७ के :४३)४३४४७ ०ोदे शूष्शूरे 403७४ )) 3 फपुरए 903 2७ ६७७०४७७७७ | 3४) ४0 9 २४३०७ गे 0000 के 2७७०७ मशर)७७ (हरेशि २०) थे डि0 0:30 ॥+

हे _नहुएंकपुणण

॥४९४४६ है रे 3० नट। ४४२5०१५७४६ ।५६४७४४ > 205७ अर) फफ्ओ। थी. कलर सएरेक झुक २०४ मध्यर३अस्व ४४

जै श्र (४७७४४।३ 39४ ४३७०३ है ४७शिडि 2॥ सुं्छः मान कर कि

;्र् ७५. छह)5 पथ 982॥४ ३2% एप।222॥ 0५७ ।॥ एस अमीर ४3४८७) १७३० फ्र>228. 000७ फ्रेर एका>े परम 9. पथ्राशण। फव्पपेडि७ घरफ 0४ धरे) 9॥0७9३७७७० शा 68 9022॥४ ॥-६७॥५०४६िए डे ५२४४४००४७ ३७४०४४किडे ॥णक००३२७४ 0० २४श३ ६४४६ है८ ७७४६ ६७.७ 3७ ७)४४ >005६ $ 3० हि 3४ 9.9 'है ०५ ४09 इस ॥62७ ३६ हैहेक 4७ 8७ ७७४ 3७ 8& आर है ॥भ इु पके सं।६३७ 5७२ & ४४. 'हह ७६ 39 छे& ८७ ॥5७० मे ऐ--+है8 2पे३३३६१ ७० ७० 3७१६) ७४०७६ ऐसे) ४भसे ५948 बरिन देर पाप ४६ हे. 8020 /७४७२ है; 2६ है? [४:२३ 9४ फट & ॥४ ४३ 3०७६ ४२ ३0/0500 ५:७७४७४५ 385 ४र४-६०)४६ 2१७:५७४:॥७:३/६)१७ ६३७ )५ ३२५४) ॥0:9७ 90॥ ुश्मुमिगएे (४२७४० डि॥ हे ४0000955 ४५ १४8750. ४०५७७४३॥ 0५४ 3 हैहे ग्एयुलेयएुरे/व७9१5 मैप शु३ अछ0७ ) ५४ :४७७३ ७७१५७ 28४0४3४ :०छेि॥ १४०३० ३४२)२] 9 फिकिएशन ४9002 ४४०१७७४६ ४$0क४ 3000 ॥2)029 %9 जा श॥ ६४2००9७७ 2709 76225 ३००४२ ए७३३ 7७३ 4 वएस्वेर्5: 9 (9४% १६२० 825) ४४७ पेए४६४॥ )७ए०७२ फणक छणेपदुमर 220७ रेफर एडेएे 0७92४ 9390७ है 720० ०५०४४४६३५४४४६) 30०२२: े)>ेले३ है ॥७१ ७७ 39% ६७82| ७9 22]॥5 क्यो रैक नेक ४७ ९पै]५७॥ 2५७ 057 ॥20]99 3७४॥ 0७ ॥४७ & बदिल्पेए पर पप4४७% फे ४४ ७४७ १४९ ४४ 0) ३४ 3४0५ 0५ केक 8१]9७ ७-६ 702॥0::-३ 398 ५१४७ 90७७ ७७,, )४ ७४ $ $2393५32॥)६ मे

«5४29, ३8 *॥:०७७७!. 25 “६:७७ बैड ४९ 2४2)8 ४१४५ ] >फमह, 3४ »2]%- “2494. 25 9४ 32% 3०१३ ४७)१७ 5४% 4६७ *घ है हुओऐ #१४ & * 205 थे हाथ 2७ 2७घ२७ अछ 3! ६३ >ध #छि 3 » मेले + 8४६ 000४8 ॥08॥ 270६ 30५9 ३६---:६ +. डर] 2व08 फटे दि४फेर ॥2)00 8७ 23ेश5 ] +20 ४४ 75%४ ४५२४७ ४]2032॥७८ ०) फयथरे ॥७६१७। नो ४॥४४% 460$ 88 ४95७। ४२३५४ १४४४७ 40७७६ ८६४५ 302५:२७ 0९७. 0४20६ "है 2०४ ४४७३ ॥८०३२ ४०४७४ ४३७ ४ए७३४१७७४ 2६४ ४२ ४.५8 0७॥४३:०७२७ ४॥27५ 72७28 38)०६:५७ ४४५७४ ४०0.2७७४ ) 30४७ पके ३308 ४७३७ ७२००)७ प०२५॥2७४३२२ ]३३४ 820६ पडीर5 ेफ 4 5222428 8७5४४8७४४७३४ :9४२४१४ 209 ४४३॥०) 4 ॥2].६७४ 'टैशश ने [७७ 39 29२३४ ४2०8७७७२५ ७७८७ ७४३४७ [प्रेशरद 587 ४०७५७१७१४६ २६ १४२४ 220४ ९॥२७ ४२४६ )5॥200]5 |७ 2४:%))205 ! 403039४ 3३६४४ है४७४॥ १:20 ७20५3 (॥७७2१७ 7४०30 ७2] ४४३ "४४५७ ६४३७५) [८४४३ ४४ ८2७ ४५४९४ (९३४५७२१)॥२/६ रे कहे 7४२४४४४२२७ ४५ ०७४०७ 9 १७४२६२]६४००७७॥०४०४००)५४ ५४ 2५४२ महैड॥ ६६७४ ३७६ 2३8 272४ ३8% है। 0500 ०१२२३ 2७ ५४२ 9099 ३९४४३: 8-७ 0:॥)० | डु 50॥0४ ५४१३ 9७ ४४६ 0३४५ ३९४ ०९ 2८६ ०३४--४+५ 280७ 298४3 +है-60९6॥ ०९४ 'है८७-०३ +-+है8 कोड ४४ मुडे 8)०७%४४६ ३३ ३७ 208 २७ २२०७ ॥8 दम [0 ६४०७ ३५४ २००४६ ६६ ॥090 ॥३४ऐ० थे 82६ 8 १३०४ "& ७४ 0908) ४४॥:७ 3५ 89 305 30७ ७५४५४ ५५४ »५ स्छा5 ४ऐ- 285 रेप 20: है 8 ३३ ४६ | स३०३३)३ फ:--+ 3 800७४॥०)४2५४२४७०३) ४१४ ३३४७च१४४४॥७२१७३४ ४७ ; 4७४ 8७ ६५७४०७२४४१)४ १४ (20५22॥8॥0959३२॥४१६॥४४ )90502: नर ॥४ ४४ ु॥४७॥०२)२४७)३१७ 2४2 320]000:0000%8 ३॥ ४४ ॥६४४७७ ४७२३) ४४६ | 5०४॥३ डे 0२४७३ एह +२ 2

पक डे अगर ००5 परेड ७० 20५३१ 0७फशेफ 2:१८:४ 2295३2)/0200५७४७ ४४४७ 398१०१२४७१४७१७७ फ्लैश दि 703७ 20७ का रै--2०0-८ ४५५) 'इश्ड्रेचन८०).. छाप घाव 0 १९ कै छो०5 ४७ ०४ 8 ६०७ ४+४--हेछ; ७०९०१४४ ) छप्त७०६४ 890०७ रे ६2 300 है ॥१॥0%0५४५5 3७७ )४२०% इसे एज >े है; हमेण 4 ॥0009७ » शक एछे 0४७ » ऐः छछ५ 4 0७७ ४७५ » १४: ४:४७ शे३)७ _.. डैफमारमप00 २७ 9000 ४३०७ 2]छ४७ 2७ (४४ 0090२)७५४२॥०७) ४७७३ भ:])०४४७ 220४७ ह05६४)७७६ गह।0फा ६४५३४ :5 १9४ 009002७४५० ६०॥०७३ 3एवे७४5309: 3 2४ (षध४े पथ:००१७६७ ४५पे६५१७ 3 ४७०३३४४ १३)४४ ४४७१९७ 2म502929223॥ ये 9949 २४७१४ ॥७७६११४७०॥७॥७७ 22/४०३२/७)४४५४४६)।०३३४०६)४३ अप्वेतरे३ १७ २४०))०७ % >>) हैयट्रे भ४३३४१७१२ ३०८ 328 08:४४ शोध ; 3 ॥७०३8)॥०४३०४४४- [8)॥0०9:928)।9६ फैट ॥७४६ ४.७४ 392 ८०४ [६ 93७ 3 २४ #मथ ॥0४ 3५ 3 अपपे5 (92 'है> ०३ ४१ 0०2 हु डेंक 9: ॥७$ ०७७ ४४१४७ १७४४: 00०९८४२००१०८+-००३० शे0८० १७७७४ 4४ ००४ ॥७$ ००३४० ४छऐे 3७५३ १४५ ऐै; : है? 2७ 2७ ४६ है ( )0५8% ) 89 ०४ ३९ ४३४२ ; 'फीडे।४७ अणरे 302 9 |७३४ ४2५१७४। १५४७ & 8 305 ४0. है 8४७ ४22६ ३३३ हे छ७ 28७ काले 2७ 308 |६ 88 २५ (के ) १७ ७७ 8 ( ००९ ) छैकओक :४१ १७ 30 है 83५9३ ४७७४ है; हट म्भा०2)१३६ प्र्छे

ढ़ 0 श्र

ट्ै डेट है 05 ? 7 दृ २७। १४७६ « ९४३ » 3७। दूं ब्काक क्‍७ से बे एृ मे हू मऊ हर

"53 ध्येशारे5 है; हमेशा «२23७8 » 22» मेसअपुका+ » पे... 02४

कुछ २५ मर 8 ४४ 99 8 >% ए८७ जाए एक फेणओे एक 99 ५)

गछुद 08 8५ 9]४७ ३४ शा 2४५ 2४७ एक पड़ भयोपुमे अशुनआ5 4

# 7 3> ॥9/ १>७चछए कै पेघआ रु के इस दें ऐड हद | 9७ भर

का हे ग६]0%४5 09४७ 32279 ३३% एव्प४ड्रेड एक्ट 9, नद.॥9छ४) 3एक हरे 20४४: ०७४७०/४ ७४६ 2229७५:900)/227% 32279 हे है है 9२ झग्के इम्परेड्रोटएए७०३४०२४४४: १४३७०४२४ ३२०४६ 208 3 है २००६ ॥2 - "०३०७३ ७७४७ | छोर एटेएश० 5) 22]8४ ३७३३ 5३ एन्यर०७ हयो। जे. ।])

घग। हे 03% 0७०) ४२४ करेफओे शुणओ करे 3० शुणरे पाल ४३

ड्ब ह्हे है हर

#्३७७३४ | प्शओ गूछर ऋऐे। है गशरफछछ 0 करा है फशई ४७.५2, ल्‍्ट &8 (७४ #329०४४७ 2६॥50२४४४४४४६ अश

- १. 3203७ |०६३॥०४४१७ :४१७९६१४७ कि

%992)४४ ४5) ,

"थे 33223 890052 (0७ ६४ ४४ 7900%)02]00% 0४७ ११902000923 फुट

"९४ 28५ डरुडे ३०४१४ ०२५४ ३४५४२३६२॥००००७ 529५8 [४७ "8 206 2०२४३३४ []००२॥४४६७ हुए). एप | अहच७.. 2]: ०५॥ 09]0४४४)२ अपडेट 28०७ ४०७... ॥!* है !०छे* एपईे 2७ 8०५ ३0४४४ है. «६१४, २७ 28 ३६ ७७) है. 498 ५७०४४ 3४७ ६१५११) मर्फ ४४फे ३७ रह « ९0 ५» « ऐएओे » 2205४ है, ४५७१] 8; 8): मेक 3५७६ ]88 १७०४ ४६ ३०२०४ ३४४ वा पथ + कध ल्‍उ०क%.))2१ - 3७७७४, "कुक ॥2४मेफछ- धरने 2छलेश७४- हुरग३५३३७४४ ६७६ ॥8,. 3 ०६ ७५४ एड डरे 8 कवर १४३ एफ्जए कमर... | ... नछएएेमिसाद

छुआ मम कुहव५च, 238 8५3७४: 33०8 ६००३३437090030% कीशामृमिगेफिने मुमकिन. पुन 3७0 दे पड फ्रेम &8 ऐ2३४ 3७-39 8। 95७५४) ४०४ ७६७३ 4७४ प्छुफार (2० हैगे३ मय. मिथ डाउन फििएकरे डिकापमनर७३ कफ धरेथापव _मक्षा एममपगरेकर 3४२४ 2 सपरीरकुये। थक कि

> 93985) ४७॥२७ ७४४ ॥५४०७७

लह४०७४ ४०७॥७) ६७४५० ॥४98॥% ४० प|े 23 280) 8838 ३9४ ३४ 20४६३ ॥0६ 2४४ है सफे& [के 0४७ ४४६ & है २७७ है है है ६४2७ १६ है (६७: + १७४ 3४ है "है > हुक मे $ ' को 2७ ४४६ है .4टि--डे[छ 2०३१५७ है; 2०३ ४3१६ 2 शुभ सिशकममओे है; पे 28 2000४: 20६ 0१७ ४०४७ 308 ५४०३४ |) 2 है मे अडे ७७ 8 2७४४. 0० १६ ५३७ 85]9 है, जुशले छः डाक है » 70003 8 » ०३ ०8३0फेर १008

839४७ आधे गछस क्षलापपलि(गमि: फोर ई५३३)2४६३७ 500७० ॥७३॥ ७४: ४39४9:

ड्ड

88 मशुलिुधि०२७० ३१६३ ७७ है: ७०४ ९४१३)४ » २२६३ 2१४ हैं. भरधथ 2०७ | ग०के१७७२४०२०१०७ से फष्केडि 838४० ७४७७६ 837:79४७ ७५॥७ ए*ए। | 22%३५४७ 3७ है ७५०४४४६ डिए (८408 90३:3४४ २६)४४४२))७७४॥]४६ ऐथूशदि श्पि ड्राः +2)758) 288०५४७५७५१७ 3३98 (|७२)४२४० ३४०३३ भशक्रेणछ फकआ5 फ्राम्या ३७8 4 कह ३३३७ फ्ररिता। ऐड 03498 4 हप०ए गछाशु्० हुप०१७०७३३३) ३४५३) ॥०६॥ छिट्जिणट 98 ॥४/७४५ १७७४५ १७४४ ४६ ३७॥४४४ 24200 प्‌ 3»23९+९ 3>20४९ १>प०र्पाह

89 गम्थ्तिडशसेपटी/2 208 पटु।।२वेर)8 20 है :४०३०७४२३४०४२४४ ६३

परे कट ६०६९५ गए भुल मध्य एक है. भू धर ६320९ ३7४। रुप रण खिष्रयक ॥54 २१४ 2४ पे 2४ 28 309] ३७६ छा श्र # फती मुपओी छूडेश वधर कफ हक अब हू कमरे

४:2४39-2) !६ (|

१%5६%१ ७००४ ३७ काने 3%)%9०३ ३०४४७ 5४७३७ '3!58 ३५ सस्थ ८ओ 4१५+ ७३ 3 है ३0६8 "७ नपाछाड कप शत (५. काजल रे पमणनएध उप्र पक परत 75 ५८४४ २१६४ ६७३ ४८२ ४०३२४ १०१६ घ्वेल्टट्रल्‍त0७॥ १६३५ भक्त रा १मम्क्ल्यु 8१४०३४० ११ ८००४००७३४ हलक] हटा॥0४7 सशाक 8 कत फाधर जग इन्कार: ]0७5 #]7८७७व॥ ७५१४७४०६७०७०७]* | ४] ढे॥ फक३४ ४]0% ४३ काफफ ७३७ ॥79]6 ७७ फ%७ए१७०]३-४७४ >0४०४ 4४६ ४९३७१) 0१॥०॥०:४७।६ मेड 205 ॥099) औछ फे-)-३४ श08 35) चर ह७ '(-हो-॥ मर प८१ ७8७ 2५ २०४४-४४ है 3095 ३७॥२४०३ ॥७॥१ ३४ ९४ व] 3०३४) ४४०६ 3९ ३४ छे४ ४८४ देते ४४ 703४३ ४४ 9४ )१४६)३७ :0 '७- एफए पे ॥९0॥७ 20५ '0४ 4५ ०२ 7४३ 'द) ॥॥:७)॥७ +८४५ >व ऊंएर. ३२५७ 2272 3॥0239--2४ 002708 %९ 022) #ऋक्क २५७३-६६ ६४ ॥2% 49 25]0 ( २२४३९ ५३8३ प्‌७?)४ ) 8 ४:४४ ]६ 8३ ।४ फए हश्कछ. ४0 ॥७ 5७ 0७ ४४५७॥:७६ ३७ "९५ ७३७६ ६६ ४0७७७ ५0 89० (३१ इाथ३2)) 5)॥00 2६ 2५७२७ ७३ & [४८॥॥४ का २७ | २५ ४७ कक. बच इृहहता> 35 ३३४७३ ४७३ :७ह 258. 4:08 ॥९8७ ४४) >ध ७४ ३७ 5० 3825 दे #ग आषध 85 है ॥0 # धाफऊ8 +. शफ्ा+ रण कफ कांड] ७. 85०१४ 28 ३४ ७७ 8६ 3४77॥॥0 ५६४४-३४ शक, 2० ॥७॥0० ३७८७ ।)७७७७४ ७०७३ $ 20०३० )॥"४६ 8४४३४:५२४९ & >छआए 0०9॥2७७ ४४८८ 7/39७१2०४॥ > 3७३७ 00४ 30७) ॥092१७ ४0४-७:३५२2४४ हट 8०3 ॥६७॥४१॥ ॥2४७ ८६१ १हह ४४% ७०७ १७६३४8२१३-॥७४४। ३४ 0४४४ :४०थ घर) नेक है $ म्तचकरक) ४08३) हे 2जफे 2239 १४७००४०२३ [3008 ४8 0 ४४एफ०७५ #%एरेए छच हुएहैए०३ 32७३] ४२ )५/३।७8 ॥2/%9 १४३७३०४०६ ८६६० 85 ॥5&8३:242%02थ59%820#% नोण ॥80% ०७३२४ 808 ४४॥ ६००७५७ ॥70७४२४/9 ४६४ हे 5

४१४४४ अ्क0क [१७४७ १६४७४ उस रेस हछाणफरेदछ ( 4-0५ :४७७ ४2) 48४ 70005 है; 3९४ 422६ २५:७६ ४७३३५ ३2८ ३७४४ हघ श]३८ # छ््श्मः साफ #काई॥ 2४ ॥७७॥४ ( छो[७ 8. ४9 द5 ) एए॥७५

प्र्फ़ेल की कनछ अधिछुछ इध अकछुधाी हुए. 0७ इृष्णोड७ ज्छुड (१ कक 85 ) ४६५ ४५ « ६७० # ऐसे है ४०७ ॥0७ दध २६५ ३४ 0७ 9३७ है ६६४६ ' ॥25॥७ « :0. » ॥७ ३ै८ ३४ ॥5४-२२४६ | 5 27७४७: ७३७ ७१५ खशाशममोकारे का मे॥)२४००७७ कमटटे७ कार शतक 8७४४३ (कक सिर मे|2०४६- व०००३३॥०२०४ :23% 9320॥28 2॥2५0 ९२४३ 50 ४२१०४ ३27220/& ३५४४७१७४)॥ 2०७०७ ४६७४७०४३४४४ (१०० ३] है एक्स हमे करे 92०० 2३६ ४४0 ३४०६:३॥०४४०:७४०६॥॥५ ७७ 20% सेसिटे.टि22०७ ७३३॥३]१४७ 72005%8] 3 ४9४०७४७फरे] [2५ 80 02४2॥०७०७३०७२ 0000७ 022:20६ है ३०४४/४५ 400६४००४६२४४२९४४७४ | १.4% ३३३६ 28४२४) भ्यथुप्एपाशवेपसेथाए धएशड:ए०े सेप्एे) | दमन आम ७० था। ७० समर 3४ 8७/२४७४४।५।७७०६॥ ३8४४ )०३२०७२॥६ का४३)४8०४४७३२॥६ २202]/7808) ३२।६ ०४ 8 ६४७७ ०टे८-०४+०१४ 'छुएे ०टेटेनट८८ेटै फो ऐमशई मय 288 ४४5 ०७ 898 #.९ ।रेंकि 9 ३३४ ।ि)६ ०५ 0 हे। है? दे ४९ ३२४३७३०७ ०४५ $ है [६ ९६ २8६ | ०४ 08:09 ०5-०० १फफ्ढे शक फेक 4५ ४५ छरेड ३छे सुर 3 यो. छु४े (०9 838 8 फेक हे २8 ६६ 3 ये छुपे (००४ 8७ ७४ हुए५ ४१-३७ ॥०२४ै29 0०३ 98 अरे 00६ १७ 'हेके 8 हु ले 2७४७ ४६ 0० ७। अधड़े एडेंठे 4७ ३६ ७० 2५0५७ (६३ ॥५%४ है; ४६ 29920 ९४ ४४५ ६४ 289 ३६ 8 ॥४०४ं ४३ ५७ | है; «४४ » ४५ 9 3905 9 8 ४-१ 2॥७ (९४३ 2088 «4922)४ ,, ७0७ 4५४ ॥2४ 2]0७ (|४+-:0॥0 3 809७४७४७४१०३७४७४७३४४७३।५४०।३७७ 0 ॥2]5७ ४४:०४ ७३७ 80श02, +2%8:६४४ 20४०४ फछाव्गपर) ७2) 7 0४ ॥3९ +पट्टा5 #१४४४।१ ६३१) ८8 ४७४०॥७४४ ॥४६० :४«09१0:४७: ४३५ ०३ स्‍+७ २४४४७ 320२2] 020०3#202०५३) ००७ :४७४:४ ३0४७७

+२४४७३७४३) ३५ छह

पै४१७१४२०३१०५००७६ ४४ ४७१७४ ४४२७४॥७४ ३३73५४४४५ "पछे] स्फुपमथए क्‍20007303540595 3: प्रष्टारपै४03५७५५ ४६४४२)५ ७५५ + झए 2४393 900 30730५ ५५७५ ।४६७:४३ |) ३४४३०४ + ३७ के न्श्श्ो 5 पर 0०ज१०3७223357570: 59 22४004% ) डे दैजत 05 "कपडे 9७३१४०१३४१४७१५१,)०४५ 799 ७६०७ ॥११५ 903५४०४७ ४५५ "मफथइआाहए3 4 5 ए१5 3, ॥350020578030फ१]948 849 ४७४४५ ५४ ऐक 0 99320300%0 २४०८७ .४३७)७४३४७४७॥४ १७५३ ४।)५ #सफथाप १8०७७ जे प्रोचतधक०2जा 5७ + 8203900 १॥०३०७२००७॥ 27900000579008 2]४७॥ ४प४७७५३७3७॥ फ्री! नशछ्ाशदरघ20902%99 4 :रग:8 ४४ ४०४३ ४१७७)१३३:)५४७ शक ३० इशथाथहुडकाह ६०४४३ >७2४०३७ 9 ३)४७ ६. ६४०॥७७०१०७७४४ दि00502॥2%0॥ ॥४७ 2७४ ७७) [रै३)७% 55. ४0७ ४३४ 8७७७७७)७)७०७) ६१०४४४७१४१४५४७॥ ॥300%0४॥॥0520 आम्धार ४४ 2]४७ फडफड 8७ ४४2५४). ६३३४६ ६१३३७ /50:)00 “8१५७ )2)03ए३]७४४४५४१२५०७४४०४७३२४४॥४ ४१७४ ]॥009% 7 005 8320७७७ | ६४५४४ २१७०३४६००३५] ६०४६ ४४३७ »००४७७7) ६03४४ ०४४४१:७॥२ हि॥0998॥023७ 0908६ ४४६३०६६७ ५७७ ४४५:४३७ १५१) &ण्प४ 00००४व९६७॥०६ 232037005905॥ ५००४४ :७०३:2३ ४) हैं ४४६/४७७४४७४/७६६) ४/०४:2५॥०४७४७)४६ #कए 80॥0०७०४०॥७४६४७०७/२॥॥५३]७६४४॥६ हैंड #ऐेछे] ९६४०१६७४४४३]५७ ३४0फे+फ[ड ७2200४४०७॥४४॥॥३०४४] 2220॥00%70008 ॥एरब३०छ ७१७ (७१४४५०३२०४) ०१६७१५ है 22५0030 ॥209 ॥098 4 ४४ 3) 2)०थ १९४७४ पढे औै5 छुएथ३व७ ६00०8 (३ ह. 82 रेड 003४ 99 72] १६५४४ १६४ 32५ ०४०६ ३७ 3200902)33, दे 3३) ४0५ ३१७४ ०5८७ » १९ रह छछ७ 20 ३६४७६ ३४५ है. है७ पा 30६६ ४४ ३४ 3४ ५४०३७ है७ नाण5. है डै5एछ४ ३8 के 2७ एफएमफ म# ये है है 20 ॥8ऐ: २६४ ४2४४६ ४४१६ पूछ ०7५७५ फटे फेअण ड७ एसाब्रेट४ १३७ आग पे मेक 2850 कुछ गे ३४॥६ » है “हफफ्े

4 3:22322; £ 4 ॥48 + $%३७ कि | 73०) 9+

09 4790४ ४85779 9 ॥829208.93 8 3: ६827, + 9४०3 १३६$ धध के इहक 355 077 घ4 2:०2] 3:0553॥«% हक ६३38 433 ४१0४:7% कगार शक" १72583॥ 22290528 28 #]29774% + 4 वह 23504» मशक्कत 222 फ्रशफिकयछव-2 ९5३ फक कषाशिपुय 42४400 ॥0. १६६ 923:0 % ४337087 49 ४१४४4७॥४ ४३७ डाश शक ६४ ए%॥90॥ दा $ 5 22 4902 ॥०११३४ |.7 कण ॥2/7922370]02429 8 ३8६ 2॥8 2228 ॥:5४७ |:3007957305%: ६5 एटह)0 एव 0० ६७ ४५४६ ४0 %४४5१४८॥११४२६ 48%७ ॥98॥5 828 कम 2०४5 मजाए प्शण एल एआतु 4 फृपरक 2299 ५0०: ५४% लि 2३0१४८) ५०४७४ ००००॥ 8 9०७॥१]४ ]73%%)४5)2॥2 सथ्टेर 2 भरहश१५73४879 ड08 ०१४ ६९ 25८ ४७४१॥४० )२४७)२३० ५३३४४ ३४४ ॥४690%799042082३ |४6४४7७४7७१७७४ #९ 8४) 05070:४: करे झ) केशिमशुपेक३ 58 ॥२०४६ पुर 20% 20239 १००४४ 9१७५ जरामम32 2२2१2] ०१४७४३ ॥५९४५४०४७१४४६ ६४3७ 20 7२०॥४३४)३::४६ ॥0७४४१)१8 92०४2) २३४६७॥७ 52१8 ४8% ४202 १90037. ६५ >क्ररफ[७8 ७१७ रे आय 20328% 9808 0): 0२४५३५१००७॥२ २१३४७ 0७॥ 8४708) ३४३७४४३ १३४४७५०४ 20 ४४%१9॥02009309॥:%29 8 १8 डि।क00॥॥9008.. 0४ 000७02) 08४४१७४४४७७५ ६१]७ १॥95 3 शक ४४ ॥०४ ४॥६६६) 0४४/६४०॥॥६ ४0008०१)॥०४)५ 93875 एझमेशिय सनिकिपरे७० 0९३५ 3कारे कमरेकय 7528 (२]७ १७ १9१४03(९॥ नो 5७ रेस्ल ३0020 3370४९७ ३७३ 39 :900540 005 श्ए:॥:॥ छे शषएथाए७ ४० ४३५७ 09005902॥9म. 0 कमल [0७ ४8७४ 82 भरे 200 ह६४७७॥६॥ 985023 २२४३७४७४२७ | २४५४५ ३8४ | 9४४७४३।२७ 809399 [039०४३०४ १२४४७ ॥४॥९%१॥२५०॥१2४ १) फकण॥३७ 89% ह0७॥॥४०४५२४२ .03 ०४३३७ .०३)३१४ )३)४॥६ 20929: 2४20९ 5. 8:0॥% याड. 2]8]99722. ३2०क३२०४७ 20 ३५ कि 8०४॥७)४५४४ 2)॥20६ ।२२॥॥६]॥४०४॥४७॥४)२५७१)५)०)२११))१२४०॥५०४०३४ छुक फ_गैएरे४ 2७४ [0082 हु महज ५दि0५२०७४७ 0० 2209%8 %9५% पऐ2४४४ फडेरे 3४४३)०७॥७ ३४२१४ ७8७४७४ 3४७ ४४२9२ ॥७3॥४४ 3७9

५७)७/र (६ हु

मणि ब्ाजपरक कक ॥? ७५५

७. 05 १0५१॥५७ ४६३४-५५७६५ नया रच १०७] इ5338:

>> ४४४३८०३५७ प्र! छत 0७ 2०20::330 95०४७४७३५३३७ पिच 3७१७ ४३३१४ ६७१७ + प्रा

7490279%0%5 407५०. ३० %३ :85908 ने १8७७७. >५२७ सर ७३०४०३४ 033% ४0053 ९॥६ 0॥97६३) ३७१४७१७४७७५१ ।४५ + ४७५ एज: छडे॥६ ६३039 ॥5०४040795) हुए प:३ छपर घ्जच ] छ%0008 १92 हु २४ हेा७४:३७]४१७ | मो "00 ए२७१४४२ ४७४॥७०६७ ७5)5४]७०७॥ क्४%० 7078 2 #।ग३ >छ १७४७ ॥93 8०३०७३४७ :७०॥29७ ॥9७॥ ४] ४७६१७ >]%४५७। >ह धक्का करछे। :७६व७ 98 7 ले 0030॥0७8४ | ६७ रे 203290090)5 गे।॥४४७ 5। है 80४205 के) ३१४ के 'चेे।० ४३७१४ शचछ७७ ४४७१ :७कप्राफ |88 के :5]00४४७ नगर मु जदुव ॥5 फए हैते :४४3७ | ७३ :४5)७ 9॥४2] 9७ ७: >5) थी; गफरेशय चेक एच 2फ४१24002॥23 80%0॥ ४॥।५७: नजफ्रेष कप है छछ 2४१४२ ४६७ 3 ह8व8 330७8 | 77 नछे १४५४ ४9 ॥क फेड प्रशड् ४88 ४३४॥७ ४०॥7]

क्ष्डे

) ०७ ६५ पक्ष) ७७ आर थु॥९०४४१४०)०६७४ है 2]

बे

७9७ 08:2५४३५४3७७७। ऊ५ १०)७०७॥ ॥|

$8%४02)७ 3 7४५ ७४ ४8४८ कद ४०४४० ६!

"जाए थ्यएराशुरिर 3 के३४- ॥209)229॥ फरभ|्ठव0)09 है

क्र्टक६१४ फाटक पीकर 028 | गे: है डे

एफ 00४१फशक महक 38 है फट नह शेर 9 ३३४॥४ ४फेध को ॥७छ 8३७ ४४ शरेडिआएए डक हैं:।१४2८

3 98)/४०४शशु नि ण६ कक हुंशि: ३23० न्ह्क्ष ,

2207:५४७ ४१७१७४७ :॥७।७३।६)७ | 30र्ॉफकआ१80 2४२१७. 209293:49७७३७०३७१५१७४४८-॥२१% # ४४ & #३१७१७ 990%०9 5०७ 9३६७ हि ४७०३६ 4०२०१४)७ ३०४३ 30० ४5४७३ .3४,, * 3 ४5:४2 3002 ॥08 १४४४७ ध०0३ 949%]024:0४४॥ ४३ हय। सवकछ093७)२३:५११२१॥७5%9200 9०४ ४७४३७ ; लि ॥2]28 32०४07०४॥2]9 498 3929 92]9॥६ ३७७॥४८३॥ एक फुण्रेह२४४ ३७४१ ]७११॥ ४७७ एच ऊंम्यामेछ मे मिमरेव६ 39४3]0%॥] ४92]0४ 483॥६ 0:%7 ४४ छयगे 3 (६७४ ॥9:2॥॥०2॥ ॥+द]0५902%) ॥७६0॥७8॥७ 529॥७ ४022 ॥872%॥5|७)॥७।७ ।2।8 ४७

आर आर]

200#0002] ७2५४ 380 4 ८४४४ :४23040%॥०७ कछ ड<:श्डड+ ॥28 ए४०00॥५ ॥0420) ०३४६ ॥04 ७७७१४ ।टेडै

हैए हेएटे है; हुडै७ «४०७५, छे ७छ ४5 8 कैश ७07०१७॥७५ हेड 2 ७08) ४५ & ४४ 'छ८ छुपे ३४ ३७६ है (६ १४ २8६ है; «१०१४७ ४939७ » ४४४ ३४४ 89 ४9 +ह 8४ ७० छुट़े) ९... « 2020रनमिरन ५. है !इप5े (०३ २९ ४8 3 8 भहे रहे 5 ४४६७ 233 ३० २३४ २४ इअछे दे « २33४१ आह » मरे 28 » पर 8३ ४७ 8 ७४४७ . (०९१) ७१ (9 १०३७ ४७8 ४४ 3४ छुट ॥०४७ है; ७४६१७ ४४ ७) 3 ।०0॥६ ४६१४ 9 900 बडे धयो। 43॥8 है ॥|ै 283. « २०5 है है + २१2४३ » 89 पे ४४६ है. « 2१०४६ ७७ ५, 2] '०39 जर्य४ 29 ॥४3 0492 ४8 8 | है. हऔ४ «& 39% ४००६३ » हैछि. ४२३७ ॥09) ४५७ ७४ हे. 8७ 8 « 80०१४ फध्शिक [हु ४७० , 05४ ५४७७ ५५७ २0 फंड + १४४७ #ह १७६ 2७ 8४ 23७8 ॥03 फ्रा४७ ॥ऐश छे आफ: 9] है. छुडै७ “ह१०१४५ %9., कछ शछे5 पे न्ज४डे४ ४०५), ३४० ७० फ्डे १४ 20७४ (६ (४७5४४ 282]%28]%) :/0)0 २५४3%-4७७

3 ४४०४५४०४७) अरेशुारे2 7920%. 0३४७०). ॥॥09७/००)१३४०१४४) ॥0%जेव० , >७४कार]१७

320७१)०७१४४०७० ७०१०७ एए ४१७ फरै २०७ श्ड0 फण फरशुपा धान ४४०05 5 20029 3फे पक 0००७)४॥ #रारे) अचये 02200॥0॥2०0॥ 2079] ३फच फड४ गधा ३१0 ॥&]7:र:8/04 बाय) ३९) ग्]णफ्ड 20७ (७५ गा कार 2३४ चाच१]१5३२३०७॥ ०७६७३ 0॥03॥2०२।प७ 729/% 300>६॥४२॥४६छ 0७:७०॥०५ |.

है ग्ण्छ १०३२७ 2४७ ॥0(स 0249 - ३६-- है ४3॥२७४ ९१ धक्के |. एये फायणु १5 5 ०9 20000 के हुर७ 3०2]0/20॥ ४४६)७॥७ १७ ॥949 ३६२६ कक ध०ेध ६६ ॥2% ॥६2003। है. 8२४१७४)॥)०७) ३७० १:४७ 32 ०3 * है; 8७ 92॥)400:0॥७ ३७४ ॥७)७ 9 ८०३ 82 है 82७ रऋाजकेड 8६ 4६०: बडे '#0 कपूर उसाए ७8 23 से पुरे ३३४ शा [से है कक 2४-५9 ध्यूडे 008 20ब्य 322४ २७ 30०६ ०४२४८ ३3/7 ४०0॥ है; इै२५ 9:8॥092) ७५६) ९४ .33% [६०४ 0४% 8; ४: मेड 0७० 2५ २8१ ( 9३५ ) ४४ ०३१३ ४४४ ु०0७६)---१०७४६ :४४७७)५४६०४४॥ 0७3॥02]७8 22098 १२0 ॥:002॥-2४५ :ऊषरायु एड ३१७ 8))7 १७६]॥७४8] ३७॥/8॥00५७१8)॥2 (02]0% ॥:842%4090७१ ४3५४१०४७) 3४8 288 :9॥2/3/६ %:8370४23 ३840 8:200270)३ ॥४8)४ (7200 4फ॥२ ।:9722॥) 49388 224७ 2॥४3४००)४७ +छे4७ ॥802॥7 ४४) 80900398& + 2५8)॥७४) 48४॥६)१०३9४७३७ 2४०३)१४०३) ॥७३७६ ४0५ .॥ धछेधि 4038 30४॥५४ ॥2]३७०५४)४४।४४घ)४७ ४.५ 30४१७ 4 ३४६ ॥७ ७8४७ [90%8]॥९] दै।७ 0]%8 3 है; ४१४३५ 8३ .3४४ ४१५ १६७॥ > 3] फीशओे 6 पुरे 3 फरिेडेवाड के करे है होश १४३) - है 2४३) 8 मार छु २७ ) ४०३-महै 7 "४ सका + ७0५ 4७80७१७ 9५४ ५४४ 2)8७ ॥0७॥२४ 2902 ४४ ६१३ 9४ ७१३ ॥8 ;%७0७ १»४७॥७ 08 | है; एस २8१०2 ०३ | ढक धये (ढै0७ '$ #ग्रे १४2३ ०३ 8 838 गे 'डि. हरे हरी देह | कये-290

र/शुपहर!भरेड२७ 23७2४ ४३४०॥ 228 ॥३)६ १७४)॥३)४।७५ ४७ 39238: नरेरि ॥22 ७४७१७ एए०४०७३७७ ३७७ ४२७ ७३।७॥०७७०१७ ४३]॥७४६ ॥]४ कर « ग३े।£8०४ 830005 ३७३७ ३|२७७ 42४३।४४ ४४७०२)४२३४२)१७ 39७0४०७ ३॥७७॥५४७३७०१३४७४३ .७॥७३॥४७8 ६२४2४३७४२:७ 80७ ४७७ 4 #४४ ३४४३० एथ ॥00+ ३३२०७७)५७०४,,

8 ४३७०8४ 90७५8 ४७७ फ्रूशिक फमरिडेक औ४ दे! 9099209 090० २४१२९) श५ झुल्एकम्थ:पि छ7०१९२४७ ॥७७ ३७७०७ ६॥६४४७7९॥६॥३)५ 32))2/६ ७७००७ ॥०॥६ मुफेडे ॥एहेशि४१)2७१७१०७०६३ ७४१३३ ४2]०४७६ 30300]9%5 (६६ ॥३४॥॥७५॥७-४१४ ५9४ 8 0000ए-/ै४४..। ॥७७६७२३७ १६४०४ ४०००४ ६0% 0] फ्रे४४ 7228४ [05३३ [७0 3०००४ ७७ 2000592|20 00%

है ४॥200७॥|२४६० 45॥॥53]99॥000:02/6॥)8॥0॥४ हे 0 गे है४७ | 80५७ ०५ भम१5छ७२)७- ०0०). ५७७५ 20०२४ 2४ ४४ है ॥2७ 8६ ॥४७ | 398४ ॥३७ २७ 3७ 5 ४७ 8 १४४४ 8प८ 285 3४७ २०७७७ 8 ७:७७ ]६ ४१७ #29 | ३०8: अषक कि मरते पही५ ऋछे * हम), | हर है 396 ९६ २५ (६४2७ र|ः 2०४२८ 8 ७७३४६ है शैह8& 0००४ ॥॥०७५ १]७॥७ मण् & ६ए: ४५. है 20980॥05४ ॥६ 2% ।४--:०४४७ गरशुए॥४०१902002० हुए :533॥280४२३३०२७ 2808 09909- ३४ कथ८ (2 १४३७४ २॥४०३॥१७४ (८ 2] 3४४ 2]४४६ ख्प्प्ः शरर (पथ (422७ 2५9॥0005008 [397० 20 यह 20० ५0एए2७ 8४ (॥0०७६ 3808 ३:५श८०७ ६४४१०४७॥४ 29008: वध एटा इपी॥00क 49 इन! 5 200 872) 30७४ ॥0705 कै हऐ७ 20 !& ४8॥ 2 ४3 4५)282॥0] ५४३० २७ ७॥४ )३ ०) 2 १४४४॥ 3 ३५४७६ ८) ३३ ॥200६ १४॥॥५ १९४ ४०७ !२ 6ह 5% 3 छू 808 ॥७८॥४ ॥॥9॥%8 ॥६ 9७७ 3०४ 4३05%-:०॥६

33४4%9]॥]५ कक

॥. है कंधे ६७०००३२३०४ 2)0७ है ४५ ॥०७४४७६-०५ & ४४ इथ 2४६ ९३ ॥]03४२-२०॥॥६ 3 दत७०१छ०5७७४७७१७):७ फ्0३छ गधे ४काया३ 0४03%2]%99 0:959७ | २१ 4092]७ ८४ « 27% सिक००)४०५:७४५७ ५७ 2००२) ५४७ पध9:22000950४१०-।० एश:ए 298%9]9 ७0३ [7:2४ छफिरे'रे ३६०४०७ ॥६8 ॥र]79 ॥७ 9२४०: ३०७ 8299« >2)9]200 ४5% ४७४ 2238 ४॥25१0४ १६४ 39०४:॥७६७)०४०॥३ 309/20॥00 400027६ ॥४३० ४६ 9/0588॥>>005]।५ ॥0६:६२४६ है; ६२५४ ४७४६ 205 !39७ ५७७ ७५४ है ३६४७४ 2१ 2४0 ॥0 से 2 १5 809800-202000:08३- 9:0४४४७७ 3७ ३5 २४ २४% | है; 8४ भू. ८७ २२४७ 3७ ॥058४3 3३55 00:39 9 3४%४५ ' शयू> 50 #[ह. 2७४2७ 8 ७०):॥६७७७ १७१ 0५)७०४ ६६॥:४-:200६ 2॥७9।0%000929४ ४0७ थे ०२))७ ३४४४ ४१॥॥३)):४७ 2४२१४२:2300020074). ४५०७७४७ ॥27२3४४ ०४४ से ४8४७०३४२४३३४ ४४ 9६08 ७8७ ००७।३०७ ४७ ६०५४३ शग्)७ 4६॥४॥0%४९४)३ 402७ ॥५ ६६७२७।२०७ 0२६५3 ७७३ है? 8:93॥0७४२ 5 रेस). रे 923220 29 7200390202)2033)2% 8535 22005 70%808 ०5७ ॥५१३०४५ | ५४२)०७७४७७३४३-७ ॥00 3॥0):0)प3े रे) 2६१३३२०४ १0009. 8:3४२३। 72४२) ४७४१)- ४३०४७ २४०६१४०४७४७००/७ 3 2मेप2> भू०2६ ३२०२ ७॥७१४)३४०३ ३४५०३४४:७४७०३७६४४४ ४2२॥०१७॥:ि08220॥20॥38|2॥00:0०+30 ५६धट३े है ॥५७॥॥६ :2७ ७७१७ ४२७१४७७० ६०४ ४३३ ४५१५६४ >धु5 #0० (६ परे ४७०६ हर।8) 30 ६४0) १३४ 0000 39 १5४ १३१०) ४०४ ३७७७ १४ 0:७४ ४: ६०७ 2६] [| 00। है. ॥२३ 38 3 र॥० डे. | २४0०७ ३४ 5) 3 है. ६६0६ 208 0५0 'ऋ#ऐ- हे हे ॥६ ४0७ हे ४8 १७४०७ 308 [० 20-:78 हि आा

22 ७3832 790278 227७ 9 29-0040. 00४5४5५

नि ४8॥४० ड॥& ०७ अपर इश्डेु सह ४१2 2७ ४८०) + ( 2०६ की] शा श्डिकाल] 0७ ४३॥॥७ ) १३]2४ ४७ 03४७७ ४४४४३७ #. ४5999 ४४ ३७४। 20धि८2॥ ४६४७१ 390503 ॥2॥2% [४श७७] 03४2७ ॥9990 8४४०४

9 ४३७ ४७ 48 ४०४६७ 2७४४ ४9 592) >४ हा७%

४७ ॥७ है #+४जक है 0४६ पा था) मेड 4७ 940७0

25५ 35 8४४७ ६४ ४४४०७ ४8३ ७४ है. 909०७ ७४४-६०॥७ 2090७४५घ२४७

320 /077/% मुबकरड 2829 2]७७४७ ४४9४8 ॥४॥ ७६ 490%]250 अशोधिती मी>ेव9१७४७ ७४. 49॥9:%2%व० - ज्रेछशरओ...|॥५ ॥४॥ 2022002॥22)॥०१४१२६॥-६ ॥202] 3902४) ॥४०॥४ ६७ ॥११५४०४३)५ ॥७४७१॥४२॥५ १६६ 392%))03]।.8 0 है के ऐसे 802 ] ४828 ४० 'े हुऐ& पथ 23४७ प॥00७ 8००४४ 4५४ 32805 # हम 8५% डे छः 20०98 ॥७ ७४७१४ #डेडि. ७३ ४४६६ १२४६) थे ४५ है. हे 8४७४७ ७४ २४४०७ १४४ ॥४६ ६२ 3४७४०७ 3३8७ ही है; €ए 8००२७ 8 ७४ ४2० ४६ 0॥:७७०० है. ॥२क 209 हे 8४% ४४४ 4. कै; हेड «८ मि.४:४५09. ५» ४५५ ६४४ | 20६ 39 3४०४७ २३४ ९०७ 2५५ 2६) है; िडि७ ४४ पक 8४४ छे है आशक्े फऐ5 00७ 9 | ॥६ )99 ३४)७)-०४)६ राणा 2।४४०४४४७/७॥१४४ 228॥2802०७ 88 | ४५०७४ 8902%]।६000७ म॥00008 कक 3घ०2))६७॥5 ७७-३३३१०॥०: )३)॥0४१०२)४ ॥२०४)५७ छ5 ४9 एनगफ हुए 0७२७ 4802£2॥320009 :39022॥6 (६५ 4७४७४ ४३ हुए ४४३॥६७)४४७४८३)७ (५८% ४५४४६७७४।४७॥५ ४७१७४०)४७ $फिएण्एणायुर हुई. 75४० हुए ॥ज2002भ2% मृचरेके 5 00 2९१8४४909029790 :939 ४23 0/0492038 2003० ४७४७ ३७०५ फशप गो्केयो स्‍स्नेकर कर 0००च२७ ४१29 2290: $ ४४४४७ 5॥2/00075 409॥22] ॥६४४०।४ ॥१णघ्र 2280 ॥0ऐटर फट 32202 ॥00002॥%

गश०१०४2॥॥६ डे

स्डपडडजरओ 2 » 2२०४७४१७ 3७०७ :22%+३ ०७०३ सेट 489७5 :१४०३ 240७ :00538::५७४ ०902]. ६3-१७२४पेर ण्ण्पि 30४५७. 8२७॥ शक) रिशफशपाभमारेव- एफ्युलेिएएए, सप्॥0298०५७ 49 8७ ६०७ [०४] ४४7१५००४४ ॥४१/७०६ एच ३/ 929]७ ॥9७४॥७ वश्तराणिडे>3 कप छ0 4 ४७७ आु७ध्ब०] एप 'क४32 जे ध33 2५3]% 29359) 02509) ४२४ शक हे 43 555 90200॥05 ॥9%६]0थ० 32]3 20७0४ ४५9४] $६४/७१5303७ ॥४७कक5ए] शुफिशयर<७]9७२७॥- ? ६०७७ शफव७७०३ ( ४७५ ) ३३४ कया पेडडफक०७७ आफ 4 जप] ०5 पेज न9४रजध पज४५ क्यू ००३७ ६००२७००४३)४ + :७१७४]७२, 2०४ 9 ॥४३७४०३२०॥० ४४८ ४/०४३८०७०७४ 228 #%३)४ 8४३) ७५ ७४४७ 0॥०७६४॥॥४४:२४७ शुधपरत ७२2५१४कफ्य कृपफेशड ५] # > पी52०8४96 8५७४४):४फ फतह छुडछ.... डि3076 2०७॥४०२१४४७ १४४४६ (०७ ]छे४७ .* ॥ज है ॥>ै0/. ध्यदा'] ७० ३१७ ७१७७७ ४४४३ 8 ६३ 2१ ४४ ७४ 8 ६७ ३2% ४8 >ै[03 ३५७ 08 ॥धढे 55 4५ 26 ४9 2705 4 ७४ १०१७४ 24७६ 32 ७४४६ & दो 4९ कल ००20-:०2७ १३॥४७॥१७) ४५४४ 2992४४४+७ ल्‍282 02 ५४६०४०००४३४ 78)2000% ३७०७०२)१८४ ३६००८४४: "४ 48-027202॥0290%. /949% 2002७ ३2००१७ | ४०१५)७४४ १0030 ३: नुछे 42)208 ॥6 ०॥७४०७३४७ ७७ ४७४१४ ४४२००) 93908 ७९३ 909०॥॥६६४३)६ १8०९) १९४३४ ८४) >२१४० ।7%9#6%४०७१। ॥६५ ॥०७७४)॥ शेड टी. ही है; 3७७४ 22% 8 ४१४०७ ३१७5४ 20308 ०१ ड०७ है है डोयुमथाय है ४४०8३ १20 है. १णसे पाखयर स्क हर अर है हे ३७ एाणथ] 205 है. गत 0४०४२ 2० है अं ०४३३४ ४७ व४७ है, हुड७ ३६ ९४७ ४५७ २७ ४४ 3.8-408 अशडि।239४ ४३०४४ 8४५४ 090 )शुऊ ८8) 7४083 :४४७$६॥ २४०१४७१४५७॥/॥४३] 2०४६३ कल न्ट्ज्पुणा+

रकम शक की मर के मर पल की पक यह अमल अर अर कक

गु.8३४४ ०02%39 ४9%2 ।2]& 303५ 70493 रक्षा 58 8९१७४७७ ३४७ ॥२॥ र902%33200 ७७0५७: थुथन्क्षएमक शाम ह्टे4७ 5४७)७ ४४॥७)४४७॥७३७४४ श्थेफ डक शव छा इमगियुफय सिकु2१७ १७७ गभूपयर॥थ कक गिल गिरे &80३39000:939923)॥२४2%४ 3३४॥७४४७७४४)७))३ (| मल 4४७ ॥४००३]७१२३ 2३१०६ श्ष्यि २४७२१७ ७१४ 209 32६)४४0% क्र पक [2१४४७३४ ४&४3० ७४२७. (६६४०७ (2]8/87/022 35% ॥०४॥ ॥/र0३४ ६४१४2४९ 254+ 28093%02०%02)8)२) )५०३॥)०५ 29४ %009)20२:० ॥2075]9 )॥०४००७ है; १४६७ ४॥४ ४४०४ 2003७ हे #क है ७७ 2085 )ऐ 2०8 एे है; 2३४३)४ अक है| 83 नों8४०७४३३४ शुल्क 9४६ हमे थे हि. हेडेक ॥024 30908 ( ॥७४५ ) )३ ४४४ >ए७ 23085 909 ३७४ 085 ४४५७ ७४५. है; 22% ३४४३४४७ लेक 398 एश४मिरेमे हे हज ४५ | है. ६४५ 29 :॥७४५७०१७ , ऐे& 'है हे हर 2४ किए पब्माल 27% 2 १४०७४४ ४फेके 285 3७ है; टेडे2 202 ए]स्‍क४ # मगथ 29 है; इनके ॥98 3३० 22008 ६०४७६ १0 98 (४ 9७ ॥४8 938) हि ४220 3४३३ 33% 090040-239४ के है; फेणरे) छै8 82४28 रे) मिड ॥पसे १४ 8 2%0॥:%2022 (88६ 4५४ 9४-:08 शिशु शिेतछफेतकरे 2४३ [9922000020 4 8 १३४०३ (4% से जय है9 ७-गर5 एज डहुमके 9728-७४ 90७ १७४ ४8। शुणप्णार०च2फ॥ ७०४०४॥७४ ॥8.. 00॥2-७.20208५७ )08 ॥20892)/30020%0: छः 5७ 2003 3७४ १०४॥४२७ 3७ | ४३३. ॥४8 2१६ 22955 :3702१६ 337852 ४२३४-०७ +६४४००४२ 0]

फ्मक अप इदेयारश) हु ध्यक 2तच प्धप० ५2६ ७१३४ 330५ २७ बयक जये वच अेधावन प्न्‍थक 208 बे ये है ॥07४०३९४४-:८७६ >०४००४३४४६७ 570० 323 ४४२००३२३॥७ 0५४ )॥४४५३७४१७१४५१४४०१८५+घशडे ३७ १३०१०३११०३०॥३३७ 0932 क्‍400०7२०४७ 72६0 9५४४३ 8४१४००००४ | 587७] ७६ ६9 ५७४७ :४०४ >४७ :म] 8220७४ 2579232०4003 8 ३१॥६ 2:9/00224/80%5 ॥७008 $ै$ ६३ 87/)७४०६६६३॥६ 822000५ ६१०४ शशि ७७ 42४४ ा०े)४)०४)७७४७)२४ एश४॥ ह20)9 ॥७०५ 2390 928] ४0२४५७ ४४ हे आका9 ७६ 85 ॥39); 88३ 23७ 2035 फश३ ४७४ 0०५४४:४-74 ४६ & 2५8४१ 2552 ॥॥0६ 8४७४१) ७६ छे॥ ४५3 है; ४४३३ है >भ्ाकांट9४ ३२५ 83 28७४ ३७४ ७20 ४» १६ ४४७ 8%-3 4 2७४ ५४ 0४४ है: 28 २४ ६: "छः एफ जे ०ग 8 2३७ हरि 8 ह£ 809 के 2३३४ हम हरे है #0५ ०१७ रए 2६ 4 5५ ७४७ (4926550७ ) 08 2६ ६४३४ 80४ ०) 2०१६ दुध्यर है (६ 7०७ ७2५७ १७७१७ ॥४०३॥28 ४५.४ 93-:०00 ॥3३)90६४७ डि॥२७३७४३४२॥५ ):०0002090५90720:9 ॥2)४। म2०२)३))।22७३/ ५8२ ४2७॥२ :३०२१5७:१७ ४२४॥/५॥)७ ६४5) ४४४ है, 3०05७३७ भ३४२३)७७ सर १०४७७ 72020%0४ | ध्थ्ण्ड्छि श््ः है७४४९ ।:४०४४६ ४७ ७.७७ ७॥७७७ प्रद्रआ५७१७॥ धड2०४४ १) ४२४१६ ६४३३ 8॥0% जा 000%0:0%७

3४०४५०७ ॥६४५ :॥38) ०४२१७१४२०४२३४४४४६०३५७ गे ०४३६६ ०७॥४५७ 5०१४ 9295 (६७४)४४५ ७४ ॥203७२०/७)।०॥४०७ 20% ६+४>ेशुकय॥ ०0१४४)७ 908५४:७६४४ ६४७३६ 7ब्छे यूज

0] -स्छ्म्पप्प 5

"2 ६2३53) + 35505- 2+#०प५ चदाएएईँ ##ा99 03५) ५5७४७ है४ 0७ १)॥४४) ४४ ४:)०४६ दि ४कदाएुड 057७8 ६०८७४ 3॥2+7४एशडड्यडे से

है हैह ६0७ 0५०६ 20 ४७ ४50७७ ७९

बस है #६ >अ ४१७ २१६४ ३७ ३३0 983 37४० २9४ "कै (५४४७ €॥

म००७-७७ 4७ 42% ॥8 ३४8 4९४ हे 8 20.०->) 8२ 2५० २७ 39७3 ३॥४४४६] ॥४ 9॥४ 9४ १६ 8६ 20 $4७ १६ ३४0७)७ अ्डने 4४80 3७ कर बडा७ कर) 89] 8१ ३६:२७ ८७४ ३७४ 2]355 750 ॥08 ( )०३७ ४८।७७] करे 3४ 8४६३ है. 0)७ भःह ३85 ४३ है ॥६ दा०5 म्यड है 30 ४३ १9, ६७४४७ 8 78% १८०४७ "७5४०७ कह 'डाद पढे पुण्फक ध६ है 5 है [६७ ४फरे)४०७ ॥93४9७-:०॥॥ , 3 श्र 422०१३॥४२३) ४२०७) ०7३४०४७ 3 एड033 ४३४ 02 "४३४१७७०७७8 . 2928%8 ४2२३० :8६ 20425७8 ३0३४७ १२० ३7०७४२५पढ७॥६४॥४०४६॥ ४४४ ३0003 25]08६.. ३२२३७ 07३४ ॥9फ | मल फर]. 88४ खारे७ ७8६ 2082 02)805 ३४0)४ ४३२ ॥0७%

एश ३०२४४४॥ ४२४३१ 30% सै९६७०७०७४७३४३- ,0४0४४७ ॥५ऐ

गया 4॥५७२०४००७ ३९७३] ७०४२४ ४॥७ १४8 ४४६)४ 2९४५७४७

"४ 4७8 ॥)२४३] 8७0842408 30:%३४७४ :४६)४ ॥2४>०:७०फर३ /

४३३०७ 02७३७४०३२४७४॥५१४७७ 8४७8० :0७॥।७ ॥४7२४३))४४०४५७१:४३

कै» 8००३४ ॥2४५॥]७/३७)६६ ल्‍20305४ट

2४५७७ डिक ५१७].४४६ ३४४ ७४४६७।७॥०))४ पु ॥है॥॥ छह; 2)॥७ 0300 #>ें४ि 0४७४४) ४४३३४७ ॥६ 20३७ है ३४०४४ |? ७१8 ०४६ %8 0]0 है।श( ७४४ ६:३७ ४) 7१७ ]७ ?े॥ ६७ ८८7 3 है 8३१ ७२५ ७8) ६3४७७ ३५४७७ है २३ २३७० २३४७ ७७४ , . "४ #2१ है हे #७३१७ 3३708 70)00 ३६ ३०४ ३३ के मजे ४-+६ ह॥७५५ 4003४३४ ॥033४0६83४३२४४४७७ कटे

"02४४शुफ्क 8802५४३ वी ४०१३१४२७४ 3७४२ ४०७ इधदेएटे20)

"83५ ४६ ))४ ३४०६॥७४१४ :80039४३ :929/:002) 8403% "२४ ७०२॥४७)० 2202७ 2) 2७ 530200£00७७ 8५५ ७७४ 4] स्क्ण्फुपछ

>->3+ननक-+.+»०->8>००००-3न०3>>>८००००-५०+०-ब++++- +० + केक

हु कि

4 छड05 ३2 ४०-७७ धएपेड ७»:७७ #+»:४)२४७ ऊन 2595 )005 949०७ 0९५३७ ७४४४१०॥ ३३०७००७२७३ ३७७०७०७ ७7६ ३४३५४ ३७ »॥2 ३५७४८७५:४)७५१५५४७५५०४०६७)४) |) ७५७४०१७) ४४९६४५४ ।५७५७:४३ .७४०)०४७ ए?०८०]७) ४३0७ + फैला. ह७७ ' 3४४ 8303 ०७मज ०] मेक 6 2 9, ०२५॥७३३४७७४३ज पक पकाऊ5

गत पका [स्कजोीश ४०७० ४िक] एएटिचि ७००४रेके 22०७७३७७७)०४४०४०७ ुः्जेशनि5 है५॥ बेड | है; ।४ ह७ 2५ [3 ए05 २०४ १9% पट »0२४ ३४५ '२५)२७ ०१७४ 25 ७४5३. है ॥9॥3 ४५७ 2७३ '७ ४७ 'ज५ १५)७ हव३ है| |शसे ४७१७ ४७ शो कप) 2:७७ 307 ३५४५७ ४३२प५ ७४०४ 99 2५ 20 ३७४ रे ४७५७ ॥299छ७ ॥02 2॥9५5 8४ 229%%-७ 2३॥0039 29५४-०७ 29] 9३ ६॥ हु०]७ 3७०५७ +०५७ ए३ 33७ का १०)६ ॥६ 2७ 209५२:४७ |६ )) 292३फ%% ४७ ॥0 ७७ 908 ७७६४४ फत। ७४२४ छै ७४ ७५७ 2१ (५ 2०४ 50६ 2८४ २०७ ४७ १००७ ६७ है #ए५८ »] है 008 + ६२0) ॥5०५ ॥॥०)09 ७७ 0 ४४७७७ 700६ 8 ४४५४७ 903७ ४४२४७ ३३ ४6 है; 9 ४७ 2)88 >0७ 72०७ | मै ॥9५१४४४००४ है; ३०५ है हिए<७ 8 ४४७ १४-2४ ४०६. 25% ॥४४४५७०४५)॥ ॥0) )2)2)६ (३ #गेक39233300फ्रे३फे.- 3३9२५ ७५४ ४६ ४७)७०२०१॥७३३४७७०७२४७३३)७५ 208 32५४३ ॥39१ 8६ ।२)४४ ॥05७-2७३ 3४४४७४५) ७५. | 3१! ईै09%:3७ 2४ :७3४॥2४५५ 72499. ४२% ४४2५-४७ ॥:.0229४ ४. ४०७४४) ३-७ 0200५-७ ४४७७२०४३२१७७२८४ ४५ ४ए४०५ 3४2४०३३७ 98३9900993:७ ४३४ 8३०७ ल्‍98)0% 3७ [४७ [08७ ४७ (६७७२३।७३३४३४॥०१७७॥७४५४७५७७-१४७ ४४१६ पहै६ घर है॥ ४) छह (७ 39०७७ ४४४०७॥० ४0०)७७ ॥७ [४७ 97५ ४३०४७ 0४ ०४५॥292]७७३०)५।३४७० ३४७ गे४०७)४६७७।३००2५३ ।2 १९४४ ) १४२ ७४३3७ 0०90098082-७-)३-॥४०। १8] १०॥४१३-७ 0६५92: 8 छे वि ककइ

>> 4249 ]22१99 829॥9 ॥02%४२ ८४३३७ ॥४0॥ हक खैकबट 2208 आधछ ४५ 20५ ४७ ४१9५४७३ कक थक .४3295२०३ ४४० 0६ 09॥0७ ३णयचछ एल २३४४ ३८0१७ 8४०२४२७०) ३0८ & अएह हणुस्शव १७ 9२५३४०७ ३७8 2] कार _.. | छ्कैघाओ 200 2 ॥0095929000:॥७॥]७००७१५ 7 बदय820-0 2०४ |सेश6४७३४६४४७७॥४२फफे 3 039)22४७ ४3४७० २.४०१७५७२८।२०४ ॥02फ इस ९४०७२७ 93७४ 92029 २९-५0७०)2॥६ ॥7७४०% %2908]22229033280993)00६ ,७४४ 802]00] 0७% 95०७ ४८४ ३४७१७५४७२०॥७४ (६ ४०४ 003%)5१८ 9४8०४ 988 ६४३४४४७४५ १०३७५ ]2%0६४६॥ 9७४8 हएप:४ ७००० ०७०७७७ २४॥४७४२ ।99७७०४७ ४शा०ड 0०३३ 28६०४२३४७७३०३३४७०७५ १३. गया सिवा पचुर३)0३६ ॥0220४2]७ हुआ! हि।४४ ४२५३ १208 0900 ४४७७ 2५७ ३६7७॥५७७३०४४७ प्र! 0). दूड३५॥०३४४७७ प्प्ध्ण्य है अब २२२१६) ४२२ 2832 ॥४४१३४१४५)४४ ) 4६ $ ७५४७४ 02))28६ ॥2५४३३१४७५०+४ 3स5]02]05 ुश्ाएशाक १2३४५२४१४२ 88 08४५७ )0% ध्धा३ +] ७08५ - हि. विधा आुडकि॥न 2253. 280902%:20909% २४०१७:४७ ्रकभण 8५ 8४ 28००8: णए४ ॥७98)08 ॥:७)४४४ ४०७६ 008५ है५28१४६ ४४ 2803 28092) ४(७39402 ४3४) ॥.0॥2५ 2]08 8५ हिरे)0॥8४१ मिे।परार र)208 ६९५३३४२४॥ ६४) 930%४५॥ '> किगीभ]028प8 ॥थ। ॥2%2फे [0 ।2)020: ४५४ ॥2व[:% (सेफ ॥ययुक तप कर 28 ४24० 9508:2330490008 |9०:2॥।७० ३३०७४७०७ ४०।३॥)३३ नी >ध। भेश०७ ५2]॥७०)॥६७ ७० ४॥२ 209९] 302]:॥४२. उ2मकके मिरेड)8३ आ2क्‍053202०2४३२- 009 १३४०५ डेप शुद एज 22009) +पथ5 तक 02272 2299008: 8४४४ 22३७३) ॥02 900 30 शहुभ्री०8 5. ॥०8४७७॥६६ 48४2 33)208 ९४४७७: (४3 अेलिडाओे 808 प्शुणारेश9) ४8७2५२४०७ 080०॥9४८३४०७ 839%20020))|9

४23४॥४४२3 (५ (3

डे नान 98 4४६ 259748 ४०७॥०३५ 305 ४४७४४ उचप्रे श्र 8 ईघाप्य 3७ #श० > +७३273 १४ ४७३४७ कज] जेक टुडे भर एत5८ ४० १७ २७ कै 8६ 79 ७७ खेर है 202 है ४४४ उछे :४५ + है छोड टए) शरध कोल १,9१४ ३३०४७)१ ३७% है ५30050 उजे ४५ 3305 एथज़ वह 0७४७ का शत 88. है; वश 23३ महा) २६ छिड3>0 है; पथ ब्ड३ 5० यए है दो हर भय जग हक ॥गरे रत 8 ३७ ४५ 25१७११॥ ३७ 959४7४7 ४8४8 २१०७४ १७३2४ 8 209704 ३६ मश्यूर।७ ॥६ २३०७ ( 730 ) 2९० २७०७४७३ १09709 237 ( 75७ अछ ३२४ ४३३३७ 822 ओषूसा७ 238 ४५७४१४ 25४7४ 20% ॥॥ 62 ३०४६ 8 08% ३३ ७०१२७ 2 २७ ७०४१६ ७:२७ है ><छ हे म४ ३४ छ५ + ॥३ ४७४३४. ४५७७४ १४४ 08 4% ८५ है 0५॥:४7४ १५७३० ग्ग+ छु 88 2990॥0 ३७४ 07४१ - ४०५७४७॥४ जैक ३808 धणसे ४४४] स्पक ऐफात १२५ ॥08 8०० 2१४७७ ४)0 १५ 8४ 2939४ ३७ 272 १! 0४8 >४8६३०४७ २२ अण्य ४४४०)७५ ।+ है. 208! 29५ ४3४४998 ४48 खके ऑेक2७७ अफरेडे. छिमेरे 29320 3४०७ २७४ 8202४ ४) ३४७ फ] 3 है. ४७8 2५३ ( ४४३४ ). ४. 385 अ5्िएए७७ के हु ४७ छे४२०७४ ४६ & 0:0४०४ 283 >५्क 8% ३२७४ ४४०८) ३९ फै0838 १०38) रह ॥७४०५ सेशुछे७ 308 0७ ॥६- 29)08 )9३०४७०७ ३७ ॥॥$ #थछ8च७ ४४२० है #4३5 ४8 :४3७ (३ ॥% ७४ 335 ४६---4005 2000४%७॥०४१)200002/0 १3 | 2७२)७ 52820% 9 2०४६ 28३४४ 4 8७१३०७ ४000४ १७४७ 3५)0:॥४ 5६४५७ एड 228223032४४४ :४३)४०४+ (७७ 329392०)5३४॥४ २४२७ 2४ ४०३३)७ ४३३४७)७)७ के 20४ 0४०७७ अपर 3 &४३१)७ ४९४७३) ॥६४5४२॥२ पेश ारे) 2७0६ 9४४३ ४७४ 9. २२०॥४५७४००)२०४ ॥5)8]22४275०७२२ १9१४३ ६३४४ :0०श कि 9०७३ ३2४३४ &॥०80२४३३४५ ॥र।हिहहु >98 2०४ ,5& "गुण हु ४०७३४७४२०७ 8७७ ७६]४]2 वाह] डे “शा ा8

33, ४5७ कह पाए है, 0०8४ ४9४ ७9७० 3०0 ि ७४७२४:७ ४४ है; ॥४४४ 29570 £07 >३5 है 3032७ ३७ अजेछे सेडे0७ 0005 )225050908 7०४ छु 2८७ 02 है. ३०४२४ ४७७१२) >४४४५ ४८७४ ३०८०७ 30७ ४७ 9४ नजए5, ४०४७ भा एे है, ७०७३४ ७७४६ ॥४ »३०३७ कोड ४४०७७ के झ्पे ऊऋ। के हमेआ «२०७४५ इफ ओएिफ७ ७७ ७5] 290७४ १७४३ >ऐ के ७७ ॥३७ १७४७ ५५७ 9७७४४ पर 30७ | है; 8४७ « ७४३ "छठ, २९४ ॥230 0७७६ ६६ ७0५ 000 १०७४७ ३७ ३७७॥।४ श8 ७७५४४५ '9६ 29४9 ७७४४३ %रे ७8 ॥2% + है; ॥2 88 ४७०॥७०७ 30७ मैठे 90) | 2४॥05७0७ >४ 3४७०७ ६४ हे ४१४ ४०:०७ ॥६)0 ७०५७ 5) + एडे४ ७७४४७) १७ ४७) ४० ४४ ( 3५७ ) १७१४७ 9 30७५ ७; ३३ 0)3% ४8 ४९ है; ४७ 805 39 0७॥४४४७ ४७ है; 3909७ >७८ ३४ कर 00७5 ७७२ ॥७१) '७३९६ '5४०४६ "८७५ '००६)७ ५७४ 2050७ ५२ 0]0 & ३४१४ २0६ | है; 0२४७ 2085६ ३५४ ४४७४ ॥७४ 300७5 3% ४४:४४ ५४ बे 2३४७ १४88) % +%छ8 १9७४६ फोरे ॥0०७ है ६)0 ५७-०0 808 9०.॥७/३७५७७५७४७४६ ३३४७) शेश्जे४०३७७४७५३४५४.... , 22) ४8 ४४0)2४६।१४028 ३३४ ४99४७३७७७७)४ )3७४६ 3४४७७ ४४७४७५ "४४०५७४७७१४७४४ ॥90 9४9॥:५४२)२०४७७७७४१४४४ २६०४२) ०६ ४७३७ , न्म््छु पर सलस्क पथ प्रता्रशड०.. ७७०७७ 99 702 १२४७)५ 039५७ १2900220०29538:22252202% 722252026 2272. ।7:/2/:2:२२४३४५४ , "९७७७५ |२॥:०४२२ेह 03७७१ ४०४ ४०)४४ 0५५७ भ०७श५३ ७४... ७2७७ ॥% शछा5 ।३७७७॥४४४०७०६०६)०४०६७४४४२)४४४०१४;१३४३२४७ जेट ४0७००३)७७ ४४७ (। ०४७ ) 'ए४ ४००१७४३३१७६ 38) ४७१७७ ४५४७६ ए&७७४७७०४७ भ३३७॥ ५७ ३३७४६ ॥४४४७०४ ऐश ०) 5७: 20०७8 22]७03॥ ५४७५७ ५७५४5] ॥७905३४७१७ ४४५२४ ॥४४ ।२॥४' "४६ ४७५ 2303209 30 ६७७४७ 22)0०%४ फरे३ पे) #घिक 909000७६ १७ मर ४७४७ ॥2)॥0009५9 ३४३३१) ७०५ 88५ गेम ॥238॥0 है:28 "१ 8&॥29५४७७ + &2095१८७७४ ३७७ ४४७):४०७४७।६॥३ हल ४शु नफश३ शक पि5क)३४७४७४४७)४४०३३७६॥७ 82४ ४॥७७ पं 20३७४)४ ४७४७७ ;-॥७)६४४७०७ छ20७७७७३)०६४७७४)४४७५४ |०)४५१ :६)५४ 80७४७७७७४:०४७४७।६ (३१४0॥8 39४2४ ॥६४६ ०? जह्प् 05

>म्ह4 8३ पिए(4 २४००००३२८२/१७१७ ३४४०४ ७४४७ वशर मेश७ ४3४ >#काह्षमयपारे खिला 2292%%:७ ३३०४६ कक ४७१9३ ए2२ ४३:०३ छिकेशफिर: 32२४ ३223 ड48702 ]४७:टपपरेप्पथर्थादत हि 4 22008 इ४ 2 कैगडारक जि ६०४४)४४ + _ऋडितरि, ७२२७ 2292:222:४६४॥७७0७४४:००७७ + "पके झविकिश, 2०8 :०७१७) +32990५9 802 फेर जभक्षकड०७४४ ४. 80 4 2828700०७७३ - (६४४ 28083920 रघन००॥००:३ 237७8 28४ शरद गदुथ 228 4 सचुम+ छेशेाणा हुक ०७ ३४००४४६७ १209 ३४ %७१०४८८४४४७ ७४३४२] ४२४ ५३३५७ &४८७४॥४४३/॥४०१०७। ४2]0७ ४४-७७ "हुआ गए मय + छल0088॥29. 2932०४७३: 0800.82९%-92 2७॥2 /२)४ + 200007एसस२३३४३४०): ४३ 203%:७ 0६ १४02090000७:४ ४7४ १०४२४ ॥#]व्युक्वाओ ( (तो०काफ्राशवानद 5 )9७2४७१७११ +90080॥५१५ 9/22३ 79 ४32०४४:६)३ ४2२20७0:2७ ऐथ॥ 9७४७७२३ १६०७।क३0 ४:४७ 2०७ -3७४६2]॥४४० ६]॥३६॥२ 38)/: 38४३४ 08७ 0200000॥२४ $॥00:७ | ६४७ “0:8३ 20०४४४५|२॥ है॥ 802. 4 ३॥0% 2९४५४7१३४०४४2घ३३ २:०४: १9॥2 ५७ )0४॥:०४ह७४ड3]४०४ &४:४४३४४२॥७३७ 233 ॥0६४-७४७ १8४2 4820% 8220:४0529:७ 02/2 22] ॥३५020५४७।320४४0%॥ ११०००७४४३ है ६६४७७६ ४॥॥४ 8४ (2 2॥॥999%96 ४2४8[9 02।> 9220830/20 :४०७ ४३७2७/५४७४७ 5 | 8४७ 2४६९४: 2; €&४१ 28 2४% ५७४०७ | है; [[:फ 208 4४७ 48000 |६ 90:४७ ९४७ ३४४७ है; एप है. (६४४ ७७७७६ है कक्षा 228 इक. 28६. 200 5६ ५७0०७ 20 4902--५०॥॥६ 209/॥::०४: हर 3 ॥28३)१४४ (890४४802) ॥३४-सके 20:27/%2॥6 (0३)0०६ 378 20395# 98098 8/080:#27%08 8288 80000 8 /:920500095)9॥29 श049%048 ॥६॥ 32242) | ४४५-३॥४ है॥ ।208 8028005 9208 3 90820 ४8% ४७४४ ॥29४४७है।७५।७ $ है. ॥शझ्क अक्ेड 4४ हु ४:४७. 8 सता६5 ३३४ ४७ एथ३७४ ॥. है; पराड़े ४3७ बा है 22)४ 809 2005 है; ॥४७३४ ४2७४४ 298: 3008६-५५१४:३७ ४५ है १७ & ४8 28 है. धर 2०००४२॥६३०४७ ४38 रेट ह0 80०2॥४६

2494%2]6 पढे

हे कर & 85 २६ 728६ $37 ३8% ४० 39 ..ह...0..ह......0.0...0...0........7्त्+++++ म्ध्प | मप्र श्् | फ्ः्च 22207: 2 2-३२ कट |[ के ] प्णे | छा प5 पऋछ) | अडछ न्‍ शा न्णए++ २४४७ | ॥| अकक | धछ) स्‍्व्छ | ध्यडओ ॥| 9) | ४४ श््फधः म्ध्ट गज जब ण्ह्‌ ख््ज््लल्किि्ा पा हुयतयघय घय घट घयचच म्बेड | शैपसिपो न्म्ब्ध |. | पपुओ मनन अनन- नन अमन म+- मनन नमन नल >> 4420 ॥४४४७७5 ४७ [६ १0:८]02/5 ४४४८) 2१९ ४॥४७४७१७ ४४ ४६३४४५)३४ १४४: ४४॥)2१८०४८४४४७

न-+-++ है 020६ 40299) 2002 ४७ 8४) ४:0७) २५४४४ 8(३ ४। >0छ पे 29 ॥07५॥02 //.3 (3 ०१६ है ०00७ ) है; 4७५ ०६8 छो७ छत) मजक 08 है २१५७ ४७७७ 498 2299७७७४७] >2%0:5७ 70 है ३0| 2००१७) ४७ ४»0203)020 >०७ 2४०७ ४३ ॥:॥00 ४१४७ & 2॥5 ३)६ 40४ 2०७ ३७ ४ड)४ ७७५ 80५ २५३ 8६ ७१ ३2० ॥2)%३॥ 4४४४ छ8+ है; 22१ हडछे 3४ 09. 8५ ७१0७ 389. 4 है; 0220 ४0) "७ 4085७ 202) 20 23४९४ ४१ 0)2 3 & ॥20 है; 422५ ४४७७ >9७४-। मग्0)00४ 2० २०६ 75700 ४परे है 8७ है| ॥00७ >०७फऐे २७४ 3... है ४७ १92। है; 2७१ ४8 ॥209 39३0४७४७ ३४७ 8%७ 293--:०७॥६

22903752)५४ ४३४)४४२४४१४ (४५४५७) 99५:४॥३॥ ३४४३४५१०३२१०७ " १308

#) मग्डे ++शेथरे २७७॥०

२७ «६5,

४8/२ 480 ॥2७ ७2००७१२ :2७१०७४५४७४४५०४०७४३४३.

3 79७१४ ७॥७।४ #े ९५% कि] _ज३छ३)5७३७ [२७ 3०२४ ४४३ |४७३०४७४> 7६७. भर सम एछ2),. 0७5०] ४४४७३. ]२फ५१७४२ 302: २१४४७ 7६१४१) १४४०७१७१६६ 3॥१४६0:५ ४६ 3094%0:)४8 (+ 90970०)३॥१८४४ ) ।9% ४३% | हरित ४७७ ॥४६६)७ 2२०॥202॥00% ॥१)४॥६ १२0६॥४८१०७७॥ ५००१९ '8009805)2/002) 2०४७ 3.२०५॥))६॥ ॥70॥2 20%0%६५७४६४॥२७३: (290 ४॥४।०६३) >४४३४४३३. १४0३४ 2) 2३) ४250॥003/2 |४9४80)७१४ 2४:४६१३४६) "05४ गरेडंड20७७)४ 08% ४४४६४ २2२७ 080७0/2>0७४।४४ (४४५०४:

गे हि

प्राश्श् है ७४ खा ९४ ४५ हट 8 ख्६ %5 8 4५३% प्रष्थु भुब्द प्रशश० "है हमे मेड था २४ २६ ५5 &ु (००-44 3 248४ 8/६१४४ :2२४७७ ३83 फरार (0७ फट 99.७० ९६३ ६7०७१072224६०९७७२४२००४१७३१२४७४ 3 है॥ धह2] ००७६ फक्काकक (। के ममप्मथार (०६२) 22% 38020॥0७:०७॥६:४७ ६४६६७ ६७६ (4 रह परेछ 32७ (एंररे ४8 ३९४२ ४३४२ ४१०४७ :७४४२४६ )|9४9% ह. हपिके।४० पुष्प 828 2852४ पद ३६४ :8४॥ ४७ 22मश-भम 2७ 2डि0 4 :52:2॥0: ९७३ 8४8७ :890%॥॥800॥४ 4६७ भ5। 23 5 प्यार १००२ 2॥/६छेाफ.. पशु६४१%) +ये हे शूट ३2 28-१७४६ परे ७३३७३३॥७३२७०७४८ ( फटे (६१७७ ४६४ एक [8३०४ ) +णह१29६॥४ ४४ 8४३॥२४:१५४०/४४३१४॥४७ १४४३॥३॥७ ॥0 30 श5॥0७8४७॥ १४६७४] ॥४२३२.॥६ ६४६ ६७:६७॥२/५ बम इ०मे! ३१२०० )३३४४॥ ४१५ ६६४१६४०७ है, १४४३ 299॥०४०७९/2३ ४२७ & 2228४08 ६:२५ 99]% डे जैक. जेट है? 00572 48 है (#एऐ ४8 2७2० [६ ॥५१8४ 3888. 8 ॥0४5% ॥६ ॥ेश०४००४ रेश2७:०:७ 8 १५ हा... यथवके 4 है; ॥23:4 8४५ 280३) 24 ४020३)0४४ 20७ 3२ » है 80% ३६ सस४ 4 8१४ 2४३३४ 8 ४2४ 302 है. ३६४४४ 2२20७-७४४ 2 29०8 है 78 ४७७४ >छे& ४2203 ४00. |2-0४५६ 20 2२०४ है 800 #धूएे & 2४४ गैर 828 २०९ है ४2 ४0३ है; (४७ सेमिकक5 फेस &एप 2५७. ४४०७ ए्छ।8& ७8/8 882 2932७ ३५४ /११४७ 8१४ हिशडे १४ ( ॥222 ) ४209 |६ 88849 पर रह 29४४४ हैः ४0 १83 ४४. है. ४0३५ 4९ #शअहियु 22७०॥७४ 8 ४2७ "४५ 'श है; 0७ ॥४॥४ # ऋयाए) अरध २०४ २४०४ ४६ &॥43 ४४२ 4६६ ३80 है; 2७ 0७७॥४ छै #ध ४४०१ है 8७ ॥६ ।98007005 2५325% 2७ 9:0६ पैर 80 | & ११४ + है. 2७४४ ४४१६ »७७ ॥०४७/१॥७०७ [६ हेकेश४०७ २०७ 3०४७ ४: 8॥+ ४३२ छै 240 है, 20 >०३े २४४ ४६७७ ४४ है, ४७ ४0४४१ ४४ 22० 24४४२०७४७- ऐक३ 308६ ४5% 'कध का इड 5 ४४ 9 80५08 88 छिपा 3925७ 29325 3390 &8॥8--40॥/5

200%938६ 99

ब्युफदचय ३0 ॥। | जडरए 880:%८०॥३४४०३७१६४७०१३७ 599 ४53६ इघ2फ्य 2०२० ७५२७३ चर ४४१४५ ९४१०३ ३६ ४०५१२ |:०१३ 0६७3/248 $2०/४७४ २७१४ " +358 ७८३) ४३३३ ०]४४६६४ 3२७ ४७७ 2्् 00४: ०७7३ |: %१3727६ :2:०७५॥७॥ सपर३ 4220 ्ापड थे गचव४० ३7025 4०३६ "६2)०१५३७ ॥2]प8८ 85७ 20203%%59॥3539% ॥03५5७॥ ३४५७ गज्े। :७:ट॥२९७७२०१॥०१६ १६४४ ७०४४॥७५)०॥-९१ 92993४०४ 2४80%]970७3५: (३३॥०४ ६४७४४

॥$ है ण्थ्जे ४४१5४ 3४9 200६ 27७७८ 4७ 482-<% है; 2०७ है ४५ 4५

हा अप ३७ है ७२ ४३% 8७४ 220 ४3% | 2: छक्‍्से ॥/3७४७ (जे 8५७ ४४ १०४४ ४:७७ 270६ 2३/5 4 है; ॥28१ ४७०॥७१४४४७६ (00७ ९३ ५5० १०७) छै 403७ ३४४७5 ॥४70% ॥70५05 4५ >300 ६६४४४-७॥॥६ 2१५0७ ०005 2॥७

३६ ४४ 94:3088 2]॥05 ॥४०४॥७ (४० ४५१७-४७ १७:४७ '१४७)४-५४)७ ७७७8 #॥0[00५ 3 287१४ ०५० ३४४४ 2३४२४] १४७ 800329 ४9)2७2॥ 0४ ॥0७१७४४३४७४ ५॥४ के 290१७।६४३ ॥2]0% २8॥ 2३४४६३॥७४७२॥४७४२- ।र]0७ र8॥ 9४ ॥४४8५:७०७४४ ३१०४७ एजए/७७४३७३ क8ुक. प9)4४४२)४ 22) 420900300:४४क२ _ 2॥027%५8. _ए्जजे/७. (00३७७७६ 3 23४:£४७१४७७ 42& 000 #सेड:७ | ३७०२३ 8४००३ केश ७४३ 82 (2४०१ 3प:४3% ५9०७४३४७ ००४ 209300. 72॥08270005 'थि8 ७४. 3)20009 2 ॥श३ 40388७२- ७४०७ ५४ 3७)२४।७॥३४)८०१७ "ह५0४७२२५७४२४ 40092098 32805 2]9७२॥॥४५४१७ ॥॥)0॥0002] ७४४: ४६ -मै३॥४॥४७७४ १६॥॥0090] ॥00॥985४७ ॥४)॥0७0॥५% ६४३ ७4४2४७४४ ॥६0७

+0६ ड॥0५३29002॥2॥॥03५)%४१)।४०४६॥ ७१७१७ ३७॥)४७ ३४७४५ ६५ हे 8२७७२ ५))४४०७०॥)४४ >॥ि00% 2]0309 ॥2)[00282) ॥00॥03०४% /७॥30905 ॥०१४४४३

0 डै 8#७ >०5 '>का50 ४२ %४ ७५ फलडे जि है थं३ है. हुए सपडे २७ ७)94% ४७६७ है है 0 ४४७ है. हे ४४५ दे 88 थे १७ है फडि 30 डछ9 ६६ ४28७ 8209 के) 8

के "सकता

मिकिक# हि पित 8 42228%3: हट प्नंक्‍्काा 4व8725 5 ४०।:१५, ६४३४-६९ सह ॥0:709% 74. //0७:0५39 52. ॥24+$ 7: ४: ७३॥०;४३९१३९. ३० १73%6 हि 3४): ॥5]40:9स्‍7॥5054 4942 ७४ 7972 ४४७ ४४40 585 मचा: ४३]४5७ नए [४७००३ £4४53070%597 |६४४७४४४१:४।७ ४३७. ३9385 ७४२७४ $) १४४४४ 2७॥७॥777040॥0027499४. ४%५ ॥००७)॥६ १४७३४ वी ॥0॥7200% 2 १!॥०४/८६)७७४३ 7०६४ ४४॥:६ 42)7205% ॥9% 0७09/३) &0+0७20०४४ :03)॥207॥0005:2282 9 है; धशर ४४४० ४४६३७ ६७४ 2५ ॥:७॥४ ४६ >0५: ४१४ 8४॥४)६ | है (२३ 28 :४49 ४३ ३७४ ००३७ ॥६ ॥000:345 (०7 है छ्ग्छे 2]8 ४४:७४ ५8 र् [०७४७ २३६ ४७ ४४] ४3॥2 ५-:४४७ 90%२५॥७६३४७१७४४७०))२ 7008 +८)०७(चर१् ३४ क्राडध5 [नष्धाय महाँच ॥॥रशर5.- [७२३ | ए०४क ४३१४ :२९१0४:४ | ग७ 28६ शिरीशि०४७६ का१) 20349 ३९१४२७ 3205 १४४2१४४/५६३) ७५ ७४४७ क्षणु०४११४ ७४ 40०७२७)५७ ४४४ 30५॥० ३९४४४४८ 3४८४४ 3५४०४ ७५) १४७२ नथ्मुर्षध0 धए४0३४४ 32)252)% !५६७०७३१)०७४३६ ४६8४२२))-३७: 0०0 2) 22)00॥2%)09 29 0७८।४ ॥2009० ७४) :8]8 22):%६ ॥2४६७४१३३]०० ६७१६ 2१३४६] ४४४४ 6 है. 2४४ 325) 8 20)8 ३९७७ ४४७ ४४5 22४ 3083 0४४ 490009 ७३ >0७३ ४: 2२५७ ४३ ॥:+०५ ॥980+ औ४-:०08 3 90७५७४७४ ४५ ०७७ २४ ॥5592४४ पगप्यूक३६ ॥90235॥22908 -39४॥)४०॥४8. अकफे ६४६ गरोर)ध मेरे! ॥380799॥22फ १2२४६७०२३)६)३॥७. ॥203057६ ॥29५॥७७ 408२ +>घछ , 998४ 8॥॥७२७५ 298 ॥र२४४-४२१:)५७४५७५ 3 2॥०00025292 0 ॥०॥ :४॥६४ 9003३ ७४ टि] 8 9७५५ ४२००४ ेरे>]४ :४०३)०४७५१)३०४५ ०5 3 है, १४४२४ ७४ ॥७३ 09) है. ९४७ 339 ४७४३]४ पा १8५ १०१३)७ | है; 2४रे॥४६ & बड़े शक * मै099 ३४ ०१४४ #05॥ ७१४ ४३ ७39४६ 030३%)% &

।» आफ

8७ 9७ १४४५७ 'है (०६१४ ॥9% ४७॥ >3%॥७:७४-१८१४६ +23४70०३२) (६ बे

हे

गुड़ गाड “हे 2००५३ है २०० ६४३३०४ 3 ७7% है मणप३४८ 3६ गफ्रेकड पे+2220 ३5० 222४)3 कै ४०३६४ 8 ३220 एड है 20 29 'है ४४३४७) 590६१७ 238 है 29,5 54५॥:%00 28५ 3 वाक्द्रेच्र७ा०७ धरत पड

#॥ ग्रे)ज८वए] ७809३ एच ोिपपत

३७) २७४७४॥६४३॥४ ३७४४० ४०8४७

फ्छ्छ ३2१४ घच्के 3४२७ ४७००५)० ०-०३

7 श््र७७०७॥॥08 कओे७३व270॥७४)३

# 93909)799357 39७:७2६ 83)५% 33500 :203४४7३)

१4292 28]ए० रेप: 2050220:७७ ६०४७ री हू (। सैर >्यतर 8०:08 ) ९०७४ ४०४० २2४ ]घ७ ३९४४३ " हध७७ 8३७ 2७७८४७४४०७ सए 7 क्यशएक 220७४) : खिश्य्ा२७२०७४३- २३३४०७२:७ 520320१७५४४५९॥११:१४४५५ ॥डे१े॥ :४०९३७॥२४२७१४॥०५ ३४३४४ ४३४२४ '2220७ ॥22७३॥ ॥3५:॥७ :॥:0॥0/2७। ॥0० मय है ३28 अयछु७ ४8 ४4७ ४०0४ 389. 008 ४॥8 2७७७७ 2४७ >४5०॥६ ४४२४ रह 8३:90 23१8 ४४४ %))४५ + शडिए५ 8 ४४६ 20985 ५७९७॥७७७ ६७४६७ ४४५॥४ १४४७ ३४ "क्र :28235७/१00 ३४७०६८०४ 4३/$00६ रैंप 800०३१४)४ ॥०४॥ ३३)४६ ।8॥६७७४४७४६ ०३८० ४४४ + मेछ)095॥08 ७ड्ठे॥घ न्यटी ००७॥४॥७४०२

४० $ २९७७ २३ ४॥४६ ३६ ॥४90४४ & 3५४०४ >बरेड शा 20६ है हमे गे ६७७ 20६ पे ७६ ४७७ 8)४०४ ३३४ ३३०४४ 4से 80 'है 2४४९ 7४ 2७ "है ३७ ६०३७ 3३३ १७ २७४०६३ : ८७ 0७७१ 3२8 उच्यूड 7 23४४ है॥४४६ अवे>ड०७ (६४०२२) ७॥४६ ४३४३७ 23028300% नव पुस अश्फनडं ४३१)२४0०४३०४२० ॥3%220॥8823:30904॥

है

है -ह्स्म््प

छरिणः २३६०७ ॥॥ :६४०८॥६०२४४॥:५४९ ७४४४२ | :०००:2707 7 छल हक 8)! छरेए |2)0७ ॥2४७ 3 :7४४ ४७ 32309 ॥20०९०।०५७।४ 3:0५

दिए 72/2३३६१४७५ 8०७४६॥७०७३ 0:2920205 (है230257% 2१४8) ४द०६)४२४७४२२४ १8 200:3948 १०२५ है; ६२६ 27६ ३७४२ 0 सफर 25 3 8४॥9 8 बुछव 09% एज है. ६४२ ह& सारे ४छडे [80:०७३४ पु हे 3५४. 08 वुदिएतेके: ( 4800७३७७ ) ३७४७ ( वृष ) 'मछ5 है; ( 9७ ) #सिए40 १६ लि है फरडेे (॥7२ ) ४७ % ०२ ४० है; ५फफ है 2४४७७॥७ ६७६ हि।& ॥09 200७ एड +970#0 >([&8 सेकडे ॥9%9७ (के बकाए० ३७ 005 ॥७ घर 28-०७ है 3 2४०३३४४४ २७॥४१३॥२४२)॥२००७2४७४०११७४४७४०७७)४३ ए३० :शाप हम छे३७८)७४४४+ (। हे३े ०९ ४१७० ) है)% ७. #॥ ४४४३ ०४५७४४८४ १७८१७ ३९४२) 200898 » भश७३७ ४॥४8% ४३३२३४२१४:४७ ४202, 20 2२ ऐ६७ (रे (। हेड ०७७ 8७०॥७१४६ ३०५४२ ९७ ) 5 « ४906॥9४७७)७४2)४ 2933५9930:0 ४४६५ 5 ५... कणुफेक फडे 2208 )३०॥२४९३ १9309) ४9. 4 8०४४७ 3३)% ४३)॥४)धस ]७४ष्या 52: डधरि)02४३४८ ै+00७॥ ।ट)- ४/१५॥००००४५ ॥॥2/3२३ ४४१४४ ७४९))०॥९४८ ३:४४ फल. 3०४ ॥. भडारि)0222२३)३७४४ ).)9)0205 ४2300 ३७०७७ ४६३)४४७४० 2॥20 मजे ४. २६६७॥७॥४६ 95४) 2४80002॥8 )3४/००४॥220 85 80॥32१793770 /028॥६ १२४०१:६प.७ है ॥990०७)))२४२२)३) फेक. ह्ेश2 30४४९ .83032॥ &॥%95॥282 ॥%%७ ]250909/03 ेवे०े ॥४४॥ (है३। ७४४६ ५७ ०5 है) ०४ ) है; १३०७६ ५४०५ ; ह09४३ 2४ प४ ॥६ ४5) १92% १929) १३४०४६।२ .9॥ १४५ हु. 4208७ ) है. 82% ॥2॥2५ 6 28 9402) ९४०६४३ ४०४४७ 2॥)0७ "५४३ 49) अल 8 ७०४ 8> है 2४२)४४७ 2028 ॥000७ 8:७ ॥६ 0५% मूड 8 (4४58४) 0000॥8 20 »७५ 8५ ४७॥०१७३४७ ४:४३)॥७११४७३ 529%२॥)]5 हि

22८७ ४३४ 0७ | 30७ £६ ४१++2४६ ४]5४5 है ४५४ 0209-०४

3 30०४७१७ टिकट ७०४४ ४२०८॥)०८६७२३०३७ कोड 0 ए.५पछ 829४ ३०० २०७ एें3०

१:४७7८१४४८ 7१४-१७७४७ | ४3220/8 2208 004॥ 26955४7 ॥:09299३॥४४2%४ 9 4४0०)&58 7 22327६ ३२००८ ॥5 ४४)७ 4 8020040258०॥ ६९१०७ 0>॥28७920030229 (२४७ 2730 मर 7290 + ॥:॥28 8४४७॥०७४०४॥४७७।॥०:६७४>. १५१४)०।५:४७३७२)३७४४३ नयणादेक + स]८8 पर २२०००३४२७०१०२४६ 0703598 ७१70,

0808 4७5॥2 9)0७ 4६॥- २४८०७४४०॥-७॥७३७/७ १2॥/009398:5039/:03

॥68॥ ४४४०-४४ >२59>00:59 शर्त ६६8 0॥४५!280 ॥0॥०292 2:43030970903

हश है; (९७१ 970७४ ॥& (है; 8 5%] ४४१७) 30% ०४१) 20७ (३ ४॥॥ हुई) 2205४ (जय 00% १030० १६ (है; 75 0०५) 282) १9529] 'भधड़े 228०5 |६ (8 8-५ 2घ१४ ) 20 ४४६8 8:2]--८१७ 205028/8/3%-30०022३ खडे ए302०0200%/2853029 0: ४७६8 72० १209॥039७8 ॥2%9५)8॥ बतह५॥०४ ६१३ ३१॥४४ ४००४७॥२४७ ४३)०२१७:७३४४१००॥६५२१३४ )र)> बता ६७७०४) ४2]9802॥ ३७१४०१२७ 329) ॥॥982 बढ 3 १४8॥३३४ ४४६ ४॥५ ३३४४४) ४४७ ममूर३३:४ १९००७४३ ६७३६४४७ ह८)७ +०४५७४०६४ 2 0)६२२०७ (७४७०७ 30२३७२१७।४।४ ६० १2/:६ 2४/४०:१:१६ 4४४७७ ५७४४ 20जेहह ३३०४७ ४५ 0 ४४४३४७४४ 3५॥:४२ ७४ 520 ४७ ऐे शा 9 ह:घफेेडि 80७५४०७-१४०४६४५ (7 ८६-प४ ८४ ४६४) ७४७ ७१४2 2।. ई४१६३४२ १३००४: १8 ॥ए४३॥ १७५3४१:३४ 9१७३३४७३११७१४४ 9 _ रद +9५4३ 2807४ ४५ ७६४४०॥७७७ १५३७-२)१४००५७ ॥१४॥८०४ ४0०३ * पथ | 27023४3७७४७ 724७४% ४३:८७ ३४ & 3202६ 83 ; "ह€%0 हे

स्श्रािजजज-न+-त-पस>

अशम्टे० ४४% कोड) ४2 ४४६ घ७३ ४४ ४)॥४ ७३४४ 328 :28१) £ तिल) 5 गवपेक्8:20528- 2 अयुप्७. 20002 733)

आक, मरेडेरिए4%0582308 ॥80080% [28325 #सए३) ३४०४४ ॥3९॥ ४४४७ ै90.22॥2080॥2 (७२ [07०४४४७

।9088४2329%३)०७:३४४॥७३७॥०५ शरे७

! है$ है; #भडे ५७ है; 2४३ 22)४४ ४४५ 89!

ए१७४ है हे ६०७ & मछ5 ४४५. है शुभ 3४ ह४ ७४६ है; भणड: हम छ्द था8 8 को, 2७६ 20० धयूडे 8 १॥०5 ४४ 20 &$ है 22७ १४:2७ 8 १९०७७ ४2 ॥४स 27902 ३६ ॥000/80४ ! है 2 ४१७ 8 ॥४०७३ #डे ७09 ह000४५ १०१६ एस ४४ है; ५४६ 258 48 29 ४४६80२)४४४ छे; ७02४3 है; 48७ ५० है; 370 0700॥5 है; 3 ऋ्र४-॥०७)१६ भा है; शिक्वा+ 204७ २>फेड है; 3४ 02 200002६ १७४४-७४. & 29492/६-300008 2४ 2४४० ४३ ७४७5१)

980०६ 888 >> 08१४ & 2)॥5 99020 ४॥0% है ७६ ४७४७:-:०१४४ 3 #3७) 2909४ ४79३) ३०४ १३)१६ ॥६६०४७२):७ ४४६ (8५४ )20॥9095% इणफ्लथारे ॥0030७७ + 8॥७४- 2४३8४७३३४ 8४४ 52४७४ एफरि। 3स्वतातप्र८॥ 288७. ७७३५५७)॥७७१७६)३४००७३७3:८०५... 2)38.0 +5 2७४ ॥220229४%२४०४ 8)020 इफ298)0900030व२७१४१७०४ ७७ 2 22२) )8]४७६ 9५29) ( ३४७ ४४2४७७४४०१)६ 3शुभथ2७ 80005. 323808 ४६४ स्पूरडे00208)90902%8 ४७०४७))४॥)

292)98 8303ल्‍%080%.22]०४॥७४४०२॥)२७ 'फै99

पं कान ॥894020 ४४४०५) 909

#9॥०३६४।७४०ड ४४ ४७७०७४४४०४६ है ३२०४४ ३३७७७)७७४ >०७ 005 9४ १७४७ ७७ ! ! छुड ऐैपसि७ 39७9 ॥5ध४७४ ४१७७ 350 है, (६ 9409:05 2 ६१७७७ ३६४ ०७२ २७६ १९७४७ ५६०४] ३॥5 [७ 3४04 है; ४४ ३०४८ ॥0॥ 9४% हे धाफ 8५ 049 9१७0 8 3 28 है; २४ पैनाकासुए

> जे प्क्‍्च:रब्ज $0जछ5ु 229॥00%23०)3२९ ७३७ शरेए०5छ अजब) मुजुंधध मेड) ०७३ 2 9७2]७)2009 ४४ + 0३ ७१०७७ » ४))७३६३७ १७४५४७२०३१४॥४६ ३२७०७३७१२॥१०४७ भथ्क 209223] 8, ॥8४७क पे! 2२ 9 9303004 ६७ »00)७)४७२३ ४फरे हल मे यएडक ॥मुए००३ 3 ३.६220० १2) 4 फरअ2002०० २) शफ सपा जद पड 4 म20)0 घ8. 22392 +2)70०. »0१00% 2३) (थे "४७६ 3]2932%8 ४५०४ ४२२३ 30४8 3४७४ 32307 /य0 ६१8/0॥8२५ खफा ४. 2०5) +2॥25 ७३२ 000009)४. 2002 205030%3 2६) 2७७४ उय्युकधध १४ रक8१02797932%8 000003९७) 232) "ज१३)४०७७७8७)५७४३२१५७ ०3४००७७४)२)७४ ४०३:७४ 339४0): सं गयड 22400०७॥७६ 38038 7 ।श४१६ ०१३ ३६७०४ ७209॥0%॥3 शरद व७89४२७४७०४)२)७) १202002027४92]9) 9७8 40७(5034202% "98 ४२४०७ 2३ सस्शफेपेफर ३०७0920222)॥90% (.५४७००॥३ ज0॥ ५0६५७ 2000७३॥३३ :॥७४8४॥55०४४७॥ )30४१७४४॥(६ ४४७ 3७४ १2)» >श४००४४५ 00०४ 330७)०४६) ३३ है ६४ ३३४ 2808 ७०३४ 3०९०७ 0 ५३७ (०५ २५ ४8 ४१७४ ५४४. ( १8७ ) ३७४०३2०8 202]४ ४४४४ ४४ 'टकेटे ७४ कै8७०४ ४००७ ।६)४) ४% ५0८७ पड़े) १५ ४४) फडे 08 2 3 है; है 4३ £/080- 0939 ४७०६७ ( ४७ ) एाए:5७ #णयु४ 3छुच ह०ड १९ ६00६ 288 २५ ४४७॥२॥७४ ( ७७३ ) २९३४४६]७७--६०४४६ 239५0) "मा ॥१२१४१ :४७॥७७४४)४ ३३ टेश३००४६ 2) ह:029:592/02 रैग2४४३ ॥०४/३४४७७४॥२॥३॥७७:४:४॥७३७०७७ ४05७४ 28508 )श] | ढक सकररे [७०४४४४४]३ 'ाेंरि 22200 ;ए३ ४४७ १०७ ]2७ 8 30380%5902३8 पं॥ ३७४ 808३ पट ]॥८४ 309900099%80७0/5)% ४६४ मार. 03ेप७ 0४४७ [डे 00%७४७४४।ट एम अट)2)2 ॥०३४६)७॥ :४)४ #2४७४७ :४४84099७ ७७७४) )०४)॥७४ 'ुघ्े 0०३ ॥७४४॥०४])॥ ्प नस फ्भएत७%

'िुाशक ॥2६४29 फिक्+++८नछ र॥2७ 200४ ४ए४३)३४७ २७४०७५३०- 280४0४७०४॥४ पृथ्शा& जे॥0२8ा०७४०४ 4 9॥26. ५३७ ]9809७७ १२० १७) (205000%0099 8 2७७ ४०७/४॥२॥)०).. ॥५४॥फारे पड

४४ ॥४ (४०2४४ ७७६ [७॥७६ ३७७३ १००४३ 207 हिका>ेए०छ8)४ ७098॥ 4४७४५७।४०७ अप ७९६ ॥2७६ £039७08 [0 3४8५ ६० 22950,2228 !94% ४९] ७239 ३8४)॥००४०४॥ है; 908 १०७०७ ३४१४७ बड़ से 2 2४ अुचसे 208 पुधव5. २६ #0॥7% 28ुद ।३ #फ 2००७०४६, ७७) ४9४ 9 ४002४ 28599 ४०७ ९] है; 9७४०७ १७ ३४१४४ 20६ है; 30३ 303% ४:७७, २५ ३३४ 70030) ॥00% >9 ऐड ॥४2७ कड़े एल्‍के 8६ ॥७ 2009 ४३ 0३20४४-७ ३५४ 3:02%)७४5 ३, रतन है ए"ऐे १४)३ धफे ७४४७ 92 (0७) डे ६२० पथ ४०३ ०४६) ५०३ % ४५) +ै मरे 2७७४, ४00६ है; ह०ेट २४४ (०६ ००७४ ॥8 338 ३३ 800 2009 (सक्श्यथ्ो ) 2४०४५ 3६६ है; (२ से 20 गो. ३६६ वि मे इक मम क्र: 70 पेड हक 220५ ३७ ६५५ ४:४५ 20०७ 8038 कह ४3 (2४५ “280 2७ १2४०१ फछे फट 0. है. नए ४सय 0 के कव७ | १९ [३५६ हे] 8४ 2०२ ॥22)9 ) ४७ १७४ 39 729:0 909 28

१३४ कम (०७७ ०७ ४६३७ ५४४ 00:290 ३४ >05 (है; (रहें 80/ ६४४७ ३५४४ :७४ १३४६ ०025 ३७३ ॥2७ ३७४ ६७ )7०६ ॥200४७ 9809 २७-४४ ५५ (४४ १०४ '४७ “४९७४ १०७४ >३७ है; 2० ४४॥] 90 8/% ९2 4७ )१८४४क्‍०४ 9257४ 28 "है. 28५ २५०)७ ३७४ (०४ 390 )05 28 22४०० 90७8 १8 ४४ १0७५४ 29] 2५५ (४७४६३ (४8 8-०६

/. +. + 4 93७82009॥४%+ ५०७६ | 8३ ]४४७ 0७७७१७ 88५0६० - ३222 0५02/७५॥809230/00 4 20८७ 23]009 2४ | + ३४४ ४+०१३७३७७४५३५४ ॥2॥४2४६ )8४5७. 2020]. 32925 ! :8४३२॥०७४४॥)४ 209४-४७ ०३॥७७3७ ॥2)0७ 0७४३ ॥0|29). ०४४०४ 'है]00 एव एल थे. ७2४०७ 22). ॥७0832488 4 26)4% १४४ | )३]०७७ १४९) ४४% 385४2॥७ ॥0:20 ४20 /९)४४७ १३॥०४७४४२०४७/८)७ ४<]७४७ !२)९ 3४३ "83७2208 8७७8 /४3४४३ ॥20900708250७६)४४॥४ए॥६ 32] 8 :49०श१5 न्प्र

>>ऊे 3०3 ७3७ 39५ ४०)७३) » 20509 ३४१५ है३४-०-४७७ $ है१७०७६ + ५७ +७70६०७॥५॥७४०७७ -5१3३ +:१३३४:४ १४४०४ १७ हे १9०६७ 0)93 930:309%२ : के | ८१५५७३४७३३४७००७:१४॥४४३५४०६ ४१७७ ४: | शेप ३३२७४ ०० के, -७४४)३७३३ ३१४४४: ९१८४०३७ 9१७5५५७॥ #2% 5 है 2२॥२४७ ट्रै३४0४: "७७३ ॥७५)९४५४०१ २४१]४३३४४४ |४ ६४१४ (७ 4:४3::222939280%5 4: 4 »४33 ४७ %।०५2:%33)») 8 ४७))/5 ७]५०७७४३५७७ ॥६];७७॥50%२७ ४७ >१09५७३४७ ७३४०७7७ ४४७।25७१?३ ४६30 9५५ ४७७) घी 3३ ४४४२] ९५७४ | ४] 6७०१] पाफड७ 39४०४४७ ०४४४७ 2छ०्फर)०७२७१४४ ए्धए्ण्र एड 09३४. 2७ ०४५३ ४०१७३७- ४४००)३७१४९):०१)७४ ४०५२३ नडे३०३०४६)०५३))४५)३)४००४ए४ ९४५५ २०२४६१७४) ४४७३४७)५: २७७३ ६)३ ५)।७३४४३४४४७३) 9305 ४७४७ 9०४ 590०)००४४) ४) २9५ ४३ 0390099 9 00350 ७३४ ७७) ॥008 ४:५५७५७७४॥०६ 00:५५ 32099 94) 9७४ )२१३॥२८४३१६ )३]॥४७ ॥४१८४)३१॥५६४ 9३७ ]204%७8485 नम पडा.) 23003 ४४४७ )४४४७<३४) १४)89४४) 203 )2)७॥ बे टै0७०४७०३४ २०८७७७१७०३॥७३३४४४२]७४॥:५७४६]।३७०७॥४ 9297६ 4०४७ 8३४. 22४३७ ७७७॥४. ३४४४४ ५४७४४ ०३१११४३७७४५ 20:०२ ४3३७ ७४४७७) ७०२) ०५३७]३३४०१० ]४8७७ 2०७:ए०४४घ है ३8४७४ २४॥ :४४]७४०९॥ 5४ 2 920>0000 ४92000०9: 9% ४४७ ४७७७४७॥७७॥2] ॥७००५०।१७७४६ 2४ >छऐ 3७६ 05 ४४४ % 3४००॥४७४ ४३४० , &02॥3] , 88 2३ * ४५२) #3% 3५०. 8४+ ४४२)० ४४५)४ छद्वे७७ ००५६) है. ७५ 29४०॥ 3) सिधि सेडेएछ फेछेछे थी पु ३७१७ -, 299४७ >> ७०७) , छिड्ड १७ २0७ ७३७ छै. ४० ७७४ '0४0)५ 9200 3४४४ प्लेट कप # ऑेडिपिमाल कैए. पफरे जम के 2१2७ है. भ० - 0४5६ कक अप है छे५ पशधा॥ ( ७४ ) औे३घ७ 8 *१)४७ ७०० | ३७ 9)२--:३१७ 0 ४२४४७ ३४७३७)४४४७१७३४७६४७३७१६७७७ 3७।४ है] करे३४ ४१७ ४029] 'ए४ श४० शा] एम्ये]७०४४४ ४४ मिट ४] ए७ मे ' नहएपडुका

208६ कशिं+४ ४३४०७४७४-०४६३ र्जॉव ४७ ४५३४८७०४२)२ ४0४०६ क्र झप्रे]३0४॥03॥9७९ शशरे 299202) 203३ गर०9४७ ४987)09 ४७४४ जन ०३ फमममे३८ ३३४०७ ३७३७ ७३0३) 70% ४8] ४१२४ कं 3००)७४४०४)३४७७६ ७७8०३७३ ६४६ ॥003५3005009 0709 ४८ २।४७७६४६४४५ ३७४० ४४४२१ + २७४४०७४ :2890% ४४१३४ ४, 300३)४ ३>०३):०))७०५)॥ ॥०% ४१ सेफ छ०शि७हि७ ४॥2७ 3७४ 32]0% ७४७ ४०२४६ ७४७ 8॥0905 8 जेशिकरमशर2७४ 2० एुग फ्डछे २8३३३) टिक इफमाऋ "विदा #28३३३०३ 3 003]म2 ५8 'िनिट्टे।पेके्वेलि30 '.. एश् 8छ रर६७७२/७०)३४ ॥> 2/+0 ॥०५+५५७ एक है 22 20७ ४8२४ ॥908 40% 2४० ॥5)% 3०)|२ 720005 )७59 ५5७ 9 शाम्द]80 +६ डे 2६ है; ००४ 3०७४६ 320 80 ४०१७४ ॥४४१ त3७)2%83 ७७४।७ 38% 3४४ 300५ 0५ >0७५४७-५०१) मु अ्छुडफव५ *३ ६१ ५... समय इ० ४४ 238 2९३३०४॥४६ 0:६० (9७५ 2एक0०७४४०४७ एशरे४३७४७२३।०३७४:४ 3भ४४२४ ॥३)४ ४४४७७ ४४०४ (गड 0७] ॥2॥00६ ॥४०७४००४४४७३) हक; 29% 3५)॥030%5४ ॥४8४४१ ५३ ॥३॥४०४ स॥0४: हर/900७200)0५४5०% ]॥०७५४७७ 3 ४० ४िडज रे ६०५७ 9292000 ४०४ ०४ है. 02४४ ॥७४ 4५ 9% ॥॥0७ ७४४७ 79 989 'हैं; ४५५ ) 28७४)४ "है; $४६ ३४४ २७४ 0७४६ ३६४ ४०३६ 20५४९॥ 0७॥२४-३०॥॥६ खपदि8॥४४४६७५३ 90%४33 ३]00६ ६७३२०४ एच्क (89 2 ॥20:%])29009]) ॥०0५९] ७७४४७४७ 30 40४३ 4० 32055)3%)ए 0००४ 28४ ४७३७८ ५2४ ७०१७७ 3४५

॥030३>७०४३ ॥0395॥92॥208॥ है; (९ऐ 28 + कि 49 ॥0]% 235 ४] ४७७ 99 कै ॥280 ७) 80 पा ॥६ ७॥४ एक फऊे * 42085 , #॥५ ५४ 80 8७ 3३५ ॥0४५ 20३७५ »* है हर अुुढ़े 2४४ एधुँ8 दफाड कचरे 2७ २७७ ॥00% ४0 :248902) ०5५

हु फंड के ३७७४१ शक २११५ 238 :0॥: 20 009 हि का कप #ष्ता८ श्रक्षुतनेए ऐड शेवएकएप एड है2१ १७) ६५०७2:2९३१०2२)४४)२ 3४४७०७०४४७%श ए्थार्ए७३०७३ ७७७४ द्वा०० ४४६

पथ 8६%) 2) 9 ३४४४ ण्यत ६०४७) औ०६ ७०४२६ २१०३ छैे मै४: ६४४६३ क्या १७5 792]9 «हे इथे है; ९७ >छ५ ३8 मृत २७४ ४७ डे १ए हुए! 038 ४४६ है ७०१०७६ है. हुए २४ है शाप पुप्यड २० क्‍शार &+. 'र| 320४8 ७१४ #२४ ३६ शये८ >गड मै ७७०७०) ४४ है 98&-६॥४५ , 39) १७४६ है? ७७१८ ४॥2 0 ॥६ कबर८ 0४ ६७ 89४ (०४ ३३७ 8 ०५७॥४ ३४ (.४005 ३७ 99 2०४३४ ४०४ & ३७४ २५४ »]४ ३३४४ ७९ २५४ ऐड ॥08 0 09%09-0002॥. कण इ्ाद 7 ४0०४४: के | 8 एय-(/0६ ४७१७ 3७ 2००६ ६२ ॥205 २०७४४ '8५2 ( ४। क्४७ 40६ &ै ७४ ४४७ ७: 22) 97 ४५७६)७ ७)२)७ 2७५ २४: ९४ २४ ए७३६ 2! 9253 है ७४७ 20३६ 272०४ 8% है; 8 १६ 2253 2४५७ ' 2३६ सथ रे) 8:0७ $ शक: २२ हैएपे 20प 2७६ २०५४ + 289 29४५४ ९४ 8५६-५॥ >; 3४ +०४१७७ ३७ 8% ("0७ 0७४६ 3। है है. 02 26०७४ :०४६ बछ) २७ >७02॥ है 25 [४४७ 3७ 8, रथ एप अभय 2 ( ३2७ ३३००६ 2202 20६ ॥७००२४) ४४ ( २५ अध ४७ २0 3७१०७ छै; 3७७ ४४ ॥8:9 ॥५४ ॥७ 8 .2)8 [:७-4०७ 2४५ २७

&80202209क0७४५४छे.. ४०७४४ फछ्छध्छ 23॥0503 फ्र) एण्ड वे उध5ध्यप98६ 2] |०59]9 0870) फ्े:०७४४फे: हफ3/004% #8॥% धडजिकाहार]0७- 8७ ४2७५ ॥5३४४४३४७५४२)७ शुरु + छैप : #कछे]2६। हप्ड ३॥२३॥०००१७४ 846॥2]0 १20५६ ॥|५)३७४ 2) ४४१३, (8॥553 9903 58]30:5) 20 ४8४७३ ४१०२३॥७॥२७५ ७02:3७॥५2॥७ |४३ 8 ४४६ (९१४२४२३७॥७ 00६४2 3७02 )3]96 ॥3409 १७३)०४६ ॥९)७॥४ 3४४ ३२ 0०७७१७२)४४॥६१३ 82) ३) 9%088४:2%2७ , 8७६ 290५ -8 छप02002७ ०६४१७ 89७५२४४७ ७०१७३ | १):७७॥७ ४७४४४४ ४३ "४ ॥39४४२४9 8 ४8 ४१४४ २४४३) डक) 00403908॥ 02७ ७१७३४४७॥ -8 ऐवछे8 80४४ ४२१७ 205४७ 2४२१४ ४छ९ 0४ :2028 :%॥०७६ है न्य््शका

>मपबयं 2१5१४७३५ १५ अश८0।272१2५५ +200295 272७॥१8/६॥, 377 2४०३३ |

कल % क-ड श+5 ८४ ३५७३) ७०४ शुस्टीगपरेए३८ वे ४३४१७ ७४७४॥ ७७) २०३ ४१४५:१ है] 3] 28 * हेड है ०७ हू०))॥ #००६ है ह3२७ #५)०) '४5४]७)७७ 9, ४७ ह70 #)३ ७०४५] :३७७७।५जी)ज३ 7६ सीफस७७ ६७ क०० "पे करन है. ॥१२ 29४8 30:9४५ है 37/:७॥9७03 -- २४६ अऋघप ५0 पैघ३ ४०) पक ३३०३०७)७४७१४७७ ०७9७2 २३७७३५४७१०५०१३:०७३ ७१३३७ १६७४ ।;४४ 708 ३२०३ ॥७730४ 33% ५७ -25340 % कु ड़ 5 32)६॥६ ॥0200;३७ 7 #घ ६2४७०) 99 2%2003:%9 ] फहक ) पा 389४५) ६१५१७४४ 9 ०७)७॥७४७ 33) ६) 9 202(8%४७.५ >गथार ४742६ 09245584)9097+ 9४ %६)9%% १7४४४ :00३0०४)७) 3७ नरेव४33७४६०)०३ 2४2३9) 2०६९१४०४ ५(६८]॥७३॥ 3509)2]033 550३ >0७ १003॥73 9 १०५पले७ 48३% ४९०३४ 0330] ॥05900509033% शा ।92४७)०७४] ॥७2] ४४७ ॥/5)2॥2]) ६७०४४ ॥0 ॥>से ४७३२४०५७ ॥0०-४०॥५॥२१७।६७०:७) कैद + है; 0७ 0:०५ >४ ४७ हह 89 ॥0७. 8४ ॥४0६ 3372 £500 ह$ ४0३))७ है ॥४६४४ 9५ 9 छै 2०:४४ 28 ३७ 2540 (२५४४ ४२०३)४७ ॥७०७१७४४--१८६

208)०७५ १050009 '०.)४ 2 ६४०५५ ८४ ॥००७ ॥2०५७७३४४४०७०५३०७४७७५ म्वक्क 9 ह(१॥ ०७७१७ सधव्वष० ९९६॥७७७४७ ६8 ७३) ७॥४०७४ ४) "मक्थयते29७७७७२७ 2)१२०७॥) १४8)5 23972] ३२४७ 2५७।३१३॥३०३) "२ :७२ ४७२] ३५७० ३४७९५४६३३३॥००३३४२३४०७॥ 009६३ २४ ६००७२१२७ अं *१५४७१)४३१७४४२) ७५७०७ 2७४८७ 32॥0॥ :४9७॥0 8 ४४६७४ ४२४ ४६५२७ "फर्क ४489१। मो] ४४ ४४७१४ ४8५२४४४:१४३॥४७४०३०७५०१३०:)०४ ४४: कफरकि 0 ७४४७ परे]४४ १9०६४ ४७५७ .2४)१७४४०)३७६8 0४; 8१७४४ 89800303४ 900४ ३५४४ #१०७७2॥४३४॥७७४७३ ४५४ "फर्क ४०४० फडव पडएर)फफपेए पड एञ )09१७३॥४६)४२४४०४७२४७) ५५ ॥8 ;४०2४६४३४)४७२॥७ 402॥290)0%0॥॥ ४१६०४ ॥28.9४४४८७४०॥७७॥५४-१६३४ १४४४७ ।)३)४४)४४०१७४४ (ै४8 नगकओे के... कड़े ह+ 7: 5: मिछ ७४ 5 -

एदे॥ है, ९४ &89 2०४०७ [६४४ छारेक 8 है; शुरडे प४ 2६ के 9३७ जय हैं; ४28 ३७४2७ 22०२७ ४४ ०४०४७ "है; श्र ५४ ॥05 (8)0% &0४७ ७॥४ 8 एड ०४७ >पेडे है छेतुन ६02७ फण ४०६ 8 28 हमि७ ,४ 3808 ४०७. ६४६ 00330 2 8 20)० 300 80 90७ ध्यर४ १७ 25॥% . 28४ २१४ ४११४३ २३६६ 8029 ४४०४७ ४) ०३ >ए#. 8 2 है 8200 ४४४५) रेट ६020 222७ 3६ ॥88 99) 8 7३ ६४ 80 री) ७३७४६ (00% ४४७॥ 88४20 )2£%७ ७७२६ 80४४७ पंंग/ 8 2॥0 ५७8 002 ४०४ | $॥0 #छ है. 2४ एक है €*8६:8 0१४ है कैप मेल 2 498 )३80)0: 78 ेए०७ 0

धर 20४0७ ॥, है. 2४ 2०४४ है. 88७8 3५०२)७ है; 20७ ४१8४ ॥६5॥4 [ए 2४४ 28६ २४७ मय 23 ४गुरे ॥०े है; ४७६ ५2७ आर १3४ फू (७ २0७) है ॥च्से 7०३७ रे: ९२०५७ 3खफपडे भय कै) अ्लोपश 2०६७७ 2५ १४88 ०३ %छ १०७४ ४४५ १५४७ सेफ * है 0२३४ ६१४७ ॥५४२)७ कं है; 438 ४७३४ ११७०५ १७४ ५२७ ४0७४ ४२०४५ 54 है १९ ४०४ २४४ ३०२७ 9३७४७ छऐे 20७9४४३ (४४ ४५१४ 3७ है. ४४४४७ ४७४७) ४४ ४७8 80७ 2७ था ४७७४--६०१७ 0॥४७४४७॥१५।८ .9%893 0 ७७४ |७४५४७ ४१४ 22329 8|0%४20200% ॥7९॥४७॥२ 7६00 ४८ ४४१३७ 909२४ ४८). फ[॥४४४॥५७३४४६७०२४१७३७:७६७३॥४४५ )३)॥20६ ॥७०२०८। 32५0000६ ॥08५४२४ 998 ४5 0७५ 20%२४ 3:9५; [9४0७/5॥90७७ ५७७४५ )200 2७ ००१७१ ०9279 ५०७३ ७४०७०५॥०७१७७ ४७2७७ | 0६ क्षपुर:]॥ 8000७: ०४ [३५६८॥२०५७४ एसए/७ 20020५॥ :0४4७ 89385 [४४०७ [वध 00१२ एएि७ ४3928२ 2) ४२४६४।)१४४०४७ | [000॥00%४ ६४७ ४४७४६०७४४ 2१७०७७४ ४२४७२४५४ | +५॥ 2 ३१२४४४००७५)२४० १६७ ७४६७३ ३0४४ )2029%2)7%% ४४७४०७३॥४ ६४००७ ४६२) ४४४४०४७ 005७ )0789॥0]0/ 2200७ [0४ ॥इ२७४2० (2-०७४७ ॥:] ४७ 30४ ७६:०७७३७:]११६]५७॥७४३४४॥४ ४0५४७ १७४०४ ॥७७४६॥४६७॥ ४] ७:४६ ४३२५६१॥]४४५७॥५७४५|४६४ रए३७ साफ 2509 फप्टेडॉड ।2]0%५ 2]% दशक गए 2 ४५७४४१३ ४8७:७००१४०७४७]७१०४७ (ैफभप्र।७छ८ ;४3४9॥2) तैव

* ३०५७४३११५३४७३७ ९४ % ७३) ४३४६७ ४)७ ४७ है

१53 अऔच चने ७० हे ३१७२७७३७ है ११६७ कु ऐै | ७:६३४३९७३४७०७०७७)७ ) >।).«

%९७० * ७:७७ ६७ ३०७६७४ ६३ १3४ १७४८ (००७१० ६७७७१४५॥ ८१७ + ७७

हल छू७७ 5 » के के ००३०३ ४००७ ७३७ ४३2७ ३१३५ ६७३३७ हट

७3% ६१ ३७०३५००%६ ४;७१९ ?१अ ३35 ७४३०४०४७७॥ २१४४७ |७३४७५७ / 9७8७०) ७%५+*७% ५७% क्ृ०३७) ॥७७४४४७०७ शै८७ ७003७ हित

के कह ह४०फक् ऐेशएजहे। 25 0४१४

+े ४5४त७४ हे च्जतपस्थशण शा ०फ ४)

$ ०» + है ७१% ड0 भज ९७ ७४] ४११७६ ५)१७ ७४७ ७६ ह४३ 2:७० ते हैं हरा 0७ ७४ 5२) २७ ४४ ७७ >> हू हज 8६ के 3फ #क ५७ ५०१७४ ह७ ॥2 ।३४२|७ |

है ३००५७ ४७ ६१६९७४७६७।४६ #७२४ ४४३७७ ॥४)५)५])--.)३३६ के दा 9७७ ४४७४ $' 8. #+]97९ ॥2३)।७ 0९)५39)8 98 90 9३0४0९)४ 2234 2] ४९ पे 3 % कतार 24॥59॥ ४१४५३७।7७३०३७)५) 305४) 45% 50) 20 ४३ | ', १2७१३३॥ फवफ्राओ 20.06 300992%)3900)६ ३४७४४७४२)। ७१४ ०६३७ 9४७ 08260 25 ४१४७ [४५ ४38:॥ 22(५4))00॥0०%॥ है म। कऊड्४) पव२७ 0७७ ७६६७१०॥७ ४०७ 22399 9३४ + श् ३४307043:3 354%0४0.99 48. 9४४३४ ०६३६ 0४४ ४2५७] 908, 4359 ४]४४६१०३३४७५४ ॥७४३४७३४ १४: 0030(६७<)४0023%079002009॥ 39६ ४४४६४७॥०४०-४ ६॥३३9१70०६ 5 2::90073॥9705 ॥023/302033 (७४, 8) ६॥053%४७2॥7:9023 7७)४७-४७३३॥३]९७ ७॥% 29७52 %9१3)३७३' छुपे 643222५:४30 30058 ६0५ ३१४०००२१)४९१) ५3४ ) ४५१६) ७६ ४३ ॥५०७७ 38 32] 9७००४ १००(२४०४३४७४७।९४॥: ४७022) ३४५ ५॥६ ३. नम 330७/2१५0७४५)३१४४७ 9 &:50808)20 ॥३४०४९॥ ॥2]४१७५४ "४ पटरे७४३ (5४४ ६७ 32)७ ३३१४३ ४990॥:४००१३॥ ३|६३३ १:70:9% )७ 4४2॥४८२७०४४७७७३/२३४४॥०)४)१०२]४भआ[ूद.. ३४७३३ 400७७१०३४७)५)३ 0५ "2३ १७७४५॥ औै॥ए५ ॥095939॥0% ॥80००॥४४४७४७४।४)७) 9७७१४) हि उठ :$2 9४४७७ [४2६ %३७१४] ६४४७२॥३१७७%०७। 2३%) ४४)५०७५७५०४२४)४०)२)१) )0%० 8. है:१8 38-4 (2

कै३ न>सभफ़ाछ

2. 3

डे 3 १५ 30७५ ४६३७ ४॥4 के "क # एमए ४०४६ ; शा #२३४७ 2६४३ #चच०३४ ह७ 9१४१६ क्र 2७. फोर 290५) ४४ 8०४३४ 2८४ ६४५:७७१४६ 0४४ क्भ्रेकरै४४०१४४०) पिच कार * 0०३ ४3979 0७२ कवघ्वी.३४३ 7228] 9 डघाफओेक.._ “५४३२६ 32220७ 93२३0 ५४०३४)०००० 752729%४40 72) ॥द ६-४६ )० ४७७७७ ॥ध्प)2 2002 9090) हि: 42468 4:23 हु [०४कएशिककिलक + भर केहे 2६ हुओ। फिगर इ७ 85 २५ ४७ 2७. ३७ ७७ 8०. ३६ कण) मरे शक्घ]2 2४ ४७ 38:०७ 4७ 2४% 89 कधाए) ४७२४५ 4७३५ #७ हु 28४०७ फेफड़े 8७ | #धा2) ७०४० 8 20202॥ 20४ +५ ७१४७ (७४७ १६ ४४०६ ' 49:०७ ४+५४० है 0280५७४४७४ है; 2४३१ ४२७१९] ॥89509 20 ६४ ॥5१४७ & ४१४५४ 32:5)40: ॥200) 5 %)97६)-१४३४ [छकर ४४७४४ ७82 802४४ १72४%] १2४) "49२४० 0589 ५१७ ४०४७ २५२४ ६४७)० ४०४ 0७302]98)% 2७ एछुए०७)० ११४८४ ७७ २2७७ ३५२४२ ह४७४३)७४४२४५ :3820302५ [0६६ ४५४५४३४० पुछार]७४० ७8४)298 )20% ६8४६३ ॥६३४४० ४) 8 9492४ ॥॥2)2% |2५७४ १४२२०) 2०॥६॥॥॥६७०४७:४४३ 3॥50920) 508, हट 8०७ ।08/०5 0002] (६00020%/2॥4 8४९ ।>४०४७॥५ ४8४६ ५५:१३०४७४ ॥६०४॥।॥ए कि है ।2] ॥ह७॥ १०१७ १४४५॥ [४८ 2920० 0४2७ 0% ४६ 8४ | है, 490४ ४४४ ने अजे७ 20 28003: उड़ाई २४४४ ४४ है; ॥2५2 है; ॥४( ४६ ई६ 08 /2५20 (२ 0४ है; 40६९३ 3४४-)०४४६ है ४॥8090 १५७ ३॥०॥ 38 १२ ४४७४४ 2० ७२७ ( है ॥०३ ४४३० 2४६८४ /2५१०)७ ४४ सह 4050६) 2५ ७७0 2042 809॥02॥ ३७४ 302॥2)0 2 ॥020॥208 ३५४ 2058 जद फ8 ॥६ 082 है. १४ ४६४६ अपर 22४ 29000 ०१४४६ है 44938 3७४ ( ७४२४ ) ४४०७] 22६02 3६) 3 डै एशओे 85 20878 है. शशे ७४२ १०६७ ॥२)७] - & 0५४ 4948 [8 $858]७॥ 28%.) है; 40:७४8 ५४४ ॥0. 405: 5 3७ 40908 ३.४४७)५ ४६४० है. 003.-.. ८08 2 "20:32

बरे॥४१४ 8&80088949 ४8३3४ ४५१७। ३०:०७ .३१:०02)20 220930) 293 2223/% |५9७ री ॥902 24000॥8 ॥303389949025780 2) ४७२१४ [९ जय र्तरे॥२)०७५ 2२92४ कये३)२2)0 492)202203 से) हब &०॥ ४६४३ #छिएका०७६ एे-28३ ४285 79%053 [उमर ४4७0३ 82 20 १४०७82 ६७४४७] ५३) ६०४४॥७८२ ४६ ऐड |०६8॥६ 'से2 फाशवारे पिएं परेड. डिक के. 9६०४ 22॥ इक 2 कक "कस काध2] . 20022]. टेड!5). थडफियम५.. शा पाडक आशा 22 0४७ १३३०४ |७४४४६७४* |20: ४४४७३] 4080202] ४2223 ४४३३॥92722 3७७१) ३७॥७ ४७७२५ 29009 90028. १०४२४३४७॥७७४०६६४ हें 039॥27% 2)2७ 83900 ४४४५३ ३६:००४६६॥४६६७४| ३६४७५ ४॥2 :.8727 >20 4पश 998 ॥2]28 ॥2७॥॥५)३॥७॥ 72095॥00 ॥2)20 ६३४७] ».॥। ग४ 9 [०8 ४४७४8 ॥ए ॥728]0 2 3७ 0४५६ ॥9985)% ॥2 8४४४ . हैंठ ॥20239॥ ७७७ १9)9॥2/ ॥७0४392£॥% ६।२॥४)

शक 42॥0£0% 99 ४०७७॥४४०॥२)५१७७४४४४४ हैंड 8-० ४३७ 305७)8 ५४ 38.5 3७०४०॥ (ए 220५४2७ 2.8 ॥५४४ ४४७ है; (के 3०६०५ 088॥५ १५४ ४१)४ ९७ ४3 पर्ण& आड़ 9 8४४ ३७ :४४७8४४ १५४४७ ' ६१७ 40५] ७३ 0४85७ 3% 38०७ ॥% 3४ 9% 8 85) ४8 फटी 2 2490९) ४9 2७ डाह]25 ६2७. है 4७&0७२४७ 49: १०७ ४३ ॥2५॥१॥६ 8 १0% 8 29॥02 ॥0० 0०029 “208६ 0£73७ है; /9(8 ॥0/8%४४ ५00॥8 (६६१६४ है: ७१:3७ ':०॥०४६ है; ४३)॥४- ४५०१७ १९४४४ पे रे मे. है 080४2४४ ॥७१७ १७ ४७१७७ 8३ ४४३)०१७१४४ “0308 8-9 9४ है धथक 228 धरे. 0%28 3॥8 ३६ ४02) है; १७४४ ॥४80%७ ॥७॥॥५ # २२:४०७७॥६ "35 90% 3॥9 ४३ ॥00930 है. 0209७ ॥02]9 गए है ४38% 200 ४४४७४ ४५) ॥% कैडे ७3४---४८१४६ 3008028७050802४500202)6.॥ ४038 - ४०9) 8०३ ):0॥00 १७४॥७ एछ४६॥४+३४४ 98५ 2807७2%2॥२॥९ (न 9. 3000%8 | 9४९ #4002३ इस 8४0830 ३४०१७ ४५७०३] 8409 ै।४ ॥08५०४॥॥७॥॥५६))७ 83 ३०४४४ ३00 28॥8%3७ 9४७॥६ | ४७ ॥॥७४७ ॥078 छ2292 ॥&

४०4902)05 घ्

के ३०५१७ 0२७५ # १८च८ 233 ॥5% :93 ४७ (००१४५४६४ 322१६ १८४६ खुटक १3२७ ए५४॥ ४५७३४ &9७॥ ४]5% क़राड 229 [9७२० हु छाए?) ४४०४ हथम रे ह४ओेप ७०७४६ तम्ुणा+ केक रैअ४०३७३) 2७) हे 28 पटक ४३5४७ ३. बकतरका३),. 220) 3 ४०४०७१४०४- ४४४२४ न्टषछएकऋर४& पर हञ%२:४०४॥:४०१७ | 99 5%%7070 90॥ ऐए#फकरछ बरड॥ 0३४ 05003 0082)2 ४७॥९४२७७)७ ४७ 0७४७४]: ७७५०३७॥ ]0//%290"०७%४७॥४४॥2३ गे केडे है हमे ५७ फ्ररेग्राछ एच छोड ३५ ७७ 2७ २७४ 0५ छे७ - हर] ४०४ कआ नए क्चव हैक छू ॥४४०५- ३७ ४५ 85 8 हार] ए्ार७ होश, ग७३५ है ह६ वकरेड७ ऑफर छेडे. |६ #भ्ा2) 2० ४202] 2४४६४ 3५४ "5 28१५ ४७ 78 ४०४ १६ 39४०७ ४०७०४ 8 3290५७४१७ है 22१ 9थ७४६ %॥०9॥॥ ॥0५03॥६ 3४ ६४ ॥:0॥६ & ४२५४७ 0०05 एण[5 ७8)२]-५०॥७ शै[छफ ७४७७ ७९2 [42०0 ।६४७%॥ ४०४) ४० नमय७२४ 9009 ७७. 25७ ४५२२ हघ]०४६ ४07)092% 72७ 088४४ छ४४)२ ।)2]0५ ४४ 22७ ४०२४७ ४४२)४४४२४६ :9ल्‍27300५ 0. ५०५३७ हुआइ]४४४ »७8४2)2४४ ४४७ ७४४ ह20 83०४९)॥७७॥४६ 2४५४४।8)४४ ९५७२ ९४४२४४५३३ 3०॥६]॥४५७३४४ ॥02॥0%) एक] 0कड॥ ६०१० ॥98/०5 00002]2 ६॥५४४।४४७ हु२& १२४०४७॥७१७:६ ॥७५:५०:::५७ ॥5०)8006% 2) पह्छे। ४208 9%] !8७ 02002 : ७2॥६ 402 ३३ ७४ | है, ०४३ 2४६९४ ४४५ नये अिछ७ 9॥8 0250५ फड३ जफत 8४ है 0७७३ | है; 2003 ४४७७७६७ 02% ॥29%8 है ॥8 है; ॥0705॥ 29७-३०४४ 909009 ३७४ 0७७३३ "है १९ #0४७४ ३० | ४2४ 4 है. 22 ७४१४ 2३०४ ॥2५):))६ १४ ॥0४ है १०) 2७ ४0६ 206 809020 ३३४ 30०2)॥५४ 00020 १४ ॥४0५५ 2४६७४ ४008 | है. 02 ५४६७४ >हपेन्‍्डे मंडे ट27:2 5 088 है 3७४ 903४ $8+६ ( ४७२७ ) ४४०५७ 2608 ५.४ ४४२. है १४४३ ७४ पा 238७ है; छशई ७४२ ॥20६ १६१२)३॥ - 8 03७ &॥%4 ४03]४] 3४ 2७8. है; १४५७७ ४४ 3४ 35७55 40 4048 ३४७७६ ४४ है 008-...:)% मे? -ह२४०७१७

88032598७ :५०॥४७७ परदफाऊ 4 2)४४ शब्छ्रा४28]॥29% २७४ शकडै5. 2 [240093099 १28७ 297४६)६293 56]५ 'द।४७६ ०७४ र0४:४०७ 329 3] डायऋ 40929 नी 0६६७ 2४ हडामे१७७ ३५ हैड99 7४०२४ 3200 ४2.9 फेिवे७22७ अ3०५७४५छ/२१३७५ ७३१४६ 79003%03/६ १०३७०७)१३०४६ ।रे३७॥2% पय कि नह] प्शिएकरे॥र 220५9०03॥930/72५39/७१०७ ९३॥ ७७ ७2५४३ ॥50७3७१॥६ ॥७१७७७॥। 2२ (३५३४७ ॥006९%६ 3/#भर४2]590 ७०७॥)२॥७ ७०४ ६२॥७।४४)४४२५३ [89 8 है २३ ५४४ ६४ १४४०७ 4०७ 490॥8 [ ७७४०७ ३88 8> है; !४४ 3५७ ( ४४ ) ।२५॥ - "9900 ॥४ ६८७ 3७४०७ [६ ०3४७ (८८७ है; 228002७5 ७७ 39 धो ६४७ ७3४ है; %)४६ 2४४४७४॥७ १७४ ४७:॥२०३)४६ ५७४० ७30 288---7705 2॥७७।०७७४३४ :82 90 ।2)27229 १0४//8: ७६ १४38 ै4%73: [६६ :800 2७ ॥३)॥:2% ३5७ !'2५०४४४ 29 :४४२ 2) 30 ७७:॥१७3७७१६ 008 [0०8४ ॥४3४ ७४७२३४8।३॥॥६ ००४7 )३३९६४८ २७:४२ ७३४ ३६८७ ७ड॥ ॥/3०४% ॥> २३५ |४।३४॥४ ॥]४)४ ।2])2%23 " ॥98]22७2 ॥७ ७॥॥)+६४४।६५ 92009॥ ।३६०१> हे है; 0४ १७ ४802 0४2॥४ 2088 &.॥2(8 ४७ & 8/88] 20७८ 49 (छ 2७७ 3088 ४0 है; ४५ 5 ३६ 20239 9६ ४७३७७) है; ॥0 0४४८ ४७ 8 ४8७) ४०४६)५ 28 है. ॥808 ४७ | ॥050७ 8५ ७४ कहा ४७४४ ४9 है. ै॥९४ ४४७६ 222७ ४५ ५४४७ 08४) ४४ ४७४७७ "४9 0०३३ ४५% ७७३०७॥७) /8५७0॥ ११६ )७॥६ & (६० ) 2४ $५७ "१8 3९७४ 209 ॥४०४७३४३०४ 305 ४08) ७४४ | 2३७४ ॥॥8७४५०६ ।)8 एश ४४४२0 ४५ 4022७ ॥:09 28७ ४४७४ कष्षाश]>मशा8 *- ड00: के ॥७ए0४१४४०५७७॥७७॥३००४७प ४422॥ &!5॥३28 0७ 09७ १२७ है ॥४२ 29७४४॥2४9)॥ ४3४५) ४3४७ 208 80(9029] ॥8५५8 ४७७६ १900॥093 203%। 9६७ 2]%]0७ ४७४ 2॥ :9020]50७ 20७)७2।७५७४ ४७७४३ ॥:09985 (020|08६ कब 20५५७ 95७ ७०४५) ४६ | ३४४ हि08७९9४ ४६०७ हु४००॥७७ :४00%२]]!६ बडे

पद छा५+ धम्पप दे. ६४४७ है 4७:०७ 3454 2०७ 4 #धसे 95088 ७७०७७, अश्य)क पर. घी फ7 039 ॥75003 एस करा छेि 320 2303 अकएड, नए फ्]98 ३७७३४] एचडाओे 300%॥5 20)055 (34902% ) ७४४ ॥६ 3४52-०४ ३०६१८३१)६ १५ 72% 245:५४3 ४३४)% 9 ६६ ॥990%६ 2% का छू छ्फ्द, 23270५७ ७7७ 20955 28]20 ७५ & ४४३४ 223 ४: ॥0:-0-:५७ 2000०४४७)५४२ ७३) 33४४ बाद > ३०१४४). 0-६७ 3०). ४०४७४३३४०५० ४४. हरेडड] ७१०४६) क्राप्द८छ एप. 24222 2]208 38472 0४02: 2फ2). [ने &॥2 ५३ 592 ७॥४५१७८१७॥ ४॥४४ [२ )8)2॥६ ३॥४३7०२५७०७२०॥॥७४ ४७५३7 ७949302%५ >१ ३९७४ /0७४2७ [४३७ ४र 98४७०) 9७9७ ॥॥722॥६ ॥29)5॥ ४8१७८४॥ 3 :9020.9!20]92 ७३9 ॥४४७७६६४-२५> 2८2७. >०२०)४०७७)४७ ॥)9/६७३:५॥३))००२४३।७॥>।)३१४) ४०३४४) 300४०)४४३४६ 9030:६७/७ 22 ॥0[0:3%४)१६ ३02025:000006% ४३ है; एड ए७३ १ण 2% है रथ 00॥ 8 ४0७ 288 है. &8802 ४: 4४७)४ | है; १४३ ७४७२॥७४४७ ि 4॥0£& ४६ 890008६ '४५ ७१४७ है; >9:४६ ५४०१७७॥७७ है१ 80720 २३३४ 9८प ४१३४५ ४४६७० ४2028 +>े5. ६३४७ 29३ 3७ हु 2७ ३४७)४--:७७७ 299%४॥७६ ४8/22 टुडड4॥2५%०2300000%300 7४४०१|२४॥४ ५३१७४ ३))२)५४३॥७ 42:१8 2270039430:2/६. 22205%522॥94028 2220६ ७४४००)४११६ 23३ 3६७ "288 (७8 ४2 728॥४२॥. ४४:७२॥५४ ॥६ 0029८०४७४०४१४०१]२ 42% २९ ०॥90008020: ४४॥२ ]202४७ ७४२४ ॥9%७०॥४)2॥): >2॥ 2800५५०४] ७६६६ !३७७ !३७२॥७।४४५७ +४ ॥५७छ8४१)४७४)० ०006 डे(:०७३॥ ३४४३)॥2॥४9 * जह है; ५४४३ ४७७ 3५ 2७४०७ 2४ है; 0४४७ छोइव ॥09७) ॥५ "28 /8॥8 ३४० ३83809७ डै॥रड ७७४ 0:202:0 0 34%02% ७५ ४73] 02॥0॥88 है; 3७३ ॥७७७३७ 3२७४७ ४४ 'है; १४२७ 5५ | पषे ४08 3७:5७ ४|७]०5४८ 24% 9/995 २५४३७ ४४४५४---:०

रे >छुस8एव७

2983४४७ ६४४७ मुबाए(9४७ २४४०४७३॥॥७ 35९ हे मभकयुनरीणद ०११) 27 कुक पाल एस "४ ह2३॥७ ०5७४४ (कह व02 209 ]05902) 020. #पडे(37:02]:228 ह६॥४७]४४४] 225७३ #ड2॥2]:20 802] 3७3/3)०७(७४)>४० 20))2 ॥22७॥७॥७-)।२०४५।० 0 3ैहै ॥६| 2५३ 4५०६)॥७ 802६ है ५७७ 2५)2७ है ७७३ 23502 38७ 3६४५) )24% 908 >श& घड़े 20३ 29३॥॥७ 02४२) ७७३ 0७ 308 २५२४७ है; | 39% ७३ 2७8 ४2५४ ॥99039४ शुधड़े 2७३ २४ ६80७ 4४४ ॥॥% करे है; ४४७ 229 20285] #२ ॥६ /०३७४७७ वह 20३ (है ॥३ |६ 2305: एड 39६]2७ 80208) 30७ ६२४५ २०४६ है ॥2]५ १५४ 3952७ 30% 89 4७४ ५5 "2४४७0 है ०9 ३४ ४३ ४७०७ ॥0 80202) है &७॥७६) रे ॥9७ & 8७ 0 १६ ७७ 82७ ३७ ३००28) #<% 2029% है (६० ४३ ६3॥:00% #७09]) आर हुए 4४४०७ |. 03023. (९8% ३९४ 80४% 80. ७३ १७४०७ ६४ & 20 ॥४९॥ ३३ 49:०७ 3३5 (०.६ 0ड॥:|0---:०)0६ 2090%॥॥)५३ (७४३) १०७२३)४४७४६ १२४३ १3५३ |३७७॥४२४३)००४४६ ॥४४ 9३४०४४४॥५७४५४४ 8॥9॥५७७७:३2)२।५७७॥४ ६४२ ४85]॥20६- 3293॥४०३॥१॥७(७७४२४६:](५६७७३॥)२५० 2॥४०३७४:४४५॥2॥20५60३॥४॥६३॥३१29:003॥ /2]2॥६ 22%33१02 ॥//2492॥8५।9 80४४॥22989॥2४2) 20289 | ॥२]॥॥६ 3299330. 9922- :8724 95 # 298॥50%४22२॥ 022:02स्‍202<292॥87]0. 2॥98009/ ॥2]%2॥॥॥:8६ 2] 0४522७ 27:920]७% 2७।॥ (80229:॥3॥8 30202). ।३३।२॥६ ॥302):3:॥ £ ४3४ 2९0 ४2 4 १208७ ६६४३) ॥0३ ४3032: रे299 200 कर ईकयु१9४४०७ 020:5:७ :७७२२९) ७७४८७) + ४४०४६ ४६॥७ ४3७ ९९४१७००॥०४ 270७2७४७ ९-०४ 0200४ 3सेए] थे ॥१6॥ 22॥600०४९|३०)४०७७ ||३े (5 ४३॥॥७४२४३)

१४४७४ !2६॥2 ४३७ ॥॥२॥।६।)४-४२६८ ॥९३)७।५४४७५) 258 8॥08 ॥2४४७ ५७2३४) 8५॥५१४५ छे छः

फ्र2 09७४७ 293 ६४४८ ॥६ ॥४७४॥७६ 3५ ४४ हि 8४५७॥)८5॥८॥ :2494%0] (३५ टेक

ज- उकश ते 2 ]%537 १७३३५ ०?) के 9१493 2 ७१५७८ ७७३] :। अधकुच३७०७ ६१३ २४५३७ ६४७ ३१ ४२७४) ०७४७४००७३७०७१७७०००*,.। है पा 3५)७53 "5 १% 5२३२४ १४३१ )७॥ घटा गद25 २9 22 टकरा १४:अ७ >> 45०9) 5००७ 30:00 » 303 08 2]७॥४०१ ४४०] ! है] 3०:७१ # ३-७ कै २]७२७९ 7:३४) केघ% 5. 5४5४३) ११ | है 5 ४५१४१५४२

3 ह5७२१७॥ ७३ जे प्र७) 9७]घ१९ 5७ ?॥४४४) ४७ 0350७, ४2]५)९ # (45५३) 429४७३७४६ ७४३५७ :9७४०३१७०१२)६ ॥:४४४४७]३ [६४५३

>5३:5 [ अ४) ॥०७०)४ ] ४४१ ॥६४७ 29४ ( [0४७ ) एक: 3 4929]9 + 9]४१४४ हालेघप्र७ ( ४3४१२) 490/99400 54) ।; नह] 4069978)५ 290602७ :४३३)२४४ ७३०४ ४:०)५४४७ 2! अ05% )

॥कैद॥ हफ>2)७४७॥०३। ७॥४।]>६2) :2५2)2030203]

फट] ॥28202200]35 ॥02/02] 2 282५ ॥20॥604:7280208 एलेडे। 4७ ६३ 99 ४४२)१७२४२ ४2५७४७(६-१२१२७ 8४७ £४५5+७ 88 »५ ४७५ है 5 20७ 0००७] २७१२७ 8 42098 ॥8%3% 83 585 ॥७ ४४५)२॥-:८३४

क्र अधणकद03 2)08 ]09७४9॥09॥2|१७२॥॥२ १2४ ४२५४७ ४७ रो +३ ७५७४५७ )20 ॥०४०१2४७२॥७/७४४२१९);७६२१७७४१५ थे ) €ं8 :७.॥६ 792]0922)/7>७8 ॥०३४००)७५४५७

929»॥/2/5॥: 3 ४2 ]॥3॥0003) 72)2 390%ै॥2]

ह॥४४३१ 4805 200 8 20७७-४६ 00॥ 92 ४२ ६:७० ६-७ क्‍

मझाए ९७ ४थध७६ 2४॥2५ 0४२०] ७४२ २७७ 2%५32)2५७.--... गा 3 20७8 %]७४8॥४५३)३१७२१७

१३+फे५ 300)४१७७१४/३७(६ 20३१ 20:902५0६ )0४०७॥० ६७)

78 88 28७४७६५६)०७७॥) 29५) ४७७५2)७१७००३३३७४४ (४०४७५. |

द्वैठै॥ ९३७॥।४४३७२ 'टीडि ॥४ ७४०१२॥७४।

[30४0९)०]30६५३०५॥०॥।६)।५ ३।॥।१७५०॥३ १8७७५

हेहे कपडे 292) 228३

नह. बकह्ा28 8 ॥३)५ ३६६४ 302७ 3१७ ७४ 3५:४६ 8 ४9 4३ ४६। 8४५ ४६७॥8 २७४७] ३७ 489 * है. 202४७७७॥ ४५ ॥७ 98 ५७

३३ 9080] है!०३ ६४० ३४ ३७४ 20॥:300] (७)२ 800५१) 2५४७-५८)

प्र >ससडेमाम5

5 अफ्ाणि2े० &५%£॥४७:)% 2]& &॥2 ४)]03%ऋ: घ. (2४६ शुमाप 8७ ) 20207 उसुड प्यामिजम अम्म्शवर महज हे ४90)» 9]8 ४. है 879728&।॥ फ्री पथ ड५ स्श्श्सफाफ ४७ 32)705 फ्डि 2४ # सुसेा४३ 828 छलछ हुम्मा ऐश 36 ह३#छर्केधर054 2२००)३: पे 200358 !2॥25 शव ७शै८200% 788 8:४०शिका कैति 0 १४४४२ 29+ 20 ४४ २४ २।५३ ४9६) ५४ कह 2०६ है. 2००8 २४ ४४ & £79903 2 248 2% ४2८ ; 208] 20 2085 2५५ ७७६ 39 0:%3 एड २६ 209 7३४३ है; धरे वा ॥00 ॥209)2 ॥27005 (६ >४ #१४२]४८ है ॥७:४:७ है ४०३] है ४० $ 988 00 अडेठि ७४४७ छणओे ६४ 02% ४०9 १४ए: अरे ४५ मं ऐे५ ९२ १०२2 ॥ऐटे ७%] ३४ 8 | है; आड़े ४४०४७४७॥%७ 2० [| फैडिछ ५3 ४४४ 3 4७:०७ 3088 ३६ ४५७१४ ४४७४६) है; ॥४४०७ २३६ ४2)9 ४80७ ४१२ है; ॥२१४७ 489 #५४४४६ >डंद ४४०४७ है; (से , | आए 28७ एज है ( ॥289 ). ४कारए & माय 5 ॥। है १शछ #ऐे४. #हक 22७ |६ पड,229 है. 0 मेड हुछ० 8 20७ 288 एफ 3७ हैं; मठ 2४8 2७ पु 208 ॥2॥9 29 >ट्रेग) सफर ॥७ 89 है; आ५ 82४2६ ५७ 4299 हे [ मकर 288. डे॥559 हैं; ॥गेे. डर ४30% ४299 है; /7ऐ१ ४४00 0॥2)2 [| 80३ हट; ए5 8 ॥209 पर , है; ॥४ ४728 ॥0३)% (|| 24%एं ) |$ 3203% है 0५६2) ( शु०र ७292)७ ४08७ ॥2स्‍)8/: 2%2०3॥६ 3४% 208४६) है. 208/908 05 ४०४७४ ४४०२४) 2॥9% ४४६. ४५ है; 32003 )-772॥ 3290[07+0% 25 2४७ ४४॥०२फ३ 202 ;2]0े (म।2) 82४ ॥ड॥म३) ॥े २४)६) ४00३४५४ ४8)2900]5 १०२ २४४०ए४४६) ४:४७) ॥॥०४ ॥५॥॥० ४६2) ४४१४७॥४४।७४४०४७७ रे] [२2७४७७)४+ ॥४802२0%223 )2॥॥0 0४8३७ :2४॥७४४ छु धरे. ०४ /2॥028॥207 कै $ 2223033. 998] ४२४ ४७)४00227 ॥:29282% ९30 ३) ६६४3 2285 एज छंगरे 2000850५॥९) /84%-5%%229॥ |05]). 27०७६ ॥:७६७॥॥७२०७)॥७)०४७ ५॥2)866]40/8:॥१३०७॥७ ॥॥2]:2॥५४) 208 ६: ७३२४७२४४ हु।३] (एरेरे :23%9/9२)३]६ छ,

-है२३ ४४७७ -- १४३४१७७)३ ७३३ 0०७ 8+०११०१७५ 9:७१0423%) ४८) 9292039 7 933:८3४ ७५७ सी "पिशाए देडितार --- :०४३४१४७७ 0490,2ल्‍2)7७093 | 399 १७)» हि छ2७ ):२ ०६३ 2:45897 ॥)0%00590239 &0200)/0]9 3७ १३१६७

मत आकर इलाका

४3+४) ४2४ 8३ 28& 092 >२85 है. (२६ १७७) ॥:05७ ३७४ ६४४१४ है. हाजे ४०६ ॥७ ए०४ हाछ आप्ड 203098-:2७

278७४ ७३:१७ ४2]00६ ४२१३॥2४ ७४ |ै॥०७)।,

एऋ५ #78 फए१8 25७७७॥४७७४ मययृधधः 20७ 20०७8) करे ज।

च७३५॥४०।5४४ :.)8 :४७२॥७७॥५७।८)३५७४ ४७ :॥0०3 :४०२॥७ 2]. नह 8 २230802890. प्यार 25 90 ॥3209493%29209 ३५

हु

"हक ६७०)४ ॥00055 9४१७ किए ०; है कि 3809०) २703 2]3 ५४ ४२॥६४८१७३७६ 50:52+0 2५७२४ !00॥00७।फहं 3 ४४४३] 32]8 253३ 4 ४20)॥808 0000002)30 ५१७०३) ६५४ 3३ ॥२6ै॥ ॥2/9>)2॥690॥2 )2)20>007209)98] :०690॥920६0४०0४४५०६॥॥॥ ४७०३))०३)॥2] ॥७ह कै एस ७२)७४७० ३७४॥2॥६ ॥०४ ४५)४: & 2:)0६ ७3% ४७ ६४३६ 2080 ४0५8 49 3०2३४ ३५ 70005 ३७४ 3७:८७ है (रे 2७६) 28 90378 | & €ऐः 32290 २४ 73239 १५१ 3४:९७ ४0७॥3४ 3६ ४५०२४ ४९ ०४६ ४] है; 20 000% 4७ 99% ॥२४80७ ४३ 9७ ॥७ 'हो, 8 #छवे।७ हु टर ॥६)०७६३)२॥४० ३929७४०७ 3998 ६०-४३ ॥0४:/०६-..३॥॥ 3 कफाडरफड गा | शान,

है 8:चटेअडि. 30००४ >ैछि /09308. 0)१00४3७। "४३७ १22०9॥%) 00] 950087]92249995<॥ )5॥22290228 20 ३७१६ >४॥२॥६ 320०४५॥॥७३॥१४७३४७७ /2]२] ३९१४ 20०ह ४2 :90२३% कणेए॥७४४७०४३४४७ ३४॥४४४॥७३४३००)३४४४४१७ ४३. ३६७४३)२॥७ ४३१२६ -

॥०6॥ :8२३॥०/४)|४ 42&॥2035)% 72॥20%9/॥50208

#खे2202020 १७४७६३॥७९ ॥0003]2]४£५४7 हहै है ॥२से ७. ॥8 3४% “हसतारे ७३ ७३

६३० दाम ४७७४३७४ ३७ ३६ 0:3४ '॥08 0४0५४ 95४४8 गैबर 30 हईे 280 १०४६ 20003 ४२ ॥४२॥ ॥2380६ ६६ #े७ ७0 4शझ्ड 8७ ४७ ॥७४०७ ४३७५ 2055 (503) ४४७४६ ७४ ॥20४०४-:॥॥

हरे >हातछ

१५४]99%795 88)990:3%582 + 0:04):27 728% ४3१४ ४९: ६॥. ] * 3 ॥८६ 3४7 2॥४7]0 0४ ४4:2% सवा कै॥ कासे 58 2४ ६30 2005 ंफ ॥0 अकेम हे -%90% 3५3932] 4% #3$ 25: 3७७४] #९१४४४३ उ'2४% 35% 45% ३१ 83% है; 78४] ४2८)४ 5७ 8 805 » 2४४ #प/%ऐ०7४८ (2#9४4::) 3: ॥5 %2] ७5 ४४३० ४७४६ 23 22१४ ३४६-॥४॥४ 499 30८ २४०॥५१६॥ 8 ४2 ३७ 32940 9)2005 85 ॥६ 23% 30]8:-घ्20 ४४0७७ १२८०० ेडे 20७०६ |५॥५४:७)।९२)५ ३) 89॥४५७ ॥७॥७ ७४॥६६४ ७४८ 42& ]४४०ऐट्रछ * $ 3५७०॥१९२७ ७8५४ ४७७७७४७:०॥४०७ 9032४ २५ ४३2 302४ ४२५३४) &8४॥४२७५४३४ एप ४डिफर2)8. ४४ ४3505 %३१५ ४९४॥५४ ॥६०४ ॥8]9]020७7॥8॥॥४ 0४ 2४४४ २४६४७ 42028 ३१2४ १2 (६४॥४ 9909४ शक ४8७४ ०२७३५७२४ इ्तााए] एम्क० हरै।४) ७० ०*॥ १७३९ ७७ ४:5%2]४ ६०% 8४४ :७४ि2:५ ॥श४४ ।४४ |३४७०॥२ )2७॥७०७ )२४०००)६ ॥28॥ 4७५) 320॥%% १०॥8१8 2०७] 29॥0 (20.5 3) |६ १४४ ७३३५॥६३ & 20५ १५४ 273)६ ॥9905) 299 >फररे 3 20४ 70॥ (०२१४ ४४ ॥६ अँडिफरे (७७ ३०0 ४३) ७४६-:०॥६ 8)22900978 8038] ॥४52४॥2) 9 :७४०२४/ 3७॥६ ॥28509:४448 8] (४६४३ &०७४ ५७३७ ४७४१४) ४४१ ७॥७३३॥॥६ ४३ १०४४४७०४७।४ ४७ ४५७४) ४४ १002)७ ७२४०७ ३७४ ४०:७१७४)४४ ७0२४३ 300॥॥४)३ १20299020%95%2॥ ७४ ४४४२७४७।७ 9०७: ३6 ॥2॥9/2॥302[९७5॥ ॥॥)६ ॥०%)>७७॥४:॥>

०४४०७ २४७४७ १208990]855 ४४

58 है 3ए३३ एम 293 ४६ | उ्ए0 है अध्क 288 80 है; ॥28 808] एल ४६७२० ॥008

38 3७७४3]४ 'थो १४४७३ 3४७४ है; आशड़े « ४०७ , +#00॥92]]६

कह

फ्े

अर) 2४०) अ्य ०७) 3) ४9) पाए लए 535 5७० 9७ हु ४०७)७६ है. एमम्जा है पथ बार गछे है दबे ह्ज)5०७ 9 कैम) पट ४४:२29॥-०4७ ०७ (६ ०6 #डै)& 9%0 7236 20७०: 3403300%६ ४>॥४७ है 09 0 ॥2०३७ ००व2 8४ 3० अघ2अ ६४४०) २८ है ॥20 209) 3»४) १५४४४ अफ्रेक >२ एड एक फल पे डछ के गण है 8५ 82४३ ।६ 3592२ पेड #ड७ दे रेट "है ३४४७ ॥2थ्फफाक ३४ 2४० है इ:4४ ३08 ४४) ॥६ ॥२)५स४ 3300५ अछ ३४७०२) | इशाफ मपुक्फ्टव5 परञ्2०फेछ 3०७ का. छुरेए जते ऋष्त हुई. कड़क मेरे हैं, फिर: 2४७ ३9४. ४७५93-+४१॥४४७! "8३७ ४-७ क्‍900 एप्प शेड ५७४१७-४ रे 20 ७६ मै० के लि ४७१8 ९२ ॥७947 ५ए२म' है छह ४५ 2१७ परे प५० 3209७ | है; अरे 9७४३४७४२॥४ 9 शष्च है-#. हर) 2) १४७ #033/: २५७४७-४४३ ४)१ 3४ % ४२ ४१०४ है; ४: अके 8 23 ७४5 >03४५-छ | १६ ४३ ४१2)एक 2 एस 93053). 4003003 $४५ 90॥ 3२ (४ ७02४ १४२४ 0०)७४६८-१: 2३४१४: है हः% हम्छ 283 है ग्रमक्‍म ५२)० 20४ 2४ है, ४०३४-१७ बडे पूछे मृशफरे8े ७०६ गे परडि-39 ४७४ :8 १20905 है00 ४७१ पक कब 8-फिका+ ०) >ेश्से2० 29 38%5४ :&-२३४६ है; 200६ 903) 22 इफाफत जड़ 9035 >0७ ४ए:४ काररे॥४5 385 2२३७ 8 99 फेक ४5 है. महल मेहर 9 9३। है; १११६ ऐश 5 ४४४७ 39 39४) 8 एणर)5 जि हेड 2)४ है८ 3६७ | है ४५ ३०४) १४५ 8७४ 3३% है ४१४३ (29249सेफेके ४६२७७६-१५७ 9938 रफेेफे -3093209 3७ ]६४ ०ऐ 2४% 235 ४४३७ है छेवे४ ०5०7 ॥० ४४:)४ (१ १९ ॥22॥93॥5. 93 2२928 339 ३389७ मम है| छै।8 हुए।७ हू 83 (४ ४४े१]३४ ४४ (६ 389 है॥७ 2३४ है; १९१४६ [+: है पे 32॥३ ३७४ 8202 33 फ%5 3७ हो अफ्ले हे ७३६ ॥४ 93 ५३ & -9४) (०४ ७7 ४५४ ४3 है 30७४१) २०४ ४2%08 ॥५ १६२४ 22))8 फह्ट& ७३४ '४१8७ है १3४६ 8३२३३६ 2४४ ४०५४ है ७छ है ॥६ ४४) #क। है. ुए३. २४७३ 20 ३४ 8७. ४3 >।४मै-मेम डे: अमे 3५ ४] 8 ३७४७४ हे है४. है झपतक्म 25४४ 8839 ३७ 883 ४०४७ ।2७ (७ ७४ ६०४७) 8 ३८७४ ४४ है; 8२ ४४१9 ४७४ :2४-0अ8 " ७७-8 00)7६ २॥७४-४३४७३ है 48 पड है उन २६७ 2०४ “2६ (ऐ #४ं६--29॥28905:0४ 08४० ६४00१

3६३3-25 शजे २४४६३ इसजड 2 0)

श्न

399४६ 9५4६४] ५4४७ 2७४॥089॥2: :7:४72॥7४--2४/2॥0020:90:%:-॥20७ 3 है (॥ ४2240 28६ ( #£एव५ * जे! (० 9/फ३:० (० 340040 > १४०८१ ( धाड (रू) 3ध्डछरे (० ॥:5572७ (# ७४ >कड (न ४४८१४ (8 छफाएव (॥ 05933 *0 ४४७७ वह टच ([ह ६४।७३७ 3 ॥33050 ३१४४ ४३ ४३; ७४ 0४:८६ ॥७ ४८$ : 4 ४६४ ॥३७॥ 2६७ ६६ &+# (इे-- ९८४६ कै 490 39%] 48॥925 ॥४ ४४ ५४३२४ 3६ $१ 4822£-3४४ 2१%) £/६ 3७ ३॥::% ॥६ ॥५४॥॥६ 20॥5 22] 8 ४498085 248 89५3 है 4६४२] 2:29] 4५७ ३४५४ '४॥७)॥७ ४४०)७७ ॥६ 8४) 375 #ए १४ ॥। आएछु+72:5200000030-3॥79/0४॥:४-ट (एड 402६88 ॥94%8 ॥४॥ 3७ है ४> : 2:0७ ९१ 750२ [६ ॥४४७७॥४ :0:9६ 3002 3)॥02 "४४७॥३ ५३)--२७ ॥2)०>] ३४ प/ ४९ ४४% 2]/5 02528 07 ४4949200-8%40 ४४४७ 9 ४॥ 20% ७७७ ४/७॥२००॥४६ ॥१<॥४-९ (६६४ ४१३8 &8॥-४७9०७६ 270 3४ 9908 25 3०पढे 02५५७ (०४४०॥।०४५) 820 3७ ४१२] एड 2९ 9०0003५23)5 ४7720) 2/2]/>०४४ ४-७ १९९४४ ७४४ ४:४४ 8: है. ४४ £8 222४२१४ 3७ प्रतध७ ६०१) ४४६ | है; ३०५ 204:894॥६ ॥2७४ ३]५७०४६ ॥७ ॥29] ए)8 ४४२ थिएक 3४ ४9४०७ 99६४७) है 32% :98 ४२-ऐ ४४४१) ४७ ६४8 8मे ४0॥25 हैं, [9॥ ४७४०७ ३६६ ४४ 3७ 9598 ७२०॥३ ६६ ॥४- ४५२४ ४25४-७४ ३६६ 230७ >५३३४४+ 88 '७४६॥:॥६ ४327 है; 5॥७४॥०४४॥७४४३॥४६ शक एकर॥2 0 20 ७४ ४8% ॥७१०॥ ४:)४४४ 2५2७ 35 ३0॥ [६ ५४४७ ४४३६४ १॥६ 875 ॥७ 8<७ ४४ ४७॥७ ३४ 02॥2] 5॥2 है; ॥072॥ ४ब# ॥७४४ 22 8४ ४७8 ३-७ 3४१२) है; !:(७४8 3० !३७४ ४५०॥॥॥७ 3॥७॥2 ००२०)४ 303:0739 ४०९ 2७ 0७४ 4७॥:७ ॥0802 +:४४ ॥9. ३८७ 2॥9 ५25७ '॥ 65) '५३)४७ १४२८४ '४8४॥ '७४६॥६ ३६४४77४ ॥>४ ३82 'है; ७0४७8) (७४ ४5४७] ३३५०० | है है. ४२५४४४१४ ३५ ७5७१३०७- ४४४]. ४६४ छ५४७ 00४2 ( पे +१० ०७ ७३२४ ॥-४०४४) है. ४४७ ॥205 !0%05)॥ ४2]७६ :७४ ७६३००] है ६४० धधमेडि एके ऐड है; ॥028 202५५ 808॥ !३०१६ ॥७ 39:५020 (93६0 ७४४२१)॥६ है १8/%% 300004 27३ ४2)30% %]4% (६२४४७ फार]६७8 ४३ पा ६8० ने. 8 ॥98॥# ३६७ 7.8 48 ॥४% ४०७३ [डे छाए] ४७७४-१७ ४, 3००६ गाय हर 285 छे& ७२ ६0 है. 200 2|:७9 ४४१७॥४ उद६-